{"_id":"5c854a33bdec2214283616c7","slug":"51552239155-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंडिया कारपेट एक्सपो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंडिया कारपेट एक्सपो
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
भदोही। पिछले 30 वर्षों से भदोही से कालीन खरीदारी कर रहे आस्ट्रेलियाई आयातक एडविन हारवे का कहना है कि तीन दशक में भदोही नहीं बदला। 30 वर्ष पहले की सड़कें आज के मुकाबले बेहतर थीं। भदोही और वाराणसी में कोई फर्क नहीं। यदि भदोही में कारपेट एक्सपो होता है तो यहां भी आने को तत्पर रहूंगा। वे एक प्रतिष्ठान में कालीनों का अवलोकन कर रहे थे। एडविन नई दिल्ली में चल रहे इंडिया कारपेट एक्सपो में भाग लेने के बाद कुछ विशिष्ट कालीन प्रतिष्ठानों का दौरा करने भदोही आए हैं।
मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने भदोही में बने कारपेट एक्सपो मार्ट को राह चलते देखा है, जो प्रभावित करता है। यदि यहां एक्सपो का आयोजन हुआ तो वह जरूर हिस्सा लंगे। जब हम वाराणसी एक्सपो में भाग लेने के लिए आ सकते हैं तो यहां क्यों नहीं? कहा कि भदोही और वाराणसी में कोई फर्क नहीं है। कारोबार के लिए 30 वर्षों से भदोही आ रहे हैं, लेकिन इस दरमियान बहुत कुछ बदला, लेकिन भदोही में कोई बदलाव नहीं आया है।
साल में दो बार भदोही आने वाले विक्टोरियाई आयातक ने कहा कि कालीन व्यवसाय को देखते हुए भदोही में बुनियादी व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। कहा कि यहां की खास बात है कि हर प्रकार और स्तर के कालीन यहां उपलब्ध होते हैं। चीन, इंडोनेशिया, मिस्र, बेल्जियम, बंगलादेश आदि से भी बड़े पैमाने पर काम करने वाले हारवे ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में चीन में काफी बदलाव आया है। दूसरे राज्यों में भी कालीन उत्पादन हो रहा है, लेकिन भदोही के कालीनों की बात ही अलग है। उन्होंने यहां के कालीन व्यवसायियों की प्रशंसा की। साथ उनके प्रतिनिधि यश कटारिया भी थे।
मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने भदोही में बने कारपेट एक्सपो मार्ट को राह चलते देखा है, जो प्रभावित करता है। यदि यहां एक्सपो का आयोजन हुआ तो वह जरूर हिस्सा लंगे। जब हम वाराणसी एक्सपो में भाग लेने के लिए आ सकते हैं तो यहां क्यों नहीं? कहा कि भदोही और वाराणसी में कोई फर्क नहीं है। कारोबार के लिए 30 वर्षों से भदोही आ रहे हैं, लेकिन इस दरमियान बहुत कुछ बदला, लेकिन भदोही में कोई बदलाव नहीं आया है।
विज्ञापन
साल में दो बार भदोही आने वाले विक्टोरियाई आयातक ने कहा कि कालीन व्यवसाय को देखते हुए भदोही में बुनियादी व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। कहा कि यहां की खास बात है कि हर प्रकार और स्तर के कालीन यहां उपलब्ध होते हैं। चीन, इंडोनेशिया, मिस्र, बेल्जियम, बंगलादेश आदि से भी बड़े पैमाने पर काम करने वाले हारवे ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में चीन में काफी बदलाव आया है। दूसरे राज्यों में भी कालीन उत्पादन हो रहा है, लेकिन भदोही के कालीनों की बात ही अलग है। उन्होंने यहां के कालीन व्यवसायियों की प्रशंसा की। साथ उनके प्रतिनिधि यश कटारिया भी थे।
विज्ञापन