ज्ञानपुर/सीतामढ़ी। शरद पूर्णिमा के मौके पर बुधवार को धार्मिक स्थल सीतामढ़ी समेत विभिन्न स्थानों पर महर्षि वाल्मीकि की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने महर्षि के चित्र पर मालाफूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया। साथ ही मंदिरों में रामायण पाठ का आयोजन किया गया। डीएम आर्यका अखौरी के आदेश पर नोडल अधिकारियों ने सीतामढ़ी, वाल्मीकि आश्रम, चकवा महावीर मंदिर, राम जानकी मंदिर, साफ-सफाई, पेजयल व्यवस्था, साज-सज्जा कराया। महर्षि वाल्मीकि आश्रम में भूतल के जयंती की भव्यता-दिव्यता, भक्ति भाव देखने को मिला। धार्मिक कार्यक्रमों से धार्मिक स्थली भक्तिरस में सराबोर रही। इस दौरान यहां संगीतमय सुंदरकांड पाठ, मां गंगा आरती, मंत्रोच्चार के साथ पूजन आदि संपन्न हुए। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं. हरिप्रसाद मिश्रा शास्त्री ने वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला, बताए वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी की विशेष प्रासंगिकता है। यह स्थान वाल्मीकि के जन्म और डाकू से संत के रूप में पुनर्जन्म का साक्षी रहा है। कार्यक्रम में मनीष मिश्र, बीडीओ शैलेश गौतम, थानाध्यक्ष चित्रकूट पुरी, राहुल दूबे, दिनेश श्रीवास्तव, सुरेश तिवारी, अनिल सिंह आदि मौजूद थे। औराई : केशव प्रसाद मिश्र राजकीय महिला महाविद्यालय में महर्षि वाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के साथ महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ.आराधना वर्मा ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन वृत्त एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। बोली हम सभी को रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने तक की उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं का चिंतन, मनन करना चाहिए। बोली रामायण के प्रत्येक खंड से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है हमें उनके जीवन के महत्वपूर्ण बिंदुओं का आत्मसात करते हुए सदैव लक्ष्य के प्रति उन्मुख होना चाहिए। प्राचार्य डॉ.बृृजकिशोर त्रिपाठी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुङी महत्वपूर्ण घटनाएं उनके नाम के अर्थ को भी प्रदर्शित करता है। इस मौके पर डॉ.आकांक्षा त्रिपाठी, डॉ.रीना सिंह, डॉ.विनोद कुमार मिश्र, डॉ.लक्ष्मी यादव, डॉ.रमोद कुमार मौर्य, डॉ.सुचिता वर्मा, प्रकाशचंद्र गुप्त आदि मौजूद थे।