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डेढ़ दशक से अधर में लटका सेज का निर्माण
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ज्ञानपुर/चौरी। दुनिया भर में मशहूर कालीन कारोबार को पंख देने के लिए भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर शुरू की गई विशेष आर्थिक जोन (सेज) की परिकल्पना डेढ़ दशक बाद भी पूरी नहीं हो सकी। 16 करोड़ 66 लाख रुपये मुआवजे से 111 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मौजूदा स्थिति यह है कि सेज के लिए अधिग्रहीत 60 फीसदी जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। मुआवजा लेने वाले कुछ किसानों ने जमीनों पर खेतीबारी शुरू कर दी है।
2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर कंधिया के पास स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) के निर्माण की घोषणा की थी। भदोही के कंधिया और बनारस के कपसेठी क्षेत्र के कुछ इलाके को मिला कर सेज निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। यूपीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन के सहयोग से भदोही-वाराणसी जनपद की सीमा पर कंधिया फाटक के पास 220 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था। शुरुआती दिनों में भदोही के कंधिया, धनापुर, जोलहापुर, टिकैतपुर, हड़ईबारी, गोपालपुर, चांदीगहना, लच्छापुर और बनारस के शिवदासपुर, घोड़ा इमाम, दौलतिया आदि गांवों के 1036 किसानों को मुआवजा देकर 111 हेक्टेयर जमीन को अधिकृत किया गया। बाकी जमीन के अधिग्रहण को लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मामला लटक गया। हालांकि इस दौरान कई बार किसानों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बीच जिला प्रशासन की नरमी देख किसान न्यायालय चले गए और 738 किसान अपनी जमीन न देने पर अड़ गए। इस तरह जिले में सेज निर्माण का सपना अधर में लटक गया। धीरे-धीरे लगभग डेढ़ दशक गुजरने के बाद अब अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा शुरू हो गया है। 60 फीसदी से अधिक सेज की अधिग्रहीत भूमि पर खेतीबारी शुरू हो गई है। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि सेज निर्माण का कार्य यूपीएसआईडीसी के जिम्मे था। उनका कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां नहीं होने के कारण मौजूदा हालात पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, अगर वे लोग चाहेंगे तो अधिग्रहीत जमीन पर हो रहे कब्जे आदि के मसले पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एकमा के उपाध्यक्ष अब्दुल हादी की माने तो सेज निर्माण से कालीन कारोबार 50 फीसदी बढ़ जाएगा। इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
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2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर कंधिया के पास स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) के निर्माण की घोषणा की थी। भदोही के कंधिया और बनारस के कपसेठी क्षेत्र के कुछ इलाके को मिला कर सेज निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। यूपीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन के सहयोग से भदोही-वाराणसी जनपद की सीमा पर कंधिया फाटक के पास 220 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था। शुरुआती दिनों में भदोही के कंधिया, धनापुर, जोलहापुर, टिकैतपुर, हड़ईबारी, गोपालपुर, चांदीगहना, लच्छापुर और बनारस के शिवदासपुर, घोड़ा इमाम, दौलतिया आदि गांवों के 1036 किसानों को मुआवजा देकर 111 हेक्टेयर जमीन को अधिकृत किया गया। बाकी जमीन के अधिग्रहण को लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मामला लटक गया। हालांकि इस दौरान कई बार किसानों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बीच जिला प्रशासन की नरमी देख किसान न्यायालय चले गए और 738 किसान अपनी जमीन न देने पर अड़ गए। इस तरह जिले में सेज निर्माण का सपना अधर में लटक गया। धीरे-धीरे लगभग डेढ़ दशक गुजरने के बाद अब अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा शुरू हो गया है। 60 फीसदी से अधिक सेज की अधिग्रहीत भूमि पर खेतीबारी शुरू हो गई है। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि सेज निर्माण का कार्य यूपीएसआईडीसी के जिम्मे था। उनका कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां नहीं होने के कारण मौजूदा हालात पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, अगर वे लोग चाहेंगे तो अधिग्रहीत जमीन पर हो रहे कब्जे आदि के मसले पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एकमा के उपाध्यक्ष अब्दुल हादी की माने तो सेज निर्माण से कालीन कारोबार 50 फीसदी बढ़ जाएगा। इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
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