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ज्ञानपुर। रबी सीजन में गेहूं की बुआई में बेकार साबित हुई नहरें सिंचाई में भी विलंबित हो रही है। 26 दिसंबर की डेडलाइन के बजाए अब 28 दिसंबर को पंप कैनाल चालू किया जाएगा। पंप में आई खराबी को 27 दिसंबर तक सही करने का अनुमान है। इससे सिंचाई की तैयारी में लगे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
जिले में करीब 300 किमी छोटी-बड़ी नहरों का जाल फैला है। इससे करीब 10 से 15 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई की जाती है। धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुआई में लगे लेकिन पूर्वांचल के किसानों की लाइफ लाइन कही जाने वाली ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से पानी की आपूर्ति नहीं की गई। जिससे नहरों के साथ ही माइनर सूख गए हैं। नहरों की सफाई आदि को लेकर दो महीने तक पंप कैनाल को बंद रखा जाता है। इससे निजी पंपिगसेट, राजकीय नलकूूपों के सहारे किसान पलेवा करने के साथ ही पहली सिंचाई भी कर रहे हैं। जिन खेतों में सिर्फ नहर का पानी ही पहुंच सकता है वे किसान अब भी परेशान हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि नहर विभाग रबी सीजन में ही साफ-सफाई के नाम पर नहरों को बंद कर देता है। नवंबर और 15 दिसंबर तक बुआई का सीजन है। लेकिन नहरों को 25 दिसंबर के बाद चालू किया जाता है। बारीपुर के किसान राहुल दुबे, नारेपार के हंसराज सिंह, सरकार शुक्ल, जगदीप शुक्ल, डीघ के नंघू तिवारी, कला तुलसी के आदर्श पांडेय, भुर्रा के अवधराज सिंह, इटहरा के दीनानाथ मिश्र आदि किसानों ने नहर विभाग पर मनमानी का आरोप लगाया। अधिशासी अभियंता नहर केदारनाथ जायसवाल ने कहा कि दो महीने तक नहरों की साफ-सफाई की गई। चिन्हित नहरों को साफ कराया जा चुका है। पंप कैनाल में तकनीकी खामी है। इंजीनियरों से उसे सही कराया जा रहा है। 27 को शाम या 28 दिसंबर से नहरों में पानी
जिले में करीब 300 किमी छोटी-बड़ी नहरों का जाल फैला है। इससे करीब 10 से 15 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई की जाती है। धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुआई में लगे लेकिन पूर्वांचल के किसानों की लाइफ लाइन कही जाने वाली ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से पानी की आपूर्ति नहीं की गई। जिससे नहरों के साथ ही माइनर सूख गए हैं। नहरों की सफाई आदि को लेकर दो महीने तक पंप कैनाल को बंद रखा जाता है। इससे निजी पंपिगसेट, राजकीय नलकूूपों के सहारे किसान पलेवा करने के साथ ही पहली सिंचाई भी कर रहे हैं। जिन खेतों में सिर्फ नहर का पानी ही पहुंच सकता है वे किसान अब भी परेशान हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि नहर विभाग रबी सीजन में ही साफ-सफाई के नाम पर नहरों को बंद कर देता है। नवंबर और 15 दिसंबर तक बुआई का सीजन है। लेकिन नहरों को 25 दिसंबर के बाद चालू किया जाता है। बारीपुर के किसान राहुल दुबे, नारेपार के हंसराज सिंह, सरकार शुक्ल, जगदीप शुक्ल, डीघ के नंघू तिवारी, कला तुलसी के आदर्श पांडेय, भुर्रा के अवधराज सिंह, इटहरा के दीनानाथ मिश्र आदि किसानों ने नहर विभाग पर मनमानी का आरोप लगाया। अधिशासी अभियंता नहर केदारनाथ जायसवाल ने कहा कि दो महीने तक नहरों की साफ-सफाई की गई। चिन्हित नहरों को साफ कराया जा चुका है। पंप कैनाल में तकनीकी खामी है। इंजीनियरों से उसे सही कराया जा रहा है। 27 को शाम या 28 दिसंबर से नहरों में पानी
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