{"_id":"62d850b409cd612758651489","slug":"national-deworming-day-celebrated-at-anganwadi-centers-and-schools-bhadohi-news-vns664915358","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों पर मना राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों पर मना राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस
विज्ञापन
ज्ञानपुर। जिले में बुधवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इस दौरान एक साल से 19 साल तक के 72 हजार 456 बच्चों, किशोर-किशोरियों को कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई। अभियान की शुरूआत जिलाधिकारी आर्यका अखौरी, सीडीओ भानु प्रताप सिंह, सीएमओ संतोष कुमार चक ने जोरई कम्पोजिट विद्यालय से की। जहां बच्चों को दवा भी वितरित की गई। जिले भर में कुल सात लाख 73 हजार बच्चों सहित किशोरों को कीड़े की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सीडीओ ने कहा कि किशोरों को कृमि मुक्ति की दवा यानि पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और पंजीकृत स्कूलों, ईंट भट्ठों पर कार्य करने वाले श्रमिकों को दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी कारण से जो बच्चे दवा नहीं खा पाए हैं। आगे खिलाया जाएगा। यह अभियान एक सप्ताह तक चलेगा। शिक्षक, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्यकर्मी को दवा सामने खिलाने का निर्देश दिया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक रोली श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ खाकर ही यह दवा खानी है। तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा पीसकर पिलानी है। तीन साल से ऊपर के बच्चों को दवा चबाकर खानी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता ने बताया कि हम लोगों को दवा खिलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। औराई निवासी हरिशंकर ने बताया कि मेरे बच्चे को स्कूल में कृमि मुक्ति की दवा खिलाई गई है। जिसे कोई दिक्कत नहीं हुई है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जेसी सरोज बताया कि बच्चें अक्सर कुछ भी उठाकर मुंह में डाल लेते हैं या फिर नंगे पांव ही संक्रमित स्थानों पर चले जाते हैं। इससे उनके पेट में कीड़े विकसित हो जाते हैं। इसलिए उन्हें एल्बेंडाजोल कीड़े की दवा खिलाई गई।
विज्ञापन
सीडीओ ने कहा कि किशोरों को कृमि मुक्ति की दवा यानि पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और पंजीकृत स्कूलों, ईंट भट्ठों पर कार्य करने वाले श्रमिकों को दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी कारण से जो बच्चे दवा नहीं खा पाए हैं। आगे खिलाया जाएगा। यह अभियान एक सप्ताह तक चलेगा। शिक्षक, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्यकर्मी को दवा सामने खिलाने का निर्देश दिया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक रोली श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ खाकर ही यह दवा खानी है। तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा पीसकर पिलानी है। तीन साल से ऊपर के बच्चों को दवा चबाकर खानी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता ने बताया कि हम लोगों को दवा खिलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। औराई निवासी हरिशंकर ने बताया कि मेरे बच्चे को स्कूल में कृमि मुक्ति की दवा खिलाई गई है। जिसे कोई दिक्कत नहीं हुई है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जेसी सरोज बताया कि बच्चें अक्सर कुछ भी उठाकर मुंह में डाल लेते हैं या फिर नंगे पांव ही संक्रमित स्थानों पर चले जाते हैं। इससे उनके पेट में कीड़े विकसित हो जाते हैं। इसलिए उन्हें एल्बेंडाजोल कीड़े की दवा खिलाई गई।
विज्ञापन