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भूजल दोहन में सुरियावां सबसे आगे, बोरिंग की इजाजत नहीं
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी यानी भदोही जिले में भू-गर्भ को तमाम स्रोतों से निकालने और दोहन करने के मामले में सुरियावां ब्लाक के लोग इस समय सबसे आगे हैं। जबकि 2017 में ज्ञानपुर और भदोही ब्लाक के लोग सबसे आगे थे। यहीं वजह थी कि इन दोनों ब्लाकों को क्रिटिकल की श्रेणी में शामिल करते हुए बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। रिपोर्ट आने के बाद जल मंत्रालय की योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया और प्रशासन की सख्ती के कारण यहां सबसे ज्यादा सुधार आया है।
भू-गर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो निष्कर्षण का चरण यानी भू-गर्भ से जल निकालने के मामले में इस समय सुरियावां ब्लाक सबसे आगे है। यहां 87.95 फीसदी निष्कर्ण का संचरण है। इसी तरह अभोली ब्लाक 86.72 है। इसके बाद ज्ञानपुर में 85.42, डीघ में 81.82 व भदोही, औराई में क्रमश: 74.97, 72.66 फीसदी है। जबकि 2017 में भदोही ब्लाक में निकर्ष्ण 91.35 और ज्ञानपुर में 96 फीसदी के करीब था। 2017 के बाद 2020 की रिपोर्ट में सुधार होने पर सभी ब्लाकों को सेमी क्रिटिकल श्रेणी में डाला गया है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता छोटेलाल ने बताया कि जिले के सभी ब्लाकों को अब सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। यानी अनुमति लेकर बोरिंग करायी जा सकती है। वैसे जल दोहन करने वालों पर नजर रखी जा रही है। ज्यादा से ज्यादा जल संचयन पर जोर है।
खिसक रहा है जलस्तर
जिले में जल संचयन के लिए भले ही प्रयास हो रहे हों, भू-गर्भ जलस्तर को ज्यादा से ज्यादा रिचार्ज करके भले ही सेमी क्रिटिकल में ला दिया गया हो लेकिन अभी भी जलस्तर तेजी से खिसक रहा है। आंकड़ों की मानें तो भू-गर्भ जलस्तर गिरावट जारी है। 2017 और 2019 की रिपोर्ट की तुलना करें तो सुरियावां ब्लाक में प्री मानसून का अंतर 0.94 एमबीजीएल(मीटर बीलो ग्राउंड लेवल) है तो वहीं पोस्ट मानसून का अंतर 0.32 है। इसी तरह ज्ञानपुर में 1.4 व 0.58, डीघ में 0.04 व 0.53, भदोही में 0.94 व 0.15, औराई में 1.25 व 0.93 व अभोली ब्लाक में अंतर 0.83 व 0.13 एमबीजीएल है।
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विभाग की सृष्टि जायसवाल ने बताया कि जल संचयन के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की वजह से भू-गर्भ जलस्तर में सुधार हो रहा है। भदोही जिले के दो ब्लाक पहले क्रिटिकल थे, लेकिन अब क्रिटिकल की श्रेणी में कोई ब्लाक नहीं है। वैसे अभी और सुधार की जरूरत है।
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भू-गर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो निष्कर्षण का चरण यानी भू-गर्भ से जल निकालने के मामले में इस समय सुरियावां ब्लाक सबसे आगे है। यहां 87.95 फीसदी निष्कर्ण का संचरण है। इसी तरह अभोली ब्लाक 86.72 है। इसके बाद ज्ञानपुर में 85.42, डीघ में 81.82 व भदोही, औराई में क्रमश: 74.97, 72.66 फीसदी है। जबकि 2017 में भदोही ब्लाक में निकर्ष्ण 91.35 और ज्ञानपुर में 96 फीसदी के करीब था। 2017 के बाद 2020 की रिपोर्ट में सुधार होने पर सभी ब्लाकों को सेमी क्रिटिकल श्रेणी में डाला गया है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता छोटेलाल ने बताया कि जिले के सभी ब्लाकों को अब सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। यानी अनुमति लेकर बोरिंग करायी जा सकती है। वैसे जल दोहन करने वालों पर नजर रखी जा रही है। ज्यादा से ज्यादा जल संचयन पर जोर है।
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खिसक रहा है जलस्तर
जिले में जल संचयन के लिए भले ही प्रयास हो रहे हों, भू-गर्भ जलस्तर को ज्यादा से ज्यादा रिचार्ज करके भले ही सेमी क्रिटिकल में ला दिया गया हो लेकिन अभी भी जलस्तर तेजी से खिसक रहा है। आंकड़ों की मानें तो भू-गर्भ जलस्तर गिरावट जारी है। 2017 और 2019 की रिपोर्ट की तुलना करें तो सुरियावां ब्लाक में प्री मानसून का अंतर 0.94 एमबीजीएल(मीटर बीलो ग्राउंड लेवल) है तो वहीं पोस्ट मानसून का अंतर 0.32 है। इसी तरह ज्ञानपुर में 1.4 व 0.58, डीघ में 0.04 व 0.53, भदोही में 0.94 व 0.15, औराई में 1.25 व 0.93 व अभोली ब्लाक में अंतर 0.83 व 0.13 एमबीजीएल है।
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विभाग की सृष्टि जायसवाल ने बताया कि जल संचयन के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की वजह से भू-गर्भ जलस्तर में सुधार हो रहा है। भदोही जिले के दो ब्लाक पहले क्रिटिकल थे, लेकिन अब क्रिटिकल की श्रेणी में कोई ब्लाक नहीं है। वैसे अभी और सुधार की जरूरत है।