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सामाजिक एवं आर्थिक विशमता की शिकार हो रही मुस्लिम बेटियां
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:48 AM IST
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अमरोहा। मुस्लिम बेटियां आज भी आर्थिक एवं सामाजिक विषमता की शिकार हो रही है। इन्हें संविधान से प्राप्त आधारभूत सुुविधाएं न मिलने से उच्च शिक्षा से वंचित हो जा रही है। यह बातें शनिवार को अमरोहा हाशिमी कालेज आफ ला के परिसर में आयोजित सेमिनार के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया की डीन प्रो. नुजहत परवीन ने कही। उन्होंने कहा कि संविधान प्रद्त समानता के अधिकार के बावजूद आज महिलाएं भेदभाव का शिकार हैं। 6 से 14 वर्ष की 25 फीसदी बेटियां आज भी स्कूली शिक्षा से वंचित है। उन्होंने मुस्लिम बच्चों को आधारभूत सुविधाएं दिए जाने की मांग की।
अलीगढ़ मुस्लिम विवि के प्रो. जफर महफूज नोमानी ने कहा कि मदरसा प्रणाली का कोई दोष नहीं है। प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर से बच्चियां आगे नहीं बढ़ पा रही है। जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम बच्चियों के हालात बहुत ही नाजुक हो गए हैं। इससे पूर्व डा. राना परवीन ने आए अतिथियों का स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सिराजुद्दीन हाशमी, इकबाल खां, डा. शैला सिद्दीकी, शहनाज अख्तर आदि ने भाग लिया।
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अलीगढ़ मुस्लिम विवि के प्रो. जफर महफूज नोमानी ने कहा कि मदरसा प्रणाली का कोई दोष नहीं है। प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर से बच्चियां आगे नहीं बढ़ पा रही है। जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम बच्चियों के हालात बहुत ही नाजुक हो गए हैं। इससे पूर्व डा. राना परवीन ने आए अतिथियों का स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सिराजुद्दीन हाशमी, इकबाल खां, डा. शैला सिद्दीकी, शहनाज अख्तर आदि ने भाग लिया।
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