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नई शिक्षा नीति, राष्ट्रीयता के अनुकूल : प्रो. बद्रीनारायण
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ज्ञानपुर। नई शिक्षा नीति वस्तुत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति है क्योंकि यह हमारी राष्ट्रीयता के अनुकूल है। इसमें मूल्यों के साथ ही मातृभाषा पर फोकस होना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके स्थानीय स्तर की चुनौतियां मुखर होंगी और हमें आत्मनिर्भर बनाने में उपयोगी होंगी। ये बातें गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान अनुसंधान संस्थान झूंसी प्रयागराज के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण ने बृहस्पतिवार को काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीएड विभाग ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में कहीं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश चंद्र वशिष्ठ ने कहा कि हमने अपनी पूर्व की शिक्षा नीतियों को न तो पूर्णरूप से लागू किया और न ही उन पर व्यापक विमर्श ही किया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की एक गौरवशाली परंपरा रही है जबकि नई शिक्षा नीति व्यापकता लिए हुए है लेकिन समस्या इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के समाजशास्त्री प्रो. रमाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि लॉकडाउन के समय बहुत से लोगों ने आनलाइन अध्यापन के कौशल व प्रक्रिया को सीखा।
मुख्य वक्ता व राजर्षि टंडन मुक्त विवि प्रयागराज के स्कूल ऑफ एजूकेशन के निदेशक प्रो पीके पांडेय ने कहा कि बहुप्रतीक्षित नई शिक्षा नीति में बहुत दूरगामी संकल्प और व्यवस्था निहित है । कहा कि समानता, गुणवत्ता,वहनीयता और स्वायत्तता का लक्ष्य ही इसकी प्रमुख चुनौतियां हैं। इस दौरान कार्यक्रम शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का बैज अलंकरण, अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न से स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ.प्रदीप नारायण डोंगरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 पर शिक्षाविदों द्वारा व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। आमंत्रित व्याख्यान डॉ. पीएनसिंह, डॉ.एके दूबे, प्रो.गोपाल नायक ने दिया।
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प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ.सियाराम और डॉ.रोशन प्रसाद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लोकपति त्रिपाठी ने व्यक्ति किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. ऋचा और तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. सर्वेशानंद ने किया। इस मौके पर डॉ.जयशंकर मिश्र, डॉ.रमेश यादव, डॉ.किरण शर्मा, डॉ.अरुण कुमार कुशवाहा,डॉ.रोशन प्रसाद, डॉ. आरपी यादव, डॉ. अजय सोनकर, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ.मंजुल गुप्ता, डॉ.प्रतीक, डॉ.संजय कुमार, डॉ.जय सिंह यादव, आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश चंद्र वशिष्ठ ने कहा कि हमने अपनी पूर्व की शिक्षा नीतियों को न तो पूर्णरूप से लागू किया और न ही उन पर व्यापक विमर्श ही किया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की एक गौरवशाली परंपरा रही है जबकि नई शिक्षा नीति व्यापकता लिए हुए है लेकिन समस्या इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के समाजशास्त्री प्रो. रमाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि लॉकडाउन के समय बहुत से लोगों ने आनलाइन अध्यापन के कौशल व प्रक्रिया को सीखा।
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मुख्य वक्ता व राजर्षि टंडन मुक्त विवि प्रयागराज के स्कूल ऑफ एजूकेशन के निदेशक प्रो पीके पांडेय ने कहा कि बहुप्रतीक्षित नई शिक्षा नीति में बहुत दूरगामी संकल्प और व्यवस्था निहित है । कहा कि समानता, गुणवत्ता,वहनीयता और स्वायत्तता का लक्ष्य ही इसकी प्रमुख चुनौतियां हैं। इस दौरान कार्यक्रम शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का बैज अलंकरण, अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न से स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ.प्रदीप नारायण डोंगरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 पर शिक्षाविदों द्वारा व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। आमंत्रित व्याख्यान डॉ. पीएनसिंह, डॉ.एके दूबे, प्रो.गोपाल नायक ने दिया।
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प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ.सियाराम और डॉ.रोशन प्रसाद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लोकपति त्रिपाठी ने व्यक्ति किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. ऋचा और तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. सर्वेशानंद ने किया। इस मौके पर डॉ.जयशंकर मिश्र, डॉ.रमेश यादव, डॉ.किरण शर्मा, डॉ.अरुण कुमार कुशवाहा,डॉ.रोशन प्रसाद, डॉ. आरपी यादव, डॉ. अजय सोनकर, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, डॉ.मंजुल गुप्ता, डॉ.प्रतीक, डॉ.संजय कुमार, डॉ.जय सिंह यादव, आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।