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सामाजिक वानिकी का दावा- बाजोपुर में नहीं कोई सांप
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:31 AM IST
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वन विभाग का दावा, ग्रामीणों को डस रहा है उड़न सांप
नजीबाबाद (बिजनौर)।
सामाजिक वानिकी विभाग के कर्मचारियों का दावा है कि बाजोपुर में ग्रामीणों को सांप नहीं डस रहा है। बल्कि ग्रामीण चीन, श्रीलंका और मध्य भारत में पाए जाने वाले क्रिसोपिली जींस (उड़न सांप) के शिकार हो रहे हैं। उनका कहना है कि इसके काटने से मनुष्य को जान का नुकसान नहीं होता है।
बीते एक पखवाड़े से बाजोपुर के ग्रामीणों में सांप की दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों का दावा है कि सात जून और 17 जून को सांप के डसने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। परिजन उनके शव को जल में बहा चुके हैं। सर्पदंश से पीड़ित दर्जनभर ग्रामीण जहां-तहां उपचार करा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वॉयल न होने और वनकर्मियों द्वारा सांप न पकड़ने से ग्रामीणों में रोष है। मीडिया के प्रयासों के बाद आखिर सामाजिक वानिकी विभाग को गांव पहुंचकर सांप तलाशने की सुुध आई।
वन रेंजर धीरेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में पहुंची गुरुनारायण यादव, कोटेश त्यागी, अक्षय कुमार, प्रेमलाल बड़ोला की टीम को छानबीन में कोई सांप नहीं मिला, तो उन्होंने गांव में कोई सांप ही नहीं होने का दावा कर दिया। वन रेंजर का कहना है कि संभवत: यह चीन, श्रीलंका और मध्य भारत में पाया जाने वाला क्रिसोपिली जींस (उड़न सांप) है। जिसके काटने से मनुष्य विचलित तो होता है, लेकिन उसे कोई हानि नहीं होती। वन रेंजर का कहना है कि सांप के काटने से मनुष्य में मांसपेशियों में ऐंठन, अंगघात, पलकों का गिरना, थूक-मूत्र में रकतस्राव, श्वसन क्रिया रुकना, शरीर में जलन जैसे लक्षण नजर आते हैं। गांव में जो लोग सर्पदंश के शिकार होने की बात कह रहे हैं, उनमें ऐसे लक्षण नजर नहीं आए हैं। इससे स्पष्ट है कि गांव में कोई सांप नहीं है।
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नजीबाबाद (बिजनौर)।
सामाजिक वानिकी विभाग के कर्मचारियों का दावा है कि बाजोपुर में ग्रामीणों को सांप नहीं डस रहा है। बल्कि ग्रामीण चीन, श्रीलंका और मध्य भारत में पाए जाने वाले क्रिसोपिली जींस (उड़न सांप) के शिकार हो रहे हैं। उनका कहना है कि इसके काटने से मनुष्य को जान का नुकसान नहीं होता है।
बीते एक पखवाड़े से बाजोपुर के ग्रामीणों में सांप की दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों का दावा है कि सात जून और 17 जून को सांप के डसने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। परिजन उनके शव को जल में बहा चुके हैं। सर्पदंश से पीड़ित दर्जनभर ग्रामीण जहां-तहां उपचार करा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वॉयल न होने और वनकर्मियों द्वारा सांप न पकड़ने से ग्रामीणों में रोष है। मीडिया के प्रयासों के बाद आखिर सामाजिक वानिकी विभाग को गांव पहुंचकर सांप तलाशने की सुुध आई।
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वन रेंजर धीरेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में पहुंची गुरुनारायण यादव, कोटेश त्यागी, अक्षय कुमार, प्रेमलाल बड़ोला की टीम को छानबीन में कोई सांप नहीं मिला, तो उन्होंने गांव में कोई सांप ही नहीं होने का दावा कर दिया। वन रेंजर का कहना है कि संभवत: यह चीन, श्रीलंका और मध्य भारत में पाया जाने वाला क्रिसोपिली जींस (उड़न सांप) है। जिसके काटने से मनुष्य विचलित तो होता है, लेकिन उसे कोई हानि नहीं होती। वन रेंजर का कहना है कि सांप के काटने से मनुष्य में मांसपेशियों में ऐंठन, अंगघात, पलकों का गिरना, थूक-मूत्र में रकतस्राव, श्वसन क्रिया रुकना, शरीर में जलन जैसे लक्षण नजर आते हैं। गांव में जो लोग सर्पदंश के शिकार होने की बात कह रहे हैं, उनमें ऐसे लक्षण नजर नहीं आए हैं। इससे स्पष्ट है कि गांव में कोई सांप नहीं है।
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