15 August: चूल्हा-चौका छोड़ आंदोलन में कूदी थीं मनकुआ की तीन महिलाएं, विदेशी कपड़ों की होली जलाने में जेल गईं
बिजनाैर जनपद की धामपुर तहसील के गांव मनकुआ निवासी तीन वीरांगनाएं भी स्वतंत्रता सग्रांम का हिस्सा रहीं। इन तीनों की महिलाओं ने चूल्हा-चाैका छोड़ आजादी की लड़ाई में पुरुषों के साथ मिलकर देश को आजादी दिलाने में अपनी भागीदारी निभाई।
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आजादी के आंदोलन में पुरुषों के साथ ही महिलाओं ने भी अपनी भागीदारी निभाई। बिजनाैर जनपद की धामपुर तहसील के गांव मनकुआ निवासी तीन वीरांगनाएं हरदेई, फूलवती व युद्धिया देवी चूल्हा-चौका छोड़ स्वतंत्रता के आंदोलन में कूद पड़ी थीं। अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें जेल भी भेजा था।
चर्खा संघ के प्रबंधक डा. जसवंत सिंह के आग्रह पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 13 अक्तूबर 1929 को विजयदशमी के दिन सुबह करीब 11 बजे रेलगाड़ी से मुरादाबाद से धामपुर पहुंचे। उन्होंने केएम इंटर कालेज धामपुर के मैदान में करीब 20 हजार लोगों को संबोधित किया था। इनमें पांच हजार महिलाएं थीं।
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मनकुआ से डाॅ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई, किशोर मनोहर सिंह अपनी माता फूलवती देवी एवं प्रवीण सिंह अपनी माता युद्धिया देवी के साथ महात्मा गांधी के विचार सुनने के लिए आठ किलोमीटर का पैदल सफर कर सभा में पहुंचे थे। इन महिलाओं ने अंग्रेजी शासन का विरोध किया और लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित भी किया।
पुलिस ने 1933 में ब्रिटिश शासन का विरोध करने और जिला मुख्यालय पर विदेशी कपड़ों की होली जलाने के आरोप में हरदेई, फूलवती देवी और युद्धिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने के कारण महिलाओं के घरों की कुर्की की गई।
महिलाओं के परपौत्र सेवानिवृत अध्यापक कीर्ति कुमार, देवराज सिंह और चेतन कुमार बताते हैं कि जेल में कैद इन महिलाओं से साफ-सफाई के अलावा निर्धारित मात्रा में आटा पीसने और खाना बनाने का कार्य कराया जाता था।