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छात्र खिलाडियों के खेल चंदे में हो रहा खेल
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छात्र खिलाड़ियों के खेल चंदे में हो रहा खेल
शिक्षा विभाग के अफसरों की फाइलों में धूल फांकते रहते हैं छात्र खिलाड़ियों के बिल
बिजनौर। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों से खेल चंदा वसूला जाता है। छात्र खिलाड़ियों के लिए स्कूलों में खेल बजट भारी भरकम है, पर खिलाड़ियों को मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने में छात्रों के भोजन भत्ता व यात्रा भत्ता के भुगतान में खेल हो रहा है। इनके बिल शिक्षा विभाग के अफसरों की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। शिक्षक व अधिकारी मिल कर खेल चंदे में खेल कर रहे हैं। इसे लेकर छात्र खिलाड़ी परेशान हैं। शिक्षा विभाग की माने तो जिले के 1, 77, 982 पंजीकृत छात्रों से खेल चंदे के रूप में करीब 1,067,8930 रुपये की फीस वसूल की जाती है।
सरकार भले ही छात्र खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से प्रभावित करने में जुटी है, पर माध्यमिक शिक्षा विभाग में छात्र खिलाड़ियों को मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी टीए व डीए भुगतान को लेकर पापड़ बेलने पड़ते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में भारी भरकम खेल बजट होता है। कक्षा नौ, 10, 11 व 12 के छात्रों से प्रति छात्र पांच रुपये के हिसाब से खेल चंदा स्कूलों द्वारा लिया जाता है। इसी खेल चंदे से जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक की व्यवस्थाएं होती हैं। शिक्षा विभाग की माने तो प्राइवेट स्कूलों में 12 महीने तथा सरकारी शिक्षण संस्थाओं में 11 महीने का शुल्क लिया जाता हैं। स्कूल स्तर पर मनमानी होती है, पर जिले में मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता में खेलने वाले काफी छात्रों का किराया भत्ता व भोजन भत्ता अफसरों की फाइलों में धूल फांक रहा है। छात्र खिलाड़ी शिक्षकों के चक्कर लगाते थक गए हैं। बताते हैं कि अक्तूबर व नवंबर 2018 में मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता समाप्त हो गई पर खिलाड़ियों को अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। जिले के माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक 1, 77, 982 छात्र पंजीकृत हैं। इन सभी छात्रों से खेल शुल्क लिया जाता है। खेल शुल्क छात्रों से प्रति महीना पांच रुपये के हिसाब से लिया जाता है। पर छात्रों को अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी टरकाया जाता है। छात्र खिलाड़ी बताते हैं कि अफसर व शिक्षकों की मिलीभगत से उन्हें परेशानी होती है।
जिले के माध्यमिक स्कूलों में पंजीकृत छात्र
कक्षा कुल पंजीकृत छात्र
9 50023
10 51651
11 39423
12 36885
............................................................
कुल पंजीकृत छात्र 1,77,982
............................................................
नोट-ये आंकड़े जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से लिए गए हैं।
शासन के ये हैं आदेश
माध्यमिक शिक्षा विभाग की क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए शासन द्वारा कई सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के मुताबिक छात्र खिलाड़ियों को प्रतिदिन भोजन के लिए 175 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है। छात्रों को आने व जाने का बस किराए का भी भुगतान किया जाता है। यह भुगतान छात्रों की टीम के लेकर जाने वाले शिक्षक द्वारा बिल डीआईओएस कार्यालय में जमा करने के उपरांत किया जाता है।
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इन खिलाड़ियों का भी नहीं हुआ भुगतान
माध्यमिक स्कूलों की मंडल व प्रदेश स्तर पर वेटलिफ्टिंग में जिले का नाम रोशन करने वाले विशाल, नमन चौधरी व गौतम सिंह के टीए व डीए का भी नहीं हुआ है भुगतान। इनके अलावा कई छात्र खिलाड़ी शिक्षकों व डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगाते रहे हैं। भुगतान के नाम पर उन्हें टरकाया जा रहा है।
प्रधानाचार्यों के माध्यम से होता है भुगतान
डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से खेलों में जाने वाले छात्र खिलाड़ियों को टीए व डीए दिया जाता है। भुगतान कॉलेज के प्रधानाचार्य के द्वारा कराया जाता है। डीआईओएस कार्यालय में किसी भी छात्र खिलाड़ी के बिल बकाया नहीं है। यदि किसी छात्र खिलाड़ी का भुगतान नहीं हुआ है तो मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का भुगतान नहीं रुका हुआ है सब का भुगतान हो चुका है।
