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10 गांवों के दो हजार बीघे रकबे में गेहूं की खेती फंसी
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ज्ञानपुर। जलनिकासी के अभाव में 10 गांवों के दो हजार बीघे से अधिक रकबे में इस बार गेहूं की खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिसंबर का एक हफ्ता निकल गया और धान के खेतों में एक से डेढ़ फीट तक पानी लगा है। भारी बारिश के बाद लंबे जलजमाव के कारण धान की फसल तो हाथ से निकल ही चुकी है, अब गेहूं की बुवाई पर भी संकट के बादल मंडराने से किसानों के सामने दाल-रोटी के भी लाले पड़ने की नौबत है।दो माह पूर्व हुई भारी बारिश के बाद जलनिकासी को लेकर दिखी प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा किसानों को अब तक भुगतना पड़ रहा है। धान की फसल तैयार हो चुकी है, लेकिन अब भी खेतों में एक से डेढ़ फीट तक पानी लगा है। इससे पक चुकी धान की फसल कट नहीं पा रही है। किसानों की पीड़ा यह है कि अगर किसी तरह धान काट भी लिया जाए तो गेहूं की बुवाई कैसे होगी। क्योंकि खेत तैयार ही नहीं हो पाएगा। गत 25 सितंबर के आसपास शुरू हुई भारी बारिश ने लगभग हफ्तेभर तक जिले में तांडव किया। इससे तमाम निचले इलाकों में भारी जलजमाव हो गया। हजारों बीघे फसल डूबने से नष्ट हो गई और कई सरकारी भवनों में पानी भर गया। इसी तरह पूरेदीवान, जौहरपुर, सारीपुर, सरई मिश्रानी, सरई राजपुतानी, खरगपुर, पूरे डेहरिया, जखांव आदि गांवों के सिवान में भी भारी जलभराव हुआ और समूचा सिवान बारिश के पानी से लबालब हो गया। अन्य इलाकों का जलभराव धीरे-धीरे समय के साथ कम होता गया और निकलता गया, लेकिन इन गांवों के लगभग दो हजार बीघे खेतों में अब भी बारिश का पानी भरा है। किसानों का कहना है कि फसल पक कर तैयार है, लेकिन खेतों में पानी भरा होने के कारण उसकी कटाई नहीं हो पा रही है। माना जा रहा है कि अगर किसान अपना नुकसान सह कर ऊपर से फसल काट भी लें और पानी में डूबी पराली खेत में ही छोड़ दें तो फिर गेहूं की बुवाई कैसे होगी। क्योंकि गेहूं के लिए खेत को सूखा होना चाहिए। ऐसे में इन गांवों के किसान चिंतित हो उठे हैं। पूरे दीवान के पूर्व प्रधान लाल प्रताप बिंद की दो बीघे धान की फसल में पानी लगा है। वह कहते हैं कि धान तो गया, अब गेहूं की खेती भी राम भरोसे हो गई है। लंबे समय से खेतों में पानी भरा है, लेकिन शिकायत के बाद भी प्रशासन कारगर कदम नहीं उठा पा रहा। इसी तरह सरई मिश्रानी के कड़ेदीन मिश्रा की सात बीघे, नवीन मिश्रा की 10 बीघे, श्यामधर मिश्रा, राजधर मिश्रा के अलावा जोहरपुर के चंद्रबली यादव की तीन बीघे फसल डूबी है। ये किसान मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं।
इन गांवों की फसल डूबी (आंकड़ा लगभग में)
गांव डूबा रकबा
पूरे दीवान 1000 बीघे
जोहरपुर 300
सारीपुर 250
सरई मिश्रानी 100
सरई राजपुतानी 100
जखांव 100
खरगरपुर 50
पूरे डेहरिया 50
मवैया हरदोपट्टी 40
कालीन कंपनी और एनएचएआई के फेर में पिस रहे किसान
ज्ञानपुर। पूर्व में इन गांवों के सिवान का बरसाती पानी वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पार कर विभिन्न गांवों से होते हुए गंगा की तरफ निकल जाता था। लेकिन, इस बार हाईवे के सिक्सलेन निर्माण के दौरान गोपीगंज नगर के समीप स्थित कालीन कंपनी ओबीटी ने फैक्ट्री की जलनिकासी के लिए रोड के नीचे से पक्का नाला बनवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कालीन कंपनी ने वहां से पक्का नाला बनवाया है, जहां से पहले गांव का पानी निकला करता था और वह बाहा था। नाली बनने से बाहा जाम हो गया। हालांकि ओबीटी ने इस आरोप को खारिज करते हुए एनएचएआई पर जिम्मेदारी मढ़ दी। ओबीटी के मैनेजर आईबी सिंह ने कहा कि एनएचएआई ने अपने सर्वे में नाला दिखाया ही नहीं है, जबकि वहां से पहले गांवों के अलावा कंपनी का भी पानी निकला करता था। दूसरी तरफ एनएचएआई ने हाईवे के किनारे जो नाला बनवाया है, उसमें अन्य कोई पानी नहीं बहाया जा सकता। ऐसे में ग्रामीण कहां जाएं, यह बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
यह समस्या गंभीर है। इस पर बातचीत चल रही है। कोई न कोई हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि जिस तरह की स्थिति है, उससे ग्रामीणों के सामने गेहूं की खेती का संकट है। बातचीत चल रही है, कोई हल जरूर निकाला जाएगा।
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राजेंद्र प्रसाद, जिलाधिकारी
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इन गांवों की फसल डूबी (आंकड़ा लगभग में)
गांव डूबा रकबा
पूरे दीवान 1000 बीघे
जोहरपुर 300
सारीपुर 250
सरई मिश्रानी 100
सरई राजपुतानी 100
जखांव 100
खरगरपुर 50
पूरे डेहरिया 50
मवैया हरदोपट्टी 40
कालीन कंपनी और एनएचएआई के फेर में पिस रहे किसान
ज्ञानपुर। पूर्व में इन गांवों के सिवान का बरसाती पानी वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पार कर विभिन्न गांवों से होते हुए गंगा की तरफ निकल जाता था। लेकिन, इस बार हाईवे के सिक्सलेन निर्माण के दौरान गोपीगंज नगर के समीप स्थित कालीन कंपनी ओबीटी ने फैक्ट्री की जलनिकासी के लिए रोड के नीचे से पक्का नाला बनवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कालीन कंपनी ने वहां से पक्का नाला बनवाया है, जहां से पहले गांव का पानी निकला करता था और वह बाहा था। नाली बनने से बाहा जाम हो गया। हालांकि ओबीटी ने इस आरोप को खारिज करते हुए एनएचएआई पर जिम्मेदारी मढ़ दी। ओबीटी के मैनेजर आईबी सिंह ने कहा कि एनएचएआई ने अपने सर्वे में नाला दिखाया ही नहीं है, जबकि वहां से पहले गांवों के अलावा कंपनी का भी पानी निकला करता था। दूसरी तरफ एनएचएआई ने हाईवे के किनारे जो नाला बनवाया है, उसमें अन्य कोई पानी नहीं बहाया जा सकता। ऐसे में ग्रामीण कहां जाएं, यह बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
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यह समस्या गंभीर है। इस पर बातचीत चल रही है। कोई न कोई हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि जिस तरह की स्थिति है, उससे ग्रामीणों के सामने गेहूं की खेती का संकट है। बातचीत चल रही है, कोई हल जरूर निकाला जाएगा।
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