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Bhadohi Fire: बरात के पटाखों से निकली चिंगारी बनी काल, 35 बकरियों की जलकर दर्दनाक मौत
Wed, 10 May 2023 02:28 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
Published by: किरन रौतेला
Updated Wed, 10 May 2023 02:28 PM IST
सार
भदोही में बारात में छोड़े जा रहे पटाखे की चिंगारी पड़ोसी राम अछैबर पाल की छप्पर में चली गई। जिससे छप्पर में भयंकर आग लग गई। राम अछैबर बकरी पालन कर अपनी आजीविका चलाते थे। उन्होंने छप्पर में ही अपनी बकरियां बांध रखी थी। आग लगने के बाद बंधी बकरियों को भागने का भी मौका नहीं मिला और छप्पर में बंधी सभी 35 बकरियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई।
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Bhadohi Fire: बरात के पटाखों से निकली चिंगारी बनी काल, 35 बकरियों की जलकर दर्दनाक मौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुर्गागंज थाना क्षेत्र के कुढ़वा गांव में मंगलवार की रात पटाखे से निकली चिंगारी ने 35 बकरियों को मौत के आगोश में ले लिया। गांव में आई बारात के दौरान छोड़े जा रहे पटाखे से निकली चिंगारी झोपड़ी पर जा गिरी। जिससे उसमें आग लग गया। आग लगने से उसमें बांध कर रखी गई 35 बकरियों की जलकर मौत हो गई। गनीमत रहा कि आग की लपटें पास की झोपड़ियों तक नहीं पहुंची, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
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जानकारी के अनुसार कुढ़वा गांव निवासी राधेश्याम पाल के बेटी की शादी थी। जौनहरी, प्रयागराज से आई शादी में आए बाराती नाचते-गाते हुए दरवाजे पर पहुंचे। जहां द्वारचार की रस्म पूरी की जा रही थी। इधर बारात में छोड़े जा रहे पटाखे की चिंगारी पड़ोसी राम अछैबर पाल की छप्पर में चली गई। जिससे छप्पर में भयंकर आग लग गई। राम अछैबर बकरी पालन कर अपनी आजीविका चलाते थे। उन्होंने छप्पर में ही अपनी बकरियां बांध रखी थी। आग लगने के बाद बंधी बकरियों को भागने का भी मौका नहीं मिला और छप्पर में बंधी सभी 35 बकरियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। जिससे अन्य झोपड़ियों तक आग की लपटें नहीं पहुंच सकी थी। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। बकरियों से जलने से पशु पालक पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जानकारी होते ही पशुपालन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने पशु पालक के नुकसान का आंकलन कर मुआवजा दिए जाने का आश्वासन दिया। प्रधान झल्लू राम ने बताया कि मरी हुई बकरियों को दफनाने के लिए कई बार लेखपाल से फोन कर भूमि चिन्हित किए जाने की मांग की गई, लेकिन लेखपाल की ओर से कुछ भी नहीं बताया जा रहा है। जिससे बकरियां ऐसी ही लावारिस पड़ी हैं। अगर उन्हें जल्द नहीं दफनाया गया तो संक्रामक बीमारी भी फैल सकती है।
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