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चार साल का बच्चा प्लेटफार्म पर छोड़ गई मां
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:59 PM IST
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जीआरपी के एक सिपाही ने उसे प्रेमधाम आश्रम में भर्ती कराया
बच्चा न सून सकता है और नहीं बोल सकता है, नहीं हुई पहचान
स्योहारा (बिजनौर)। एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को इस दुनिया में अकेले जीने के लिए सिर्फ इसलिए छोड़ देती है कि वह बोल और सून नहीं सकता है। उस मां को थोड़ी सी दया नहीं आई कि वह अपने चार साल के बेटे को जिस समय मां की आंचल की जरूरत होती है, वह अकेले इस दुनिया से कैसे लड़ेगा। कुछ भी कारण रहा हो, मां तो मां है। अपने जिगर के टुकड़े को अपने से अलग करने के लिए इस कटोर दिलवाली मां को दया नहीं आई। स्योहारा रेलवे स्टेशन पर एक मां अपने चार साल के बच्चे को छोड़कर चली गई। बच्चे का कसूर इतना है कि वह बोल और सून नहीं सकता। जीआरपी ने बच्चे को प्रेमधाम नजीबाबाद में भर्ती कराया।
मंगलवार दोपहर स्योहारा रेलवे स्टेशन पर सहारनपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन के लिए बहुत भीड़ थी। ट्रेन के जाने के बाद प्लेटफार्म नंबर दो के नए बने टीन शेड के नीचे एक बैंच पर एक बच्चा बैठा रो रहा था। जीआरपी के सिपाही अशोक कुमार की नजर उस बच्चे पर गई। उन्होंने ट्रेन से उतर कर जाने वाले यात्रियों से बच्चे की पहचान कराई। किसी ने भी बच्चे को नहीं पहचाना। अशोक कुमार के अनुसार बच्चा चार वर्ष का है बोल और सुन नहीं सकता है, साथ ही थोड़ा मंदबुद्धि भी लगता है। मंगलवार को जीआरपी की ओर से बच्चे की पहचान कराने की पूरी कोशिश की गई। ताकि जिसका बच्चा हो वह अपने बच्चे को ले जाए। जब बच्चे को कोई पहचान नहीं हुई, न ही कोई बच्चे को लेने आया तो जीआरपी के सिपाही अशोक कुमार बुधवार को बच्चे को प्रेमधाम नजीबाबाद में भर्ती कराने ले गए।
वहीं एक युवती ने बताया कि मंगलवार को सहारनपुर पैसेंजर से वह नगीना जा रही थी। एक महिला बच्चे को लेकर प्लेटफार्म पर बैठी थी। महिला ने बातों बातों में उसे बताया था कि उसका बच्चा दिव्यांग है। वह बोल और सून नहीं सकता है, जिसके कारण उसका परिवार उसे ताने देता है। ट्रेन आने पर वह महिला किस डिब्बे में चढ़ी और अपने बच्चे को साथ ले गई या नहीं यह उसे ध्यान नहीं। लेकिन जब रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर दो पर किसी दिव्यांग बच्चे के मिलने का पता चला तो समझ में आया कि वह महिला अपने कलेजे के टुकड़े को परिवार के ताने के डर से स्टेशन पर छोड़ कर चली गई है।
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बच्चा न सून सकता है और नहीं बोल सकता है, नहीं हुई पहचान
स्योहारा (बिजनौर)। एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को इस दुनिया में अकेले जीने के लिए सिर्फ इसलिए छोड़ देती है कि वह बोल और सून नहीं सकता है। उस मां को थोड़ी सी दया नहीं आई कि वह अपने चार साल के बेटे को जिस समय मां की आंचल की जरूरत होती है, वह अकेले इस दुनिया से कैसे लड़ेगा। कुछ भी कारण रहा हो, मां तो मां है। अपने जिगर के टुकड़े को अपने से अलग करने के लिए इस कटोर दिलवाली मां को दया नहीं आई। स्योहारा रेलवे स्टेशन पर एक मां अपने चार साल के बच्चे को छोड़कर चली गई। बच्चे का कसूर इतना है कि वह बोल और सून नहीं सकता। जीआरपी ने बच्चे को प्रेमधाम नजीबाबाद में भर्ती कराया।
मंगलवार दोपहर स्योहारा रेलवे स्टेशन पर सहारनपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन के लिए बहुत भीड़ थी। ट्रेन के जाने के बाद प्लेटफार्म नंबर दो के नए बने टीन शेड के नीचे एक बैंच पर एक बच्चा बैठा रो रहा था। जीआरपी के सिपाही अशोक कुमार की नजर उस बच्चे पर गई। उन्होंने ट्रेन से उतर कर जाने वाले यात्रियों से बच्चे की पहचान कराई। किसी ने भी बच्चे को नहीं पहचाना। अशोक कुमार के अनुसार बच्चा चार वर्ष का है बोल और सुन नहीं सकता है, साथ ही थोड़ा मंदबुद्धि भी लगता है। मंगलवार को जीआरपी की ओर से बच्चे की पहचान कराने की पूरी कोशिश की गई। ताकि जिसका बच्चा हो वह अपने बच्चे को ले जाए। जब बच्चे को कोई पहचान नहीं हुई, न ही कोई बच्चे को लेने आया तो जीआरपी के सिपाही अशोक कुमार बुधवार को बच्चे को प्रेमधाम नजीबाबाद में भर्ती कराने ले गए।
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वहीं एक युवती ने बताया कि मंगलवार को सहारनपुर पैसेंजर से वह नगीना जा रही थी। एक महिला बच्चे को लेकर प्लेटफार्म पर बैठी थी। महिला ने बातों बातों में उसे बताया था कि उसका बच्चा दिव्यांग है। वह बोल और सून नहीं सकता है, जिसके कारण उसका परिवार उसे ताने देता है। ट्रेन आने पर वह महिला किस डिब्बे में चढ़ी और अपने बच्चे को साथ ले गई या नहीं यह उसे ध्यान नहीं। लेकिन जब रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर दो पर किसी दिव्यांग बच्चे के मिलने का पता चला तो समझ में आया कि वह महिला अपने कलेजे के टुकड़े को परिवार के ताने के डर से स्टेशन पर छोड़ कर चली गई है।
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