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थाई दल ने किया माता सीता का दर्शन
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थाई दल ने किया माता सीता का दर्शन
फोटो:20
बोले धर्म गुरु, भारतीय संस्कृति देती है मानवता की सीख
संवाद न्यूज एजेंसी
सीतामढ़ी। विदेशी भी सनातन धर्म के मुरीद होने लगे हैं उनका झुकाव तेजी से हिंदू धर्म की ओर हो रहा है। थाईलैंड के जाने माने धर्म गुरु पूकीथाओ ने कहा कि सनातन धर्म (हिंदू-धर्म) दुनिया का सबसे प्राचीनतम धर्म है। भारतीय संस्कृति मानवता की सीख देती है। सनातन धर्म ही ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व-ज्ञान से जानने का मार्ग बताता है।
भारत के धार्मिक यात्रा पर निकले धर्म गुरु अपने अनुयायियों के साथ बृहस्पतिवार को सीतामढ़ी पहुंचे। श्री सीता समाहित स्थल के विश्व प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, मां सीता मंदिर, शिव मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन और प्रार्थना कर थाई भाषा में हनुमान चालीसा का पाठ कर थाई श्रद्धालु अभिभूत हो कर भावुक हो गए। थाई धर्म गुरु ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने कहा की भारत एक महान देश है। यहां की संस्कृति और आध्यात्म में बहुत गहरा लगाव है। कहा कि वे बुद्धिष्ट है, परंतु उनका हिंदू धर्म से दिली लगाव है। वे दोनों धर्मों का सामान रूप से प्रचार प्रसार करते है।
बताया कि थाईलैंड के रियांग शहर में उनका धर्म अनंतारों मंदिर आश्रम है। जिसमें भगवान शिव की 21 फीट ऊंची दिव्य मूर्ति और शिवलिंग की स्थापना की है। आश्रम में अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों की स्थापना की गई है। कहा कि रामायण से उनका गहरा जुड़ाव है। कहा सीतामढ़ी पहुंच कर असीम सुख और शांति का अनुभव हुआ है। बताया कि थाईलैंड के स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को रामायण की शिक्षा अनिवार्य है। धर्म गुरु सीतामढ़ी से इतना प्रभावित हुए कि सीता समाहित स्थल की पावन मिट्टी को साथ ले गए।
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कहा की अपने आश्रम में जगत जननी मां सीता जी की दिव्य मूर्ति की स्थापना करूंगा। ट्रस्ट के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने धर्मगुरु पूकीथाओ को मां सीता का फोटो स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया। टीम में गाइड अरविंद तिवारी, अमित श्रीवास्तव सहित कुल 37 श्रद्धालु अनुयायी रहे।
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फोटो:20
बोले धर्म गुरु, भारतीय संस्कृति देती है मानवता की सीख
संवाद न्यूज एजेंसी
सीतामढ़ी। विदेशी भी सनातन धर्म के मुरीद होने लगे हैं उनका झुकाव तेजी से हिंदू धर्म की ओर हो रहा है। थाईलैंड के जाने माने धर्म गुरु पूकीथाओ ने कहा कि सनातन धर्म (हिंदू-धर्म) दुनिया का सबसे प्राचीनतम धर्म है। भारतीय संस्कृति मानवता की सीख देती है। सनातन धर्म ही ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व-ज्ञान से जानने का मार्ग बताता है।
भारत के धार्मिक यात्रा पर निकले धर्म गुरु अपने अनुयायियों के साथ बृहस्पतिवार को सीतामढ़ी पहुंचे। श्री सीता समाहित स्थल के विश्व प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, मां सीता मंदिर, शिव मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन और प्रार्थना कर थाई भाषा में हनुमान चालीसा का पाठ कर थाई श्रद्धालु अभिभूत हो कर भावुक हो गए। थाई धर्म गुरु ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने कहा की भारत एक महान देश है। यहां की संस्कृति और आध्यात्म में बहुत गहरा लगाव है। कहा कि वे बुद्धिष्ट है, परंतु उनका हिंदू धर्म से दिली लगाव है। वे दोनों धर्मों का सामान रूप से प्रचार प्रसार करते है।
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बताया कि थाईलैंड के रियांग शहर में उनका धर्म अनंतारों मंदिर आश्रम है। जिसमें भगवान शिव की 21 फीट ऊंची दिव्य मूर्ति और शिवलिंग की स्थापना की है। आश्रम में अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों की स्थापना की गई है। कहा कि रामायण से उनका गहरा जुड़ाव है। कहा सीतामढ़ी पहुंच कर असीम सुख और शांति का अनुभव हुआ है। बताया कि थाईलैंड के स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को रामायण की शिक्षा अनिवार्य है। धर्म गुरु सीतामढ़ी से इतना प्रभावित हुए कि सीता समाहित स्थल की पावन मिट्टी को साथ ले गए।
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कहा की अपने आश्रम में जगत जननी मां सीता जी की दिव्य मूर्ति की स्थापना करूंगा। ट्रस्ट के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने धर्मगुरु पूकीथाओ को मां सीता का फोटो स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया। टीम में गाइड अरविंद तिवारी, अमित श्रीवास्तव सहित कुल 37 श्रद्धालु अनुयायी रहे।