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इस बार छोटे जानवरों की ही अधिक कुर्बानी होगी
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:12 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
ईद-उल-जुहा (बकरीद) पर्व को लेकर जिले में प्रशासन से लेकर इससे जुड़ी कमेटियों की ओर से तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई है। पीस कमेटी की बैठकों के बाद जानवरों की कुर्बानी के लिए व्यवस्थाएं हो रही हैं। कुर्बानी को देखते हुए नगरीय क्षेत्रों में साफ-सफाई कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से पीस कमेटी में आए सुझाव पर अमल शुरू कर दिया गया है। जिले में बकरा, भेड़ा आदि जैसे छोटे जानवरों की बड़े पैमाने पर कुर्बानियां होती हैं। जबकि बड़े जानवरों की कुर्बानी करने के लिए जिले में किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है। न ही जिले में एक भी स्लास्टर हाउस बनाया गया है।
मालूम हो कि शासन से जानवरों की मांस बिक्री को लेकर कई तरह की गाइड लाइन जारी कर दी गई है। ऐसे में जिले में बड़े जानवरों के मांस की बिक्री पहले से ही बंद है। ऐसे में बड़े जानवरों की कुर्बानी का सवाल ही नहीं है। महंगाई के दौर में भी बड़े जानवरों की कुर्बानी से आगे नहीं आ रहे हैं। वहीं, कुछ शर्तों साथ जिले में छोटे बड़े जानवरों और मुर्गों की मांस बिक्री चल रही है। इसलिए इस बार बकरीद पर छोटे जानवरों की ही कुर्बानी अधिक देखने को मिलेगी। इस्लामी साल के ईद-उल-जुहा माह की दसवीं, 11वीं और 12वीं तारीख को खुदा की राह में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इसके अलावा जिले में संबंधित कमेटियों की ओर से बकरीद की वाजिब नमाज के लिए वक्त भी मुकर्रर कर दिया गया है। एक से अधिक ईदगाह होने पर नमाज के समय में अंतर भी रखा गया है।
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ईद-उल-जुहा (बकरीद) पर्व को लेकर जिले में प्रशासन से लेकर इससे जुड़ी कमेटियों की ओर से तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई है। पीस कमेटी की बैठकों के बाद जानवरों की कुर्बानी के लिए व्यवस्थाएं हो रही हैं। कुर्बानी को देखते हुए नगरीय क्षेत्रों में साफ-सफाई कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से पीस कमेटी में आए सुझाव पर अमल शुरू कर दिया गया है। जिले में बकरा, भेड़ा आदि जैसे छोटे जानवरों की बड़े पैमाने पर कुर्बानियां होती हैं। जबकि बड़े जानवरों की कुर्बानी करने के लिए जिले में किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है। न ही जिले में एक भी स्लास्टर हाउस बनाया गया है।
मालूम हो कि शासन से जानवरों की मांस बिक्री को लेकर कई तरह की गाइड लाइन जारी कर दी गई है। ऐसे में जिले में बड़े जानवरों के मांस की बिक्री पहले से ही बंद है। ऐसे में बड़े जानवरों की कुर्बानी का सवाल ही नहीं है। महंगाई के दौर में भी बड़े जानवरों की कुर्बानी से आगे नहीं आ रहे हैं। वहीं, कुछ शर्तों साथ जिले में छोटे बड़े जानवरों और मुर्गों की मांस बिक्री चल रही है। इसलिए इस बार बकरीद पर छोटे जानवरों की ही कुर्बानी अधिक देखने को मिलेगी। इस्लामी साल के ईद-उल-जुहा माह की दसवीं, 11वीं और 12वीं तारीख को खुदा की राह में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इसके अलावा जिले में संबंधित कमेटियों की ओर से बकरीद की वाजिब नमाज के लिए वक्त भी मुकर्रर कर दिया गया है। एक से अधिक ईदगाह होने पर नमाज के समय में अंतर भी रखा गया है।
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