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Bhadohi News: 10 महीने में 141 नाबालिगों, 219 महिलाओं ने छोड़ा घर

Tue, 10 Feb 2026 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:25 AM IST
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The three-tier committee reviewed the 9.65 crore project
ज्ञानपुर। कालीन नगरी में बीते 10 महीने में सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आकर 141 किशोरियां और 219 युवतियां लापता हो गई हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि वह अंजना युवकों से फोन और फेसबुक के माध्यम से बातचीत करके घर छोड़ दी थीं। पुलिस टीम ने इसमें 51 को छोड़कर शेष को खोज निकाला है। ज्यादातर लड़कियों की उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच है।
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सोशल मीडिया के माध्यम और फोन से अंजान युवकों के संपर्क में आने से वह घर का मोह त्याग दे रही हैं। बीते 10 महीने में अलग-अलग थानाक्षेत्र से कुल 141 किशोरियां लापता हो गईं। यही नहीं 219 युवतियां भी घर छोड़कर चली गईं। जिले के हर थाने की दो टीमें रोज लापता लड़कियों को खोजने में जुटी रहती हैं। परिजनों ने लड़कियों को पढ़ने के लिए मोबाइल दिए। इसके गलत इस्तेमाल से वह अंजान लोगों से जुड़ गईं। हाल ही में गोपीगंज के एक गांव से दो चचेरी बहनें एक साथ ही गायब हो गईं। पुलिस ने एक को अमेठी से प्रेमी के साथ पकड़ा। हालांकि, दूसरे की तलाश अब भी हो रही है। बीते एक सप्ताह में सुरियावां, औराई, भदोही, गोपीगंज से ही करीब सात किशोरियां घर छोड़कर चली गई। पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 141 किशोरियां लापता हुईं। इसमें 128 को बरामद किया गया। जबकि 13 को पुलिस नहीं ढूढ़ सकी। 219 युवतियां भी घर से गायब हो गईं। इसमें 38 की तलाश अभी की जा रही है। साल 2024 में यह संख्या 110 और 180 ही था। ऐसे में साल 2025 में यह डेढ़ गुना अधिक हो गया है।
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सोशल मीडिया और मोबाइल के अधिक प्रयोग से दिक्कतें बढ़ रही है। लापता होने वाली किशोरियों और युवतियों को पुलिस टीमें लगाकर खोजा जा रहा है। अधिकांश बरामद की जा चुकी हैं, जो लापता हैं उनकी तलाश में टीमें लगी हैं। - अभिमन्यु मांगलिक, एसपी
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सोशल मीडिया और असल दुनिया में अंतर है। लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा इमोशनल होती हैं। वह जल्दी से किसी के बहकावे में आ जाती हैं। सोशल मीडिया या स्कूल-कॉलेज में लड़के और लड़कियों में दोस्ती हो जाती है। परिवार को पता चलता है तो पाबंदियां लगाई जाती हैं। फिर लड़कियां अपने प्रेमी के साथ चली जाती हैं। परिवार के लोगों को लड़कियों से बात करनी चाहिए और उन्हें सोशल मीडिया के खतरे में बारे में जागरूक करना चाहिए। - अभिनव पांडेय, मनोचिकित्सक
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