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तकनीकी खेती से बदल सकती है किसानों की तकदीर
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ज्ञानपुर। तकनीकी खेती किसानों की तकदीर बदल सकती है। वर्तमान परिवेश में जरूरत है सिर्फ जागरूक होने और समझने की। वैसे भी किसानों को सुदृढ़ बनाने के लिए कृषि विभाग भी विशेषज्ञों के सहयोग से उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में महत्ति भूमिका निभा रहा है। यह बातें सोमवार को औराई क्षेत्र के डुढ़ाव गांव में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मनाए गए प्रक्षेत्र दिवस में मुख्यअतिथि उप कृषि निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने कहीं।
केंद्र के प्रयास से गांव निवासी मालवर सिंह ने एक एकड़ क्षेत्रफल में पंक्ति विधि से बोई गई आरएच-749 प्रजाति सरसों फसल की अच्छी उपज और अधिक पैदावार का प्रदर्शन किया। केंद्र के कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ.आरपी चौधरी ने कृषक की सराहना करते हुए कहा कि अधिक उत्पादन लेने के लिए छह से सात सौ ग्राम प्रति बीघा की दर से बुआई करें। पंक्ति की दूरी 45 सेमी तो पौध से पौध की दूरी 20 सेमी होनी चाहिए। बुआई के समय ही 25 से 30 कि लोग्राम डीएपी, 16 से 18 कि लोग्राम यूरिया 16 किलोग्राम पोटाश व 8 कि लोग्राम सल्फर प्रति बीघे की दर से डालना चाहिए। वहीं 25 दिन के बाद सिंचाई एवं विरलीकरण कर 8 से 9 कुंतल प्रति बीघे पैदावार ली जा सकती है। उद्यान विशेषज्ञ डा.एके चतुर्वेदी, तकनीकी सहायक प्रमोद पासवान ने प्रक्षेत्र दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालकर उपस्थित रहे कृषकों का उत्साहवर्धन किया गया।
केंद्र के प्रयास से गांव निवासी मालवर सिंह ने एक एकड़ क्षेत्रफल में पंक्ति विधि से बोई गई आरएच-749 प्रजाति सरसों फसल की अच्छी उपज और अधिक पैदावार का प्रदर्शन किया। केंद्र के कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ.आरपी चौधरी ने कृषक की सराहना करते हुए कहा कि अधिक उत्पादन लेने के लिए छह से सात सौ ग्राम प्रति बीघा की दर से बुआई करें। पंक्ति की दूरी 45 सेमी तो पौध से पौध की दूरी 20 सेमी होनी चाहिए। बुआई के समय ही 25 से 30 कि लोग्राम डीएपी, 16 से 18 कि लोग्राम यूरिया 16 किलोग्राम पोटाश व 8 कि लोग्राम सल्फर प्रति बीघे की दर से डालना चाहिए। वहीं 25 दिन के बाद सिंचाई एवं विरलीकरण कर 8 से 9 कुंतल प्रति बीघे पैदावार ली जा सकती है। उद्यान विशेषज्ञ डा.एके चतुर्वेदी, तकनीकी सहायक प्रमोद पासवान ने प्रक्षेत्र दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालकर उपस्थित रहे कृषकों का उत्साहवर्धन किया गया।
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