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मानक पर खरे नहीं उतरे सात स्कूली वाहन, नोटिस
Updated Mon, 09 Apr 2018 02:00 AM IST
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अमरोहा। परिवहन निगम ने रविवार को स्कूली वाहनों की जांच पड़ताल की। विभाग की तीन टीमों ने शहर से लेकर गांव तक के स्कूलों में संचालित 102 वाहनों का मुआयना किया। जांच पड़ताल में सात वाहन मानक पर खरे नहीं उतरे। इन वाहनों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। साथ ही चालकों के विद्यालय की ओर से बस संचालक के लिए प्रदत्त प्रमाणपत्र नहीं मिला। जिस पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया।
रविवार को एआरटीओ प्रवर्तन राजेश सिंह के नेतृत्व में स्कूली वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया गया। तीन टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्कूली वाहनों की सुरक्षा के मानकों की जांच की। टीम ने जिले में संचालित 102 स्कूली वाहनों की जांच की। टीम को हर वाहन में छोटी मोटी खामियां मिली। वहीं सात वाहनों में अग्निशमन यंत्र लगे नहीं मिले। चालकों के पास विद्यालय की ओर से संचालन प्रमाण पत्र भी नहीं मिले। एआरटीओ ने सात को नोटिस जारी किया। एआरटीओ राजेश सिंह ने बताया कि बसों में 2 अग्निशमन यंत्र अनिवार्य है, जिसमें एक चालक की केबिन में लगा होना चाहिए। जांच टीम में एआरटीओ प्रशासन रमाकांत वर्मा, मालकर अधिकारी, केजी संजय ने वाहनों की जांच पड़ताल की।
स्कूली वाहनों के लिए क्या है निर्धारित नियम
- बस में फर्स्ट एंड बाक्स होना चाहिए।
- बस के सीसे पर रेलिंग होनी चाहिए।
- चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस, आईकार्ड और कागजात होना चाहिए।
- विद्यालय की ओर से बस संचालक के लिए प्रदत्त प्रमाणपत्र होना चाहिए।
- यदि स्कूल की निजी बस हो तो उसे पीले रंग में होना चाहिए।
- वाहन पर स्कूल प्रबंधक का पता, दूरभाष नं. होना चाहिए।
- बच्चों के बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
क्या कहता है नियम
- स्कूल बसों की आयु 15 वर्ष से ज्यादा न हो।
- चालक का लाइसेंस व्यवसायिक एवं पांच वर्ष पुराना होना चाहिए।
- स्कूल बस चलाने का बैज भी अंकित होना चाहिए।
- स्कूल बसों में बच्चों की सूची, नाम, पता एवं ब्लड ग्रुप अंकित होना चाहिए।
- बस में स्कूल एवं चालक का नाम पता और फोन नंबर लिखना अनिवार्य है।
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रविवार को एआरटीओ प्रवर्तन राजेश सिंह के नेतृत्व में स्कूली वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया गया। तीन टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्कूली वाहनों की सुरक्षा के मानकों की जांच की। टीम ने जिले में संचालित 102 स्कूली वाहनों की जांच की। टीम को हर वाहन में छोटी मोटी खामियां मिली। वहीं सात वाहनों में अग्निशमन यंत्र लगे नहीं मिले। चालकों के पास विद्यालय की ओर से संचालन प्रमाण पत्र भी नहीं मिले। एआरटीओ ने सात को नोटिस जारी किया। एआरटीओ राजेश सिंह ने बताया कि बसों में 2 अग्निशमन यंत्र अनिवार्य है, जिसमें एक चालक की केबिन में लगा होना चाहिए। जांच टीम में एआरटीओ प्रशासन रमाकांत वर्मा, मालकर अधिकारी, केजी संजय ने वाहनों की जांच पड़ताल की।
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स्कूली वाहनों के लिए क्या है निर्धारित नियम
- बस में फर्स्ट एंड बाक्स होना चाहिए।
- बस के सीसे पर रेलिंग होनी चाहिए।
- चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस, आईकार्ड और कागजात होना चाहिए।
- विद्यालय की ओर से बस संचालक के लिए प्रदत्त प्रमाणपत्र होना चाहिए।
- यदि स्कूल की निजी बस हो तो उसे पीले रंग में होना चाहिए।
- वाहन पर स्कूल प्रबंधक का पता, दूरभाष नं. होना चाहिए।
- बच्चों के बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
क्या कहता है नियम
- स्कूल बसों की आयु 15 वर्ष से ज्यादा न हो।
- चालक का लाइसेंस व्यवसायिक एवं पांच वर्ष पुराना होना चाहिए।
- स्कूल बस चलाने का बैज भी अंकित होना चाहिए।
- स्कूल बसों में बच्चों की सूची, नाम, पता एवं ब्लड ग्रुप अंकित होना चाहिए।
- बस में स्कूल एवं चालक का नाम पता और फोन नंबर लिखना अनिवार्य है।