{"_id":"62741445a197c7216454620d","slug":"amar-ujala-abhiyan-hospital-building-was-built-but-doctors-were-not-found-bijnor-news-mrt587373058","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला अभियान : अस्पताल भवन तो बने, पर नहीं मिले चिकित्सक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला अभियान : अस्पताल भवन तो बने, पर नहीं मिले चिकित्सक
विज्ञापन
धामपुर में सरकार की ओर से बना पड़ा सौ बेड के अस्पताल का भवन।
- फोटो : DHAMPUR
अमर उजाला अभियान : अस्पताल भवन तो बने, पर नहीं मिले चिकित्सक
बिजनौर। जिला अस्पताल हो या जिले की पीएचसी, सीएचसी, सभी जगहों पर इंतजाम तो खूब हुए, नए भवन बनने से लेकर ऑक्सीजन प्लांट तक लगे। वेंटिलेटर भी आए, लेकिन नहीं आए तो सरकारी चिकित्सक। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद हैं, लेकिन तैनाती मात्र 13 की है। जिलेभर की पीएचसी, सीएचसी के लिए 178 चिकित्सकों के पद तो हैं, पर 95 ही तैनात हैं। धामपुर में सौ बेड का अस्पताल बनाया गया, लेकिन अभी तक वहां चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल में से ही चिकित्सकों की तैनाती की बात करें तो यहां व्यवस्था की कमी नहीं है। वेंटिलेटर से लेकर अच्छी लैब, सिटी स्कैन तक की सुविधा यहां मौजूद है। मौजूद नहीं है तो हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ समेत 15 चिकित्सक। जी हां एक या दो साल से नहीं, करीब एक दशक से जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। कोरोनाकाल में स्वास्थ्य विभाग को निजी चिकित्सकों को संविदा पर जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए रखना पड़ा था। इस समय जिला अस्पताल में दो एनेस्थेटिक, दो बाल रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, एक फिजिशियन, एक ईएनटी, एक चेस्ट फिजिशियन, एक कार्डियोलॉजिस्ट, दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, एक पैथोलॉजिस्ट, एक अधीक्षक प्रभारी अधिकारी, एक डेंटल हाइजिनिस्ट, एक डेंटल सर्जन के पद खाली हैं। जिला अस्पताल में कोर्डियोलॉजिस्ट का पद 10 साल, एनेस्थेटिक का पद पांच साल और बाल रोग विशेषज्ञ का पद दो साल से खाली है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूरे जिले में कम हैं चिकित्सक
जिले में 11 सीएचसी और 11 पीएचसी और एडिशनल पीएचसी 45 हैं। इसके साथ ही जिले में उपकेंद्रों की संख्या 443 है। सीएमओ के अधीन जिले के सभी अस्पतालों में 178 में से 94 पद खाली चल रहे हैं। फार्मेसिस्ट के कुल पद 93 हैं, जिनमें से एक पद खाली हैं। जिले में स्टॉफ नर्स के कुल 38 पद हैं, जिनमें से 18 पद खाली हैं। एएनएम के जिले में 398 पद हैं, जिनमें से 201 पद खाली हैं।
विज्ञापन
30 करोड़ की लागत से बना अस्पताल
धामपुर। धामपुर में सरकार की ओर से करीब 30 करोड़ की लागत से बना सौ बेड का अस्पताल दो साल बाद भी चालू नहीं हो सका है। अस्पताल परिसर में पीएम केयर फंड से एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट भी लगा है। चिकित्सक न होने से न तो अस्पताल ही शुरू हुआ और न यह ऑक्सीजन प्लांट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी यादव को सीएमओ ने सौ बेड के अस्पताल का भी प्रभारी नियुक्त कर रखा है। केंद्र चिकित्सक डॉ. ओपी यादव ने बताया कि जब अस्पताल में स्टाफ की ही भर्ती नहीं है तो ऐेसे में अस्पताल कैसे चल सकता है। अस्पताल को चालू कराने को करीब 15 से 17 डॉक्टर चाहिए। वर्तमान में एक वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मी की तैनाती है।
