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अधिवक्ताओं ने जताया विरोध
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Tue, 17 Mar 2015 01:38 AM IST
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बार कौंसिल आफ इंडिया के आह्वान पर सोमवार को डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने दीवानी न्यायालय परिसर में अधिवक्ता हत्याकांड को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
चेतावनी दी कि अविलंब पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा और आरोपी पुलिसकर्मी को बर्खास्त नहीं किया गया तो अधिवक्ता राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करेंगे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर पांडेय के नेतृत्व में सोमवार को अधिवक्ता कामकाज ठप कर न्यायालय परिसर में नारेबाजी करने लगे।
अधिवक्ता हृदय नाथ तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे मामले में सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। न्यायालय परिसर में अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या होने के बाद भी पुलिसकर्मी पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पीड़ित परिवार को मात्र दस लाख का मुआवजा देकर मामले को समाप्त करने में जुटी है, अधिवक्ता समाज इसको लेकर शांत नहीं बैठेगा।
पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा के अलावा जिन अधिवक्ताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया है उसे वापस लिया जाए। कहा कि यदि अधिवक्ताओं की मांग पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया गया
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तो वे आंदोलन को तेज करने को विवश होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रश्ाासन की होगी। विरोध जताने वालों में तेज बहादुर यादव, रामजीत पांडेय, स्वामीनाथ मिश्रा, गोपीचंद्र तिवारी,
हंसाराम शुक्ला, दीपक पांडेय, कृष्ण कुमार मालवीय, राहुल श्रीवास्तव, शशि पांडेय, सत्येंद्र सिंह, पुनीत पांडेय, संजय दूबे, अनिल शुक्ल, पंधारी लाल यादव आदि रहे।
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चेतावनी दी कि अविलंब पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा और आरोपी पुलिसकर्मी को बर्खास्त नहीं किया गया तो अधिवक्ता राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करेंगे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर पांडेय के नेतृत्व में सोमवार को अधिवक्ता कामकाज ठप कर न्यायालय परिसर में नारेबाजी करने लगे।
अधिवक्ता हृदय नाथ तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे मामले में सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। न्यायालय परिसर में अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या होने के बाद भी पुलिसकर्मी पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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पीड़ित परिवार को मात्र दस लाख का मुआवजा देकर मामले को समाप्त करने में जुटी है, अधिवक्ता समाज इसको लेकर शांत नहीं बैठेगा।
पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा के अलावा जिन अधिवक्ताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया है उसे वापस लिया जाए। कहा कि यदि अधिवक्ताओं की मांग पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया गया
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तो वे आंदोलन को तेज करने को विवश होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रश्ाासन की होगी। विरोध जताने वालों में तेज बहादुर यादव, रामजीत पांडेय, स्वामीनाथ मिश्रा, गोपीचंद्र तिवारी,
हंसाराम शुक्ला, दीपक पांडेय, कृष्ण कुमार मालवीय, राहुल श्रीवास्तव, शशि पांडेय, सत्येंद्र सिंह, पुनीत पांडेय, संजय दूबे, अनिल शुक्ल, पंधारी लाल यादव आदि रहे।