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Bijnor News: दो मार्च की रात्रि को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
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बिजनौर। होलिका दहन और रंगोत्सव मनाने को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। ऐसे में पुरोहितों ने साफ किया है कि दो मार्च की रात्रि को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। जबकि, रंगोत्सव चार मार्च को मनाया जाना उचित है।
पंडित विनोद गोस्वामी ने बताया कि होलिका दहन की तिथि को लेकर इस वर्ष पंचांग और चंद्र ग्रहण के कारण भ्रम बना हुआ है। फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च शाम पांच बजकर 55 मिनट से शुरू होकर तीन मार्च को शाम पांच बजकर सात मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि होने पर ही होलिका दहन किया जाता है। इस आधार पर होलिका दहन का समय रात्रि डेढ़ बजे से पांच बजे के बीच रहेगा। वहीं, पंडित विजय भारद्वाज कहना है कि होलिका दहन का समय रात्रि एक बजकर 27 मिनट से दो बजकर 39 मिनट तक है। वहीं दोनों पंडितों ने तीन मार्च को चंद्रग्रहण बताया। इसलिए, रंग-गुलाल नहीं खेला जाएगा। जिसके चलते चार मार्च को ही रंगोत्सव मनाना उचित है। होलिका दहन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शुभ संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में होलिका दहन की विधि-विधान से पूजा करें। इसके अलावा घर में पारंपरिक पकवान जैसे पूड़ी, खीर, मालपुआ, गुझिया, हलवा और कचौड़ी बनाएं। इस दिन नृसिंह देव व हनुमानजी की पूजा कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। शाम के समय परिवार सहित चंद्रमा के दर्शन करें और होलिका दहन की अग्नि के दर्शन के बाद ही भोजन करें।
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पंडित विनोद गोस्वामी ने बताया कि होलिका दहन की तिथि को लेकर इस वर्ष पंचांग और चंद्र ग्रहण के कारण भ्रम बना हुआ है। फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च शाम पांच बजकर 55 मिनट से शुरू होकर तीन मार्च को शाम पांच बजकर सात मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि होने पर ही होलिका दहन किया जाता है। इस आधार पर होलिका दहन का समय रात्रि डेढ़ बजे से पांच बजे के बीच रहेगा। वहीं, पंडित विजय भारद्वाज कहना है कि होलिका दहन का समय रात्रि एक बजकर 27 मिनट से दो बजकर 39 मिनट तक है। वहीं दोनों पंडितों ने तीन मार्च को चंद्रग्रहण बताया। इसलिए, रंग-गुलाल नहीं खेला जाएगा। जिसके चलते चार मार्च को ही रंगोत्सव मनाना उचित है। होलिका दहन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शुभ संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में होलिका दहन की विधि-विधान से पूजा करें। इसके अलावा घर में पारंपरिक पकवान जैसे पूड़ी, खीर, मालपुआ, गुझिया, हलवा और कचौड़ी बनाएं। इस दिन नृसिंह देव व हनुमानजी की पूजा कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। शाम के समय परिवार सहित चंद्रमा के दर्शन करें और होलिका दहन की अग्नि के दर्शन के बाद ही भोजन करें।
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