शासन को पत्र लिखा गया है: सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से शासन को अवगत कराया गया है। करीब 15 चिकित्सकों की कमी चल रही है। पिछले दिनों शासन से भी चिकित्सकों की जानकारी मांगी गई थी।
विज्ञापन
बिजनौर। जिला अस्पताल हो या जिले की पीएचसी, सीएचसी, सभी जगहों पर इंतजाम तो खूब हुए, नए भवन बनने से लेकर ऑक्सीजन प्लांट तक लगे। वेंटिलेटर भी आए, लेकिन नहीं आए तो सरकारी चिकित्सक। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद हैं, लेकिन तैनाती मात्र 13 की है। जिलेभर की पीएचसी, सीएचसी के लिए 178 चिकित्सकों के पद तो हैं, पर 95 ही तैनात हैं। धामपुर में सौ बेड का अस्पताल बनाया गया, लेकिन अभी तक वहां चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल में से ही चिकित्सकों की तैनाती की बात करें तो यहां व्यवस्था की कमी नहीं है। वेंटिलेटर से लेकर अच्छी लैब, सिटी स्कैन तक की सुविधा यहां मौजूद है। मौजूद नहीं है तो हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ समेत 15 चिकित्सक। जी हां एक या दो साल से नहीं, करीब एक दशक से जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। कोरोनाकाल में स्वास्थ्य विभाग को निजी चिकित्सकों को संविदा पर जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए रखना पड़ा था। इस समय जिला अस्पताल में दो एनेस्थेटिक, दो बाल रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, एक फिजिशियन, एक ईएनटी, एक चेस्ट फिजिशियन, एक कार्डियोलॉजिस्ट, दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, एक पैथोलॉजिस्ट, एक अधीक्षक प्रभारी अधिकारी, एक डेंटल हाइजिनिस्ट, एक डेंटल सर्जन के पद खाली हैं। जिला अस्पताल में कोर्डियोलॉजिस्ट का पद 10 साल, एनेस्थेटिक का पद पांच साल और बाल रोग विशेषज्ञ का पद दो साल से खाली है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
पूरे जिले में कम हैं चिकित्सक
जिले में 11 सीएचसी और 11 पीएचसी और एडिशनल पीएचसी 45 हैं। इसके साथ ही जिले में उपकेंद्रों की संख्या 443 है। सीएमओ के अधीन जिले के सभी अस्पतालों में 178 में से 94 पद खाली चल रहे हैं। फार्मेसिस्ट के कुल पद 93 हैं, जिनमें से एक पद खाली हैं। जिले में स्टॉफ नर्स के कुल 38 पद हैं, जिनमें से 18 पद खाली हैं। एएनएम के जिले में 398 पद हैं, जिनमें से 201 पद खाली हैं।
विज्ञापन
30 करोड़ की लागत से बना अस्पताल
धामपुर। धामपुर में सरकार की ओर से करीब 30 करोड़ की लागत से बना सौ बेड का अस्पताल दो साल बाद भी चालू नहीं हो सका है। अस्पताल परिसर में पीएम केयर फंड से एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट भी लगा है। चिकित्सक न होने से न तो अस्पताल ही शुरू हुआ और न यह ऑक्सीजन प्लांट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी यादव को सीएमओ ने सौ बेड के अस्पताल का भी प्रभारी नियुक्त कर रखा है। केंद्र चिकित्सक डॉ. ओपी यादव ने बताया कि जब अस्पताल में स्टाफ की ही भर्ती नहीं है तो ऐेसे में अस्पताल कैसे चल सकता है। अस्पताल को चालू कराने को करीब 15 से 17 डॉक्टर चाहिए। वर्तमान में एक वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मी की तैनाती है।
शासन को पत्र लिखा गया है: सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से शासन को अवगत कराया गया है। करीब 15 चिकित्सकों की कमी चल रही है। पिछले दिनों शासन से भी चिकित्सकों की जानकारी मांगी गई थी।