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रैन बसेरा
Updated Tue, 15 Aug 2017 12:04 AM IST
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बिजनौर । अब रात में रुकने के लिए बिजनौर जैसे जिला मुख्यालयों पर रहने के लिए होटल या धर्मशाला खोजने की जरूरत नहीं होगी। सरकारी रैन बसेरे में उन्हें रहने के साथ भोजन की सुविधा भी मिलेगी।
प्राय: सर्दी में पालिकाएं यात्रियों और नगर के बेघर व्यक्तियों के लिए रैन बसेेेरे बनाती थी। जाड़ों में यहां सर छुपाने को जगह तो मिल जाती थी लेकिन जनसुविधाओं की सही व्यवस्था नहीं होती थी। स्नान आदि के लिए तो सरकारी टोंटी का सहारा लेना पड़ता था। कड़कड़ाती ठंड में इन टोटियों के नीचे बैठकर स्नान करना जंग जीतने के बराबर होता था। शौचालय जाने की भी यहां सुविधा न के बराबर रहती है । टेंट में भीषण ठंड में भी रात काटने में परेशानी होती थी।
इस सब को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिए कि शहरी बेघरों के लिए सरकार आश्रय उपलब्ध कराए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अब हर जिला मुख्यालय और बड़े नगरों में आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। बिजनौर में योजना के अंतर्गत आश्रय गृह बनकर तैयार है। बस उद्घाटन का इंतजार है।
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बिजनौर में यह आश्रम स्थल इंदिरा बाल भवन के बाहर बना है। तिंमजिले भवन में 50 व्यक्तियों के रुकने का प्रबंध होगा। यहां महिलाओं और पुरुषों के डारमेटरी की व्यवस्था है, वहीं परिवार के लिए दो कक्ष का अलग से प्रबंध है। विकलांगों के लिए अलग से रहने की व्यवस्था की गई है। डारमेटरी में सामान रखने के लिए लॉकर बनाए गए हैं। इस योजना पर एक करोड़ 17 लाख रुपया व्यय हुआ। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका। बेड और अन्य फर्नीचर लग गए हैं। बिजली चालू हो गई है। बस उद्घाटन का इंतजार है। डूडा के यहां से स्थानांतरित हुए परियोजना निदेशक धन प्रकाश ने बताया कि जिलाधिकारी किसी एनजीओ को इसका संचालन सौंपेंगे। यह एनजीओ ही वहां रहने वालों को बहुत कम दाम पर भोजन भी उपलब्ध कराएगी।
एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेंद्र राम ने कहा कि उन्होंने इसका निरीक्षण किया है। एक-दो छोटी-मोटी कमी रह गई है, उन्हें जल्दी पूरा कराने के आदेश दिए गए हैं। यह आश्रय स्थल जाड़ों से पहले प्रारंभ हो जाएगा।
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प्राय: सर्दी में पालिकाएं यात्रियों और नगर के बेघर व्यक्तियों के लिए रैन बसेेेरे बनाती थी। जाड़ों में यहां सर छुपाने को जगह तो मिल जाती थी लेकिन जनसुविधाओं की सही व्यवस्था नहीं होती थी। स्नान आदि के लिए तो सरकारी टोंटी का सहारा लेना पड़ता था। कड़कड़ाती ठंड में इन टोटियों के नीचे बैठकर स्नान करना जंग जीतने के बराबर होता था। शौचालय जाने की भी यहां सुविधा न के बराबर रहती है । टेंट में भीषण ठंड में भी रात काटने में परेशानी होती थी।
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इस सब को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिए कि शहरी बेघरों के लिए सरकार आश्रय उपलब्ध कराए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अब हर जिला मुख्यालय और बड़े नगरों में आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। बिजनौर में योजना के अंतर्गत आश्रय गृह बनकर तैयार है। बस उद्घाटन का इंतजार है।
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बिजनौर में यह आश्रम स्थल इंदिरा बाल भवन के बाहर बना है। तिंमजिले भवन में 50 व्यक्तियों के रुकने का प्रबंध होगा। यहां महिलाओं और पुरुषों के डारमेटरी की व्यवस्था है, वहीं परिवार के लिए दो कक्ष का अलग से प्रबंध है। विकलांगों के लिए अलग से रहने की व्यवस्था की गई है। डारमेटरी में सामान रखने के लिए लॉकर बनाए गए हैं। इस योजना पर एक करोड़ 17 लाख रुपया व्यय हुआ। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका। बेड और अन्य फर्नीचर लग गए हैं। बिजली चालू हो गई है। बस उद्घाटन का इंतजार है। डूडा के यहां से स्थानांतरित हुए परियोजना निदेशक धन प्रकाश ने बताया कि जिलाधिकारी किसी एनजीओ को इसका संचालन सौंपेंगे। यह एनजीओ ही वहां रहने वालों को बहुत कम दाम पर भोजन भी उपलब्ध कराएगी।
एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेंद्र राम ने कहा कि उन्होंने इसका निरीक्षण किया है। एक-दो छोटी-मोटी कमी रह गई है, उन्हें जल्दी पूरा कराने के आदेश दिए गए हैं। यह आश्रय स्थल जाड़ों से पहले प्रारंभ हो जाएगा।