{"_id":"5f0995608ebc3e63547312d7","slug":"for-the-first-time-rice-mills-will-have-geo-tagging-bhadohi-news-vns5351282132","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बार राइस मिलों की होगी जियो टैगिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बार राइस मिलों की होगी जियो टैगिंग
विज्ञापन
ज्ञानपुर। धान की खरीद से करीब तीन महीने पूर्व जिले के राइस मिलों की जियो टैगिंग की जा रही है। जिससे मोबाइल एप से दफ्तर में बैठकर भी विपणन विभाग मिलों की क्रियाशीलता पर नजर रख सकेंगे। मिलों पर धान पहुंचाने वाले ट्रक चालक भी लोकेशन देखकर मौके पर आराम से पहुंच भी सकेंगे।
गेहूं खरीद खत्म होते ही सरकार ने धान खरीद की तैयारी अभी से ही शुरू कर दी है। पहली बार राइस मिलों की जियो टैगिंग की जा रही है जबकि खरीद केंद्रों की पहले ही टैगिंग की व्यवस्था हो चुकी है। ई-उपार्जन पोर्टल पर 31 जुलाई तक राइस मिलों को पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। राइस मिलर को पंजीकरण प्रपत्र में इस वर्ष जियो टैगिंग के लिए लांगीट्यूड और लैटीट्यूड ( डेसिमल फॉर्म में) अनिवार्य रूप से भरना होगा। रिमोट सेंसिंग विभाग की टीम एक मोबाइल एप विकसित करेगी। जिसमें सभी खरीद केंद्र, सत्यापित राइस मिल और भारतीय खाद्य निगम के डिपो मैप्ड रहेंगे। मोबाइल एप के माध्यम से क्षेत्रीय विपणन अधिकारी राइस मिलों की क्रियाशीलता से संबंधित चार अलग-अलग फोटो जियो टैग कराएंगे।
खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि पंजीकरण प्रपत्र में पिछले तीन वर्षों में धान कुटाई का ब्यौरा देना होगा। दो मीट्रिक टन से अधिक क्षमता वाली मिलों का सत्यापन होगा। उन्होंने कहा कि जिले में 20 राइस मिल दो-दो जबकि दो राइस मिल चार-चार टन की है। चार टन वाले राइस मिलों का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जियो टैगिंग और मोबाइल एप से विभाग को काफी सहूलियत मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गेहूं खरीद खत्म होते ही सरकार ने धान खरीद की तैयारी अभी से ही शुरू कर दी है। पहली बार राइस मिलों की जियो टैगिंग की जा रही है जबकि खरीद केंद्रों की पहले ही टैगिंग की व्यवस्था हो चुकी है। ई-उपार्जन पोर्टल पर 31 जुलाई तक राइस मिलों को पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। राइस मिलर को पंजीकरण प्रपत्र में इस वर्ष जियो टैगिंग के लिए लांगीट्यूड और लैटीट्यूड ( डेसिमल फॉर्म में) अनिवार्य रूप से भरना होगा। रिमोट सेंसिंग विभाग की टीम एक मोबाइल एप विकसित करेगी। जिसमें सभी खरीद केंद्र, सत्यापित राइस मिल और भारतीय खाद्य निगम के डिपो मैप्ड रहेंगे। मोबाइल एप के माध्यम से क्षेत्रीय विपणन अधिकारी राइस मिलों की क्रियाशीलता से संबंधित चार अलग-अलग फोटो जियो टैग कराएंगे।
विज्ञापन
खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि पंजीकरण प्रपत्र में पिछले तीन वर्षों में धान कुटाई का ब्यौरा देना होगा। दो मीट्रिक टन से अधिक क्षमता वाली मिलों का सत्यापन होगा। उन्होंने कहा कि जिले में 20 राइस मिल दो-दो जबकि दो राइस मिल चार-चार टन की है। चार टन वाले राइस मिलों का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जियो टैगिंग और मोबाइल एप से विभाग को काफी सहूलियत मिलेगी।
विज्ञापन