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Jitiya Vrat Kab Hai: कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है जीवित्पुत्रिका पर्व, ये है पूजन का शुभ मुहूर्त

Thu, 05 Oct 2023 01:43 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 05 Oct 2023 01:43 PM IST
सार

सनातन शास्त्रों में निहित है कि जितिया करने वाले व्रती के संतान की रक्षा स्वंय भगवान श्रीकृष्ण करते हैं। नवविवाहित महिलाएं पुत्र प्राप्ति हेतु जीवित्पुत्रिका व्रत रखती हैं। जिले में जिउतिया व्रत को लेकर महिलाओं ने तैयारियां शुरू कर दी है। महिलाएं बाजारों में खरीदारी करने के साथ ही व्रत की तैयारियाें में जुटी हैं।

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Jivitputrika festival is celebrated on the Ashtami Tithi of Krishna Paksha, this is the auspicious time
जीवित्पुत्रिका

विस्तार

सनातन धर्म में जीवित्पुत्रिका पर्व का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है। इस व्रत में महिलाएं 24 घंटे तक अनवरत निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत के पुण्य प्रताप से व्रती के बच्चे तेजस्वी ओजस्वी और मेधावी होते हैं।

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सनातन पंचांग के अनुसार इस बार छह अक्तूबर यानि की शुक्रवार को जीवित्पुत्रिका व्रत है। पूर्वांचल की महिलाएं इसे जिउतिया भी कहती हैं। यह पर्व हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां व्रत रखती हैं। 
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इस व्रत के पुण्य प्रताप से संतान दीर्घायु होता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि जितिया करने वाले व्रती के संतान की रक्षा स्वंय भगवान श्रीकृष्ण करते हैं। जिले में जिउतिया व्रत को लेकर महिलाओं ने तैयारियां शुरू कर दी है। महिलाएं बाजारों में खरीदारी करने के साथ ही व्रत की तैयारियाें में जुटी हैं। 24 घंटे तक निर्जला उपवास का यह कठिन व्रत महिलाएं अपने संतान की लंबी और आरोग्य पूर्ण आयु के लिए रखती हैं। आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि संदिग्ध व्रतों पवास तथा पर्व निर्णय के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत शुक्रवार को ही होगा। महिलाएं सात अक्तूबर 10 बजकर 29 मिनट के बाद व्रत का पारण कर सकेंगी। बताया कि शुक्रवार को नौ बजकर 25 मिनट के बाद पूजन का शुभ मुहुर्त है। बताया कि यह व्रत महिलाओं के लिए एक कठिन तपस्या की तरह होती है।

Jivitputrika festival is celebrated on the Ashtami Tithi of Krishna Paksha, this is the auspicious time
राबर्ट्सगंज के रामजानकी मंदिर परिसर में जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं।
क्या है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पिता की मौत से नाराज होकर पांच लोगों को पांडव समझकर मार डाला। यह सभी द्रौपदी की पांच संतानें थी। जिसपर अर्जुन अश्वत्थाम को बंदी बनाकर उनकी दिव्य मणि छिन ली। जिस पर अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को मार डाला। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पुण्य प्रताप के बल पर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को पुन: जीवित किया। भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से उत्पन्न बच्चे नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। आगे चलकर यहीं राजा परीक्षित के नाम से प्रचलित हुए। तभी से इस व्रत को माताएं संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं।
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