सूची में गड़बड़ हुई तो अफसरों की खैर नहीं

Bijnor Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
धामपुर। तत्कालीन सरकार में लाखों की लागत से गांवों में बने सुलभ शौचालयों की जांच में तमाम खामियां उजागर हो रही हैं। जांच में 2001 से 12 तक बने शौचालयों की बीपीएल व एपीएल सूचियां ही ब्लाक से नदारद हैं। कई डीपीआरओ ने कहा कि सूचियों से छेड़छाड़ हुई है तो अधिकारी नहीं बख्शे जाएंगे।
शासनादेश पर विकास विभाग ने गांव-गांव जाकर वर्ष 2001 से 2012 तक बने सुलभ शौचालयों का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। सत्यापन के लिए ग्राम सचिवों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया गया है कि जिले में वर्ष 2011-12 में करीब 5500 शौचालय बनाने के लिए धन का आवंटित हुआ था। हर शौचालय पर करीब 1500 रुपये खर्च किए जाने थे। इनमें से अल्हैपुर ब्लाक में करीब 250 शौचालय व अफजलगढ़ ब्लाक में करीब 127 शौचालय बनवाना प्रस्तावित था, जिनमें से 83 शौचालय दहलावाला व 44 शौचालय उमरपुर नत्थन में बनाने थे। 2001 से 2012 तक अल्हैपुर ब्लाक में करीब आठ हजार शौचालय बनाने के लिए धन का आवंटन हुआ। अब जांच में सचिवों को न तो धरातल पर ही शौचालय नजर आ रहे हैं। न ही ब्लाक में जो सूची उपलब्ध होनी चाहिए थी वो ही मिल रही है। ग्राम सचिव ने बताया कि जो शौचालय मिल भी रहे हैं उनमें अधिकांश अपात्रों को सूची में शामिल कर दिलाए गए हैं। उधर, डीपीआरओ महेंद्र सिंह का कहना है यदि सूचियों से छेड़छाड़ हुई है तो तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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