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Bhadohi News: लालानगर-ज्ञानपुर मार्ग पर आज नहीं जाएंगे बड़े वाहन
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ज्ञानपुर। सावन मास के अंतिम मंगलवार को जिले के प्राचीन हनुमान मंदिरों में आयोजित बुढ़वा मंगल मेला की तैयारी पूरी कर ली गई। ज्ञानपुर के चकवा महाबीर, खमरिया के नटवा महाबीर और मोढ़ के कस्तूरीपुर प्राचीन हनुमान मंदिर मेला स्थल पर दुकानें सजने के साथ झूले भी लग गए हैं। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की कड़ी चौकसी रहेगी।
इसके लिए ज्ञानपुर, गोपीगंज, दुर्गागंज, कोइरौना सहित अन्य थाने के थानाध्यक्षों की ड्यूटी लगा दी गई है। मेलार्थियों को दिक्कत न हो इसलिए लालानगर-ज्ञानपुर मार्ग पर बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी।
सावन के अंतिम मंगलवार को महावीर मंदिरों में आस्थावानों की भीड़ उमड़ती है। दर्शन पूजन के बाद मेला का आयोजन किया जाता है। मेला क्षेत्र में दुकानें सज गई हैं। झूला-सर्कस के भी पंडाल लगाए गए हैं।
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मेलार्थियों को दिक्कत न हो, इसलिए मंदिर से करीब एक किमी पहले और एक किमी बाद तक ज्ञानपुर-लालानगर मार्ग पर सभी वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी। मेला खत्म होने के बाद सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।
सीओ ज्ञानपुर प्रभात राय ने कहा कि मेले में सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किया गया है। लालानगर- ज्ञानपुर मार्ग पर रूट डायवर्ट रहेगा। ज्ञानपुर समेत कई थानों की पुलिस तैनात रहेगी।
इसी तरह राधास्वामीधाम स्थित महावीर मंदिर, खमरिया स्थित प्राचीन महावीर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां पर आस्थावान हलुआ एवं रोट अर्पित करते हैं। कस्तूरीपुर प्राचीन हनुमान मंदिर पर प्रसिद्ध बुढ़वा मंगल मेला मंगलवार को लगेगा। मेले में दूर दराज से लोग रोट चढ़ाने आते हैं। इस मेले में भेड़ा और तीतल की कुश्ती आकर्षण का केंद्र है। इसी तरह खमरिया के नटवा में भी हजारों लोगों की भीड़ जुटती है।
पांडवों ने स्थापित किया था चकवां महावीर मंदिर
ज्ञानपुर। नगर से सटे चकवा में स्थित महावीर मंदिर की महिमा निराली है। हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर पांडव कालीन माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने ज्यादातर समय यहीं पर गुजारा। मंदिर की देखरेख और नियमित महावीर जी की पूजा करने वाले पुजारी बाबा रामदास बताते हैं कि चकवा में विशालकाय वट वृक्ष से महावीर निकले हैं। बताया कि द्वापर युग में जब पांडव अज्ञातवास पर थे तो लाक्षागृह में आग लगने से पूर्व सभी लोग सुरंग के रास्ते निकलकर यहीं पर आए थे। उन्होंने ने ही यहां पर महावीर की स्थापना की थी। उस समय यहां घना जंगल हुआ करता था।
चकवां मेले की सुरक्षा के लिए आठ मजिस्ट्रेट तैनात
ज्ञानपुर। सावन के अंतिम मंगलवार को लगने वाले चकवां मेले को सकुशल संपन्न कराने में प्रशासन लग गया है। मेला स्थल पर छेड़खानी एवं अभद्र व्यवहार करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पुलिस बल की तैनाती संग मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है।
डीएम विशाल सिंह ने मेले में महिलाओं की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मेला क्षेत्र को चार भागों में बांटकर आठ मजिस्ट्रेट की तैनाती की है। इसमें एसडीएम न्यायिक शिव प्रकाश यादव को मेलाक्षेत्र, तहसीलदार ज्ञानपुर अजय कुमार सिंह को नहर एवं मार्ग क्षेत्र, एएसडीएम आकाश कुमार को मंदिर का दक्षिणी क्षेत्र, एफएससो मानवेंद्र सिंह को मंदिर का पूर्वी क्षेत्र एवं मवैया हरदोपट्टी मार्ग, एसडीएम न्यायिक भदोही श्याममणि त्रिपाठी को मंदिर के उत्तरी गेट पर, तहसीलदार औराई सुनील कुमार को औराई जाने वाले मार्ग पर यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था, तहसीलदार भदोही संजय कुमार सिंह को मेला क्षेत्र के अंदर रहकर शांति व्यवस्था बहाल करने और डीडी कृषि डॉ. अश्वनी कुमार सिंह को मंदिर परिसर में पंक्ति बनाकर दर्शन-पूजन को सुचारू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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इसके लिए ज्ञानपुर, गोपीगंज, दुर्गागंज, कोइरौना सहित अन्य थाने के थानाध्यक्षों की ड्यूटी लगा दी गई है। मेलार्थियों को दिक्कत न हो इसलिए लालानगर-ज्ञानपुर मार्ग पर बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी।
