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जागरूकता है हेपेटाइटिस का उपचार
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जागरूकता ही है हेपेटाइटिस का उपचार
बिजनौर। किसी को भी भ्रमित होने की जरूरत नहीं है, हेपेटाइटिस छूने से नहीं फैलता है। मगर फिर भी सावधानी बरतकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। चिकित्सकों की मानें तो कई बार लंबे समय तक, कभी-कभी वर्षों या दशकों तक लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और जो लीवर (यकृत) कैंसर का कारण बन जाता है।
आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जा रहा है। केवल एक दिन ही क्यों हमें हर दिन अन्य सभी बीमारियों के प्रति जागरूक होकर बचाव करना चाहिए। जिले में हेपेटाइटिस के कुल 52 मामले हैं। इनमें 25 हेपेटाइटिस बी और 27 हेपेटाइटिस सी के शामिल हैं। जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन डा. राधेश्याम वर्मा के अनुसार हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी होती है, जो वायरल इंफेक्शन होने के कारण होती है। इस अवस्था में लीवर में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस में ए,बी,सी,डी,ई पांच प्रकार के वायरस होते हैं। इन पांच प्रकारों को लेकर ही ज्यादा चिंता करने की जरूरत है। इनके कारण ही महामारी जैसी अवस्था हो रही है और मौत की आबादी बढ़ रही है। टाइप बी और सी लाखों लोगों में क्रॉनिक बीमारी का कारण बन रहे हैं। इनके कारण लीवर ऑफ द सिरोसिस और कैंसर होता है। हेपेटाइटिस के बारे में जानकारी और बच्चे को जन्म के बाद टीका लगवाकर बचा जा सकता है।
जिला अस्पताल के ही चेस्ट फिजीशियन हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस के प्रथम अवस्था में लक्षण कुछ साफ तरह पता नहीं चलता है, लेकिन क्रॉनिक अवस्था में इसके कुछ लक्षण नजर आ जाते हैं। इनमें त्वचा, आंखों का रंग पीला पड़ना, मूत्र का रंग गहरा होना, अत्यधिक थकान, मिचली, उल्टी, पेट दर्द और सूजन, खुजलाहट, भूख कम लगना, वजन का घटना आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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उपचार
एक्यूट हेपेटाइटिस (एचएवी एंड एचईवी) से राहत कुछ हफ्ते में मिल जाता है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस के लिए दवा लेने की जरूरत होती है। लीवर खराब हो जाने पर लीवर ट्रांसप्लैनटेशन भी एक विकल्प है।
रोकथाम
हेपेटाइटिस बी और सी की रोकथाम के लिए संक्रमण के पथ को कम करके हो सकता है। अपना रेजर, टूथब्रश और सुई को किसी से शेयर न करें, इससे इंफेक्शन का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
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बिजनौर। किसी को भी भ्रमित होने की जरूरत नहीं है, हेपेटाइटिस छूने से नहीं फैलता है। मगर फिर भी सावधानी बरतकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। चिकित्सकों की मानें तो कई बार लंबे समय तक, कभी-कभी वर्षों या दशकों तक लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और जो लीवर (यकृत) कैंसर का कारण बन जाता है।
आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जा रहा है। केवल एक दिन ही क्यों हमें हर दिन अन्य सभी बीमारियों के प्रति जागरूक होकर बचाव करना चाहिए। जिले में हेपेटाइटिस के कुल 52 मामले हैं। इनमें 25 हेपेटाइटिस बी और 27 हेपेटाइटिस सी के शामिल हैं। जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन डा. राधेश्याम वर्मा के अनुसार हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी होती है, जो वायरल इंफेक्शन होने के कारण होती है। इस अवस्था में लीवर में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस में ए,बी,सी,डी,ई पांच प्रकार के वायरस होते हैं। इन पांच प्रकारों को लेकर ही ज्यादा चिंता करने की जरूरत है। इनके कारण ही महामारी जैसी अवस्था हो रही है और मौत की आबादी बढ़ रही है। टाइप बी और सी लाखों लोगों में क्रॉनिक बीमारी का कारण बन रहे हैं। इनके कारण लीवर ऑफ द सिरोसिस और कैंसर होता है। हेपेटाइटिस के बारे में जानकारी और बच्चे को जन्म के बाद टीका लगवाकर बचा जा सकता है।
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जिला अस्पताल के ही चेस्ट फिजीशियन हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस के प्रथम अवस्था में लक्षण कुछ साफ तरह पता नहीं चलता है, लेकिन क्रॉनिक अवस्था में इसके कुछ लक्षण नजर आ जाते हैं। इनमें त्वचा, आंखों का रंग पीला पड़ना, मूत्र का रंग गहरा होना, अत्यधिक थकान, मिचली, उल्टी, पेट दर्द और सूजन, खुजलाहट, भूख कम लगना, वजन का घटना आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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उपचार
एक्यूट हेपेटाइटिस (एचएवी एंड एचईवी) से राहत कुछ हफ्ते में मिल जाता है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस के लिए दवा लेने की जरूरत होती है। लीवर खराब हो जाने पर लीवर ट्रांसप्लैनटेशन भी एक विकल्प है।
रोकथाम
हेपेटाइटिस बी और सी की रोकथाम के लिए संक्रमण के पथ को कम करके हो सकता है। अपना रेजर, टूथब्रश और सुई को किसी से शेयर न करें, इससे इंफेक्शन का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है।