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Bhadohi News: जर्मनी के बिगड़ते आर्थिक हालात से कालीन निर्यातक चिंतित
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यूक्रेन और रूस के बीच यूद्ध के हालात अब यूरोप पर भी भारी पड़ने लगा है। पिछले दो तिमाही से यूरोपियन यूनियन को भारी आर्थिक मंदी ने घेर लिया है। विशेष रूप से यूरोप की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति जर्मनी के बिगड़ते आर्थिक हालात ने भदोही के कालीन उत्पादकों और निर्यातकों को भी चिंता में डाल दिया है। अमेरिका के बाद जर्मनी हमारे कालीनों का सबसे बड़ा खरीदार था। नई परिस्थितियों से कालीन उद्यमियों की चिंता बढ़ सकती है। बीते दिनों जर्मनी के वित्त मंत्री क्रिश्चियन लिंडनर ने बयान दिया था कि घरेलू उत्पाद के आंकड़ों ने आश्चर्यजनक रूप से नकारात्मक संकेत दिखाए हैं। बाकी अर्थव्यवस्था में विकसित देशों की तुलना में जर्मनी की अर्थव्यवस्था लगातार पिछड़ती नजर आ रही है। इसके बाद से निर्यातक सकते में हैं। अमेरिका लगभग 57 प्रतिशत तक भारतीय कालीन की खरीदारी करता है। इसके बाद 6 प्रतिशत खरीद के साथ जर्मनी दूसरे नंबर पर है। लोगों की मानें तो अमेरिका पहले से आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। अब जर्मनी के आर्थिक आंकड़ों ने जर्मनी को तो रुलाया ही है। इसका असर भारतीय कालीन उद्योग पर पड़ता दिख रहा है। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मानद सचिव असलम महबूब का मानना है कि यदि निकट भविष्य में जर्मनी के हालात नहीं सुधरे तो हमें दूसरे बाजार तालाश करने होंगे और इसमें भारत सरकार के सहयोग की आवश्यकता होगी।
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जर्मनी के आर्थिक हालात पर भारत सरकार से अपेक्षा है की बारीकी से नजर रखें और समय से आवश्यक कदम उठाए। हम लोग शीघ्र ही इस मुद्दे पर विभागीय अधिकारियों से भी मिलेंगे। असलम महबूब,एकमा (फोटो-51)
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कालीन निर्यात में अमरीका के बाद जर्मनी का नाम आता है। जर्मनी में आर्थिक मंदी की स्थिति है। इसके लिए समय रहते दूसरे बाजार विकसित करने चाहिए। हालांकि दूसरे देशों की स्थिति भी ठीक नहीं है। - डॉ.अभय कुमार मिश्र (फोटो-52)
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जर्मनी के हालात का असर डोमोटेक्स पर भी पड़ना तय है। डोमोटेक्स प्रशासन ने पहले ही आयोजन को प्रत्येक वर्ष से अब हर दूसरे वर्ष कराने का निर्णय ले चुकी है, जो अच्छी खबर नहीं है। शमीम अंसारी (फोटो-53)
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रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पूरे विश्व पर पड़ा है। उसी का असर जर्मनी में भी देखने को मिल रहा है। बाजार में बने रहने के लिए आवश्यक है कि भारत सरकार और यूपी सरकार भी नजर रखे। पीयूष बरनवाल (फोटो-54)
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जर्मनी के डोमोटेक्स पर भी पड़ेगा असर
फोटो-संजय गुप्ता (फोटो-55)
भदोही। जर्मनी की मौजूदा आर्थिक हालात लोगों के लिए परेशानी का सबब इसलिए भी है क्योंकि जर्मनी में विश्व का सबसे बड़े एक्सपो डोमोटेक्स है, जो हनोवर में प्रत्येक वर्ष लगता है। उस पर परेशानी के बादल मंडराने लगे हैं। इस एक्सपो पर भारतीय कालीन उद्योग के छह महीने टिके होते हैं, लेकिन आर्थिक हालात के चलते पिछले दो वर्षों से वहां से सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे थे। जिले के प्रमुख कालीन निर्यातक सीईपीसी के पूर्व प्रशासनिक समिति के सदस्य, संजय गुप्ता ने कहा कि डोमोटेक्स में गिरती सहभागिता के चलते डोमोटेक्स प्रत्येक वर्ष आयोजन के बजाए प्रत्येक दूसरे वर्ष आयोजन पर विचार कर रही है। जर्मनी के इस हाल का आगामी जनवरी के डोमोटेक्स में पूरे विश्व से भागीदारी पर असर पड़ेगा। इसका असर कालीन उद्योग पर भी पड़ना तय है।
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जर्मनी के आर्थिक हालात पर भारत सरकार से अपेक्षा है की बारीकी से नजर रखें और समय से आवश्यक कदम उठाए। हम लोग शीघ्र ही इस मुद्दे पर विभागीय अधिकारियों से भी मिलेंगे। असलम महबूब,एकमा (फोटो-51)
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कालीन निर्यात में अमरीका के बाद जर्मनी का नाम आता है। जर्मनी में आर्थिक मंदी की स्थिति है। इसके लिए समय रहते दूसरे बाजार विकसित करने चाहिए। हालांकि दूसरे देशों की स्थिति भी ठीक नहीं है। - डॉ.अभय कुमार मिश्र (फोटो-52)
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जर्मनी के हालात का असर डोमोटेक्स पर भी पड़ना तय है। डोमोटेक्स प्रशासन ने पहले ही आयोजन को प्रत्येक वर्ष से अब हर दूसरे वर्ष कराने का निर्णय ले चुकी है, जो अच्छी खबर नहीं है। शमीम अंसारी (फोटो-53)
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पूरे विश्व पर पड़ा है। उसी का असर जर्मनी में भी देखने को मिल रहा है। बाजार में बने रहने के लिए आवश्यक है कि भारत सरकार और यूपी सरकार भी नजर रखे। पीयूष बरनवाल (फोटो-54)
जर्मनी के डोमोटेक्स पर भी पड़ेगा असर
फोटो-संजय गुप्ता (फोटो-55)
भदोही। जर्मनी की मौजूदा आर्थिक हालात लोगों के लिए परेशानी का सबब इसलिए भी है क्योंकि जर्मनी में विश्व का सबसे बड़े एक्सपो डोमोटेक्स है, जो हनोवर में प्रत्येक वर्ष लगता है। उस पर परेशानी के बादल मंडराने लगे हैं। इस एक्सपो पर भारतीय कालीन उद्योग के छह महीने टिके होते हैं, लेकिन आर्थिक हालात के चलते पिछले दो वर्षों से वहां से सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे थे। जिले के प्रमुख कालीन निर्यातक सीईपीसी के पूर्व प्रशासनिक समिति के सदस्य, संजय गुप्ता ने कहा कि डोमोटेक्स में गिरती सहभागिता के चलते डोमोटेक्स प्रत्येक वर्ष आयोजन के बजाए प्रत्येक दूसरे वर्ष आयोजन पर विचार कर रही है। जर्मनी के इस हाल का आगामी जनवरी के डोमोटेक्स में पूरे विश्व से भागीदारी पर असर पड़ेगा। इसका असर कालीन उद्योग पर भी पड़ना तय है।