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चुनाव में निर्णायक चौरी को विकास की दरकार
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चौरी। तीन विधानसभाओं में निर्णायक की भूमिका निभाने वाला चौरी का इलाका आज भी उपेक्षा का दंशा सह रहा है। आठ साल पहलं चकभूईधर गांव में स्थापित पेयजल इकाई सफेद हाथी साबित होकर रह गया। जिस गांव में बना है वहां के लोगों की प्यास भी नहीं बुझ पा रही है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है।
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा, 2012 में सपा और 2017 में भाजपा प्रत्याशी की जीत में चौरी से जुड़े गांव निर्णायक बने। 2007 में रंगनाथ मिश्र, 2012 में जाहिद बेग और 2017 में रविंद्रनाथ त्रिपाठी को जीत नसीब हुई थी। 2017 के चुनाव में भदोही नगर में पिछड़ रहे रविंद्रनाथ त्रिपाठी चौरी पहुंचते ही आगे हो गए और वह बढ़त जीत तक बनी रही। बेहतर पेयजल व्यवस्था को लेकर डोर टू डोर पानी पहुं चाने के लिए चकभुईंधर में राजकीय नलकूप का निर्माण किया गया । नलकूप से चौरी ख़ास,कोल्हड़,जमुवा,वेदमनपुर में पानी पहुचाने का लक्ष्य था लेकिन वह सफल नहीं हो सका जिससे लोग हैंडपंप के सहारे अपनी प्यास बुझा पा रहे हैं। 16 जनवरी 2011 को तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने नलकूप का उद्घाटन किया था। इस दौरान ओवरहेड टैंक और आधा दर्जन गांवों में पाइपलाइन बिछाने की बात विभाग की ओर से की गई थी, लेकिन पाइप लाइन चकभुईंधर गांव तक भी नहीं बिछाई जा सकी। जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पहल न होने के कारण ओवरहेड टैंक और गांवों में पाइपलाइन का काम अधूरा रह गया। चौरी बाजार की पेयजल आपूर्ति आज भी चंद हैडपंपों के सहारे है। जहां काफी मेहनत के बाद ही पानी मयस्सर होता है। समाजसेवी आशीष दूबे समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि अधूरे कार्यों को पूूर्ण कराया जाए, जिससे पेयजल की समस्या दूर हो सके।
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा, 2012 में सपा और 2017 में भाजपा प्रत्याशी की जीत में चौरी से जुड़े गांव निर्णायक बने। 2007 में रंगनाथ मिश्र, 2012 में जाहिद बेग और 2017 में रविंद्रनाथ त्रिपाठी को जीत नसीब हुई थी। 2017 के चुनाव में भदोही नगर में पिछड़ रहे रविंद्रनाथ त्रिपाठी चौरी पहुंचते ही आगे हो गए और वह बढ़त जीत तक बनी रही। बेहतर पेयजल व्यवस्था को लेकर डोर टू डोर पानी पहुं चाने के लिए चकभुईंधर में राजकीय नलकूप का निर्माण किया गया । नलकूप से चौरी ख़ास,कोल्हड़,जमुवा,वेदमनपुर में पानी पहुचाने का लक्ष्य था लेकिन वह सफल नहीं हो सका जिससे लोग हैंडपंप के सहारे अपनी प्यास बुझा पा रहे हैं। 16 जनवरी 2011 को तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने नलकूप का उद्घाटन किया था। इस दौरान ओवरहेड टैंक और आधा दर्जन गांवों में पाइपलाइन बिछाने की बात विभाग की ओर से की गई थी, लेकिन पाइप लाइन चकभुईंधर गांव तक भी नहीं बिछाई जा सकी। जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पहल न होने के कारण ओवरहेड टैंक और गांवों में पाइपलाइन का काम अधूरा रह गया। चौरी बाजार की पेयजल आपूर्ति आज भी चंद हैडपंपों के सहारे है। जहां काफी मेहनत के बाद ही पानी मयस्सर होता है। समाजसेवी आशीष दूबे समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि अधूरे कार्यों को पूूर्ण कराया जाए, जिससे पेयजल की समस्या दूर हो सके।
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