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सावन के अंतिम मंगलवार को महावीर मंदिरों में आस्थावानों की भीड़ उमड़ती है। दर्शन पूजन के बाद मेला का आयोजन किया जाता है। मेला क्षेत्र में दुकानें सज गई हैं। झूला-सर्कस के भी पंडाल लगाए गए हैं।
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मेलार्थियों को दिक्कत न हो, इसलिए मंदिर से करीब एक किमी पहले और एक किमी बाद तक ज्ञानपुर-लालानगर मार्ग पर सभी वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी। मेला खत्म होने के बाद सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।
सीओ ज्ञानपुर प्रभात राय ने कहा कि मेले में सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किया गया है। लालानगर- ज्ञानपुर मार्ग पर रूट डायवर्ट रहेगा। ज्ञानपुर समेत कई थानों की पुलिस तैनात रहेगी।
इसी तरह राधास्वामीधाम स्थित महावीर मंदिर, खमरिया स्थित प्राचीन महावीर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां पर आस्थावान हलुआ एवं रोट अर्पित करते हैं। कस्तूरीपुर प्राचीन हनुमान मंदिर पर प्रसिद्ध बुढ़वा मंगल मेला मंगलवार को लगेगा। मेले में दूर दराज से लोग रोट चढ़ाने आते हैं। इस मेले में भेड़ा और तीतल की कुश्ती आकर्षण का केंद्र है। इसी तरह खमरिया के नटवा में भी हजारों लोगों की भीड़ जुटती है।
पांडवों ने स्थापित किया था चकवां महावीर मंदिर
ज्ञानपुर। नगर से सटे चकवा में स्थित महावीर मंदिर की महिमा निराली है। हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर पांडव कालीन माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने ज्यादातर समय यहीं पर गुजारा। मंदिर की देखरेख और नियमित महावीर जी की पूजा करने वाले पुजारी बाबा रामदास बताते हैं कि चकवा में विशालकाय वट वृक्ष से महावीर निकले हैं। बताया कि द्वापर युग में जब पांडव अज्ञातवास पर थे तो लाक्षागृह में आग लगने से पूर्व सभी लोग सुरंग के रास्ते निकलकर यहीं पर आए थे। उन्होंने ने ही यहां पर महावीर की स्थापना की थी। उस समय यहां घना जंगल हुआ करता था।
चकवां मेले की सुरक्षा के लिए आठ मजिस्ट्रेट तैनात
ज्ञानपुर। सावन के अंतिम मंगलवार को लगने वाले चकवां मेले को सकुशल संपन्न कराने में प्रशासन लग गया है। मेला स्थल पर छेड़खानी एवं अभद्र व्यवहार करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पुलिस बल की तैनाती संग मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है।
डीएम विशाल सिंह ने मेले में महिलाओं की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मेला क्षेत्र को चार भागों में बांटकर आठ मजिस्ट्रेट की तैनाती की है। इसमें एसडीएम न्यायिक शिव प्रकाश यादव को मेलाक्षेत्र, तहसीलदार ज्ञानपुर अजय कुमार सिंह को नहर एवं मार्ग क्षेत्र, एएसडीएम आकाश कुमार को मंदिर का दक्षिणी क्षेत्र, एफएससो मानवेंद्र सिंह को मंदिर का पूर्वी क्षेत्र एवं मवैया हरदोपट्टी मार्ग, एसडीएम न्यायिक भदोही श्याममणि त्रिपाठी को मंदिर के उत्तरी गेट पर, तहसीलदार औराई सुनील कुमार को औराई जाने वाले मार्ग पर यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था, तहसीलदार भदोही संजय कुमार सिंह को मेला क्षेत्र के अंदर रहकर शांति व्यवस्था बहाल करने और डीडी कृषि डॉ. अश्वनी कुमार सिंह को मंदिर परिसर में पंक्ति बनाकर दर्शन-पूजन को सुचारू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।