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शब-ए-बरात पर पूरी रात की इबादत
Updated Wed, 02 May 2018 11:52 PM IST
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जलालाबाद/नजीबाबाद। शब-ए-बरात पर पूरी रात लोगों ने इबादत की। जलालाबाद और सब्नीग्रान में दीनी जलसे का आयोजन किया गया। उलेमा ने शब-ए-बरात को इबादत की रात बताते हुए अल्लाह की ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की सलाह दी।
जलालाबाद के मोहल्ला कुरैशियान में मौलाना शाहिद मंसूरपुरी की अध्यक्षता में दीनी जलसा हुआ। जलसे को खिताब करते हुए शाहिद मंसूरी ने कहा कि जो लोग शब-ए-बरात के मौके पर पूरी रात इबादत करते हैं, अल्लाह उनके गुनाहों को माफ करता है। उन पर रहमतों और नेकियों की बारिश करता है। उलमा ने अपने खिताब में फिजूल खर्च रोकने, मां-बाप की फरमा बरदारी करने तथा बुराइयों से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जो लोग ब्याज का काम करते हैैं वो इस्लाम के खिलाफ चलते हैं। जलसे में महमूद कुरैशी, डॉ. मकसूद, कारी यामीन, लियाकत अंसारी, महबूब कुरैशी, खुर्शीद शेख, यूनुस कुरैशी, डॉ. जाकिर, मुफ्ती नौमान, मो. आबिद, शाहिद शेेख सहित अनेक नागरिक मौजूद थे। नजीबाबाद में भी शब-ए-बरात के मौके पर दीनी जलसे और इबादत का सिलसिला पूरी रात चलता रहा। जामा मस्जिद सहित नगर की विभिन्न मस्जिदों में लोगों ने खास इबादत की। अल्लाह से गुनाहों के लिए तौबा की। उलमा ने कहा कि शब-ए-बरात पर हलवा बनाना, पटाखे छोड़ना और शोर शराबा करना जायज नहीं है। कब्रिस्तान पहुंचकर लोगों ने दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों की मगफिरत की दुआ की।
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जलालाबाद के मोहल्ला कुरैशियान में मौलाना शाहिद मंसूरपुरी की अध्यक्षता में दीनी जलसा हुआ। जलसे को खिताब करते हुए शाहिद मंसूरी ने कहा कि जो लोग शब-ए-बरात के मौके पर पूरी रात इबादत करते हैं, अल्लाह उनके गुनाहों को माफ करता है। उन पर रहमतों और नेकियों की बारिश करता है। उलमा ने अपने खिताब में फिजूल खर्च रोकने, मां-बाप की फरमा बरदारी करने तथा बुराइयों से बचने की सलाह दी।
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उन्होंने कहा कि जो लोग ब्याज का काम करते हैैं वो इस्लाम के खिलाफ चलते हैं। जलसे में महमूद कुरैशी, डॉ. मकसूद, कारी यामीन, लियाकत अंसारी, महबूब कुरैशी, खुर्शीद शेख, यूनुस कुरैशी, डॉ. जाकिर, मुफ्ती नौमान, मो. आबिद, शाहिद शेेख सहित अनेक नागरिक मौजूद थे। नजीबाबाद में भी शब-ए-बरात के मौके पर दीनी जलसे और इबादत का सिलसिला पूरी रात चलता रहा। जामा मस्जिद सहित नगर की विभिन्न मस्जिदों में लोगों ने खास इबादत की। अल्लाह से गुनाहों के लिए तौबा की। उलमा ने कहा कि शब-ए-बरात पर हलवा बनाना, पटाखे छोड़ना और शोर शराबा करना जायज नहीं है। कब्रिस्तान पहुंचकर लोगों ने दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों की मगफिरत की दुआ की।
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