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शिक्षा विभाग के अफसरों की फाइलों में धूल फांकते रहते हैं छात्र खिलाड़ियों के बिल
बिजनौर। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों से खेल चंदा वसूला जाता है। छात्र खिलाड़ियों के लिए स्कूलों में खेल बजट भारी भरकम है, पर खिलाड़ियों को मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने में छात्रों के भोजन भत्ता व यात्रा भत्ता के भुगतान में खेल हो रहा है। इनके बिल शिक्षा विभाग के अफसरों की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। शिक्षक व अधिकारी मिल कर खेल चंदे में खेल कर रहे हैं। इसे लेकर छात्र खिलाड़ी परेशान हैं। शिक्षा विभाग की माने तो जिले के 1, 77, 982 पंजीकृत छात्रों से खेल चंदे के रूप में करीब 1,067,8930 रुपये की फीस वसूल की जाती है।
सरकार भले ही छात्र खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से प्रभावित करने में जुटी है, पर माध्यमिक शिक्षा विभाग में छात्र खिलाड़ियों को मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी टीए व डीए भुगतान को लेकर पापड़ बेलने पड़ते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में भारी भरकम खेल बजट होता है। कक्षा नौ, 10, 11 व 12 के छात्रों से प्रति छात्र पांच रुपये के हिसाब से खेल चंदा स्कूलों द्वारा लिया जाता है। इसी खेल चंदे से जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक की व्यवस्थाएं होती हैं। शिक्षा विभाग की माने तो प्राइवेट स्कूलों में 12 महीने तथा सरकारी शिक्षण संस्थाओं में 11 महीने का शुल्क लिया जाता हैं। स्कूल स्तर पर मनमानी होती है, पर जिले में मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता में खेलने वाले काफी छात्रों का किराया भत्ता व भोजन भत्ता अफसरों की फाइलों में धूल फांक रहा है। छात्र खिलाड़ी शिक्षकों के चक्कर लगाते थक गए हैं। बताते हैं कि अक्तूबर व नवंबर 2018 में मंडल व प्रदेश स्तर की क्रीड़ा प्रतियोगिता समाप्त हो गई पर खिलाड़ियों को अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। जिले के माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक 1, 77, 982 छात्र पंजीकृत हैं। इन सभी छात्रों से खेल शुल्क लिया जाता है। खेल शुल्क छात्रों से प्रति महीना पांच रुपये के हिसाब से लिया जाता है। पर छात्रों को अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी टरकाया जाता है। छात्र खिलाड़ी बताते हैं कि अफसर व शिक्षकों की मिलीभगत से उन्हें परेशानी होती है।
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जिले के माध्यमिक स्कूलों में पंजीकृत छात्र
कक्षा कुल पंजीकृत छात्र
9 50023
10 51651
11 39423
12 36885
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कुल पंजीकृत छात्र 1,77,982
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नोट-ये आंकड़े जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से लिए गए हैं।
शासन के ये हैं आदेश
माध्यमिक शिक्षा विभाग की क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए शासन द्वारा कई सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के मुताबिक छात्र खिलाड़ियों को प्रतिदिन भोजन के लिए 175 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है। छात्रों को आने व जाने का बस किराए का भी भुगतान किया जाता है। यह भुगतान छात्रों की टीम के लेकर जाने वाले शिक्षक द्वारा बिल डीआईओएस कार्यालय में जमा करने के उपरांत किया जाता है।
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इन खिलाड़ियों का भी नहीं हुआ भुगतान
माध्यमिक स्कूलों की मंडल व प्रदेश स्तर पर वेटलिफ्टिंग में जिले का नाम रोशन करने वाले विशाल, नमन चौधरी व गौतम सिंह के टीए व डीए का भी नहीं हुआ है भुगतान। इनके अलावा कई छात्र खिलाड़ी शिक्षकों व डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगाते रहे हैं। भुगतान के नाम पर उन्हें टरकाया जा रहा है।
प्रधानाचार्यों के माध्यम से होता है भुगतान
डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से खेलों में जाने वाले छात्र खिलाड़ियों को टीए व डीए दिया जाता है। भुगतान कॉलेज के प्रधानाचार्य के द्वारा कराया जाता है। डीआईओएस कार्यालय में किसी भी छात्र खिलाड़ी के बिल बकाया नहीं है। यदि किसी छात्र खिलाड़ी का भुगतान नहीं हुआ है तो मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का भुगतान नहीं रुका हुआ है सब का भुगतान हो चुका है।