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गुलदार के जोड़े ने हमला कर तीन बकरीं मार डालीं, ग्रामीणों में दहशत
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:33 AM IST
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गुलदार के हमले से ग्रामीण भयभीत
नींदडू़। गुलदार के जोड़े ने कमरे में बंधी दो बकरी पर हमला कर उन्हें निवाला बना लिया। तीन दिन पूर्व भी गुलदार ने यहां पर एक बकरी को मार दिया था। गुलदार द्वारा आबादी में घुसकर पशुओं पर हमला करने से ग्रामीणों में दहशत है।
अबरार अहमद की पशुशाला ईदगाह मार्ग पर मस्जिद उमर के पास है। पशुशाला के एक हिस्से में टीन शेड में भैंस बांधी जाती हैं। उसके सामने बने कमरे में वह बकरी बांधता हैं। कमरे में दरवाजा नहीं है। अबरार अहमद ने बताया कि तीन दिन पहले गुलदार के जोड़े ने कमरे में प्रवेश कर तीन में से एक बकरी को मार डाला था। अबरार ने बताया कि कमरे में खड़खड़ाहट से उसकी आंख खुल गई। उसने कमरे के दरवाजे में टॉर्च की रोशनी डाली तथा लाठी फटकारी। रोशनी देख व आहट सुनते ही गुलदार कमरे से बाहर आए और छलांग लगाते हुए सड़क के रास्ते जंगल की ओर भाग गए। चार दिन में तीन बकरी मार डालने के कारण जहां अबरार का परिवार दुखी है। वहीं मोहल्ले वालों में दहशत व्याप्त है। उन्होंने वन विभाग से गुलदार के जोड़े को पकड़कर जंगल में छोड़ने की मांग की है।
विभाग के पास बजट नहीं: रेंजर
वन क्षेत्र अधिकारी एके श्रीवास्तव ने बताया कि अबरार अहमद के यहां टीम भेजकर जांच कराने के साथ मौके का नक्शा बनवाया गया है। घटना से प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। विभाग के पास हिंसक जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए कोई बजट नहीं है। यदि ग्रामीण या ग्राम पंचायत आर्थिक सहयोग कर पिंजरे में रखने के लिए बकरी आदि की व्यवस्था कर दें। तब गुलदार पाए जाने वाले क्षेत्र में पिंजरे के माध्यम से गुलदारों को पकड़ कर वन में छोड़ा जाना संभव हो सकेगा। मौका मुआयना करने आए वन रक्षक एवं हल्का इंचार्ज तेजपाल सिंह तथा दीप सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सक द्वारा बकरियों के शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। फिर चिकित्सीय रिपोर्ट और पशु की आयु के आधार पर मृत बकरियों के मुआवजे की धन राशि अवमुक्त की जाएगी।
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नींदडू़। गुलदार के जोड़े ने कमरे में बंधी दो बकरी पर हमला कर उन्हें निवाला बना लिया। तीन दिन पूर्व भी गुलदार ने यहां पर एक बकरी को मार दिया था। गुलदार द्वारा आबादी में घुसकर पशुओं पर हमला करने से ग्रामीणों में दहशत है।
अबरार अहमद की पशुशाला ईदगाह मार्ग पर मस्जिद उमर के पास है। पशुशाला के एक हिस्से में टीन शेड में भैंस बांधी जाती हैं। उसके सामने बने कमरे में वह बकरी बांधता हैं। कमरे में दरवाजा नहीं है। अबरार अहमद ने बताया कि तीन दिन पहले गुलदार के जोड़े ने कमरे में प्रवेश कर तीन में से एक बकरी को मार डाला था। अबरार ने बताया कि कमरे में खड़खड़ाहट से उसकी आंख खुल गई। उसने कमरे के दरवाजे में टॉर्च की रोशनी डाली तथा लाठी फटकारी। रोशनी देख व आहट सुनते ही गुलदार कमरे से बाहर आए और छलांग लगाते हुए सड़क के रास्ते जंगल की ओर भाग गए। चार दिन में तीन बकरी मार डालने के कारण जहां अबरार का परिवार दुखी है। वहीं मोहल्ले वालों में दहशत व्याप्त है। उन्होंने वन विभाग से गुलदार के जोड़े को पकड़कर जंगल में छोड़ने की मांग की है।
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विभाग के पास बजट नहीं: रेंजर
वन क्षेत्र अधिकारी एके श्रीवास्तव ने बताया कि अबरार अहमद के यहां टीम भेजकर जांच कराने के साथ मौके का नक्शा बनवाया गया है। घटना से प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। विभाग के पास हिंसक जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए कोई बजट नहीं है। यदि ग्रामीण या ग्राम पंचायत आर्थिक सहयोग कर पिंजरे में रखने के लिए बकरी आदि की व्यवस्था कर दें। तब गुलदार पाए जाने वाले क्षेत्र में पिंजरे के माध्यम से गुलदारों को पकड़ कर वन में छोड़ा जाना संभव हो सकेगा। मौका मुआयना करने आए वन रक्षक एवं हल्का इंचार्ज तेजपाल सिंह तथा दीप सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सक द्वारा बकरियों के शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। फिर चिकित्सीय रिपोर्ट और पशु की आयु के आधार पर मृत बकरियों के मुआवजे की धन राशि अवमुक्त की जाएगी।
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