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बड़ागांव की निलंबित दूकान की गई निरस्त
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:51 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत पर निलंबित चल रही जिले के डीघ विकास खंड के बड़ागांव की कोटे की दूकान को निरस्त कर दिया गया है। उपजिलाधिकारी सुनील यादव ने कोटेदार को जारी नोटिस का जवाब संतोषजनक न मिलने और कार्डधारकों के बयान पर दूकान को निरस्त कर दिया है। 15 जून को दूकान निलंबित करने के बाद पास के गांव सागररायपुर की दूकान से संबद्घ कर दिया गया था।
प्रशासन की ओर से दूकान निलंबित होने के बाद कोटेदार नंदलाल शुक्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन, हाईकोर्ट ने प्रकरण को दो माह के अंदर निस्तारित करने के लिए प्रशासन को आदेश दिया था। इसके बाद कोटेदार ने नोटिस का स्पष्टीकरण देने के साथ आरोप को निराधार होने का दावा किया था, लेकिन उस दावे की जांच कराई गई। शिकायतकर्ताओं समेत ग्रामीणों ने कोटेदार पर राशन वितरण न करने का आरोप लगा कर दावे की पोल खोल दी थी। इसके बाद एसडीएम और डीएसओ ने एक साथ पहुंचकर दलित, यादव और सरोज बस्ती में जाकर बयान लिया। इसमें भी कार्डधारकों के आरोप का सत्यापन किया गया।आरोप की पुष्टि होने के बाद स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए दूकान को निरस्त करने की कार्रवाई कर दी। साथ ही अनुबंध के साथ जमा की गई धनराशि को जब्त कर लिया गया। मालूम हो कि बड़ागांव में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी।
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राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत पर निलंबित चल रही जिले के डीघ विकास खंड के बड़ागांव की कोटे की दूकान को निरस्त कर दिया गया है। उपजिलाधिकारी सुनील यादव ने कोटेदार को जारी नोटिस का जवाब संतोषजनक न मिलने और कार्डधारकों के बयान पर दूकान को निरस्त कर दिया है। 15 जून को दूकान निलंबित करने के बाद पास के गांव सागररायपुर की दूकान से संबद्घ कर दिया गया था।
प्रशासन की ओर से दूकान निलंबित होने के बाद कोटेदार नंदलाल शुक्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन, हाईकोर्ट ने प्रकरण को दो माह के अंदर निस्तारित करने के लिए प्रशासन को आदेश दिया था। इसके बाद कोटेदार ने नोटिस का स्पष्टीकरण देने के साथ आरोप को निराधार होने का दावा किया था, लेकिन उस दावे की जांच कराई गई। शिकायतकर्ताओं समेत ग्रामीणों ने कोटेदार पर राशन वितरण न करने का आरोप लगा कर दावे की पोल खोल दी थी। इसके बाद एसडीएम और डीएसओ ने एक साथ पहुंचकर दलित, यादव और सरोज बस्ती में जाकर बयान लिया। इसमें भी कार्डधारकों के आरोप का सत्यापन किया गया।आरोप की पुष्टि होने के बाद स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए दूकान को निरस्त करने की कार्रवाई कर दी। साथ ही अनुबंध के साथ जमा की गई धनराशि को जब्त कर लिया गया। मालूम हो कि बड़ागांव में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी।
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