ज्ञानपुर। अफसरों की उदासीनता कही जाए या कमीशनखोरी का पेच। करीब पांच साल में नगर एवं ग्रामीण अंचलों में स्वीकृत 42 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास में 22 हजार पूर्ण नहीं हो सके। करीब एक साल से सात हजार लाभार्थियों को तीसरी जबकि आठ को दूसरी किस्त का इंतजार है। केंद्र सरकार की ओर से गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5981, 2017-18 में 4560 और 2018-19 में करीब 2248 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। तीन वित्तीय वर्ष में करीब 11 हजार 500 आवासों में लगभग 10400 आवास पूर्ण हो गए। 2019-20 में मांग कम होने से एक हजार आवास का प्रस्ताव भेजा गया। कागजों में अधूरे आवासों की संख्या न के बराकर है, जबकि ग्रामीण अंचलों में धरातल पर तीन से चार आवास अब भी अपूर्ण हैं। प्रधान और सेक्रेटरी की ठेकेदारी के साथ बैंकों की उदासीनता भी लाभार्थियों के आवास को पूर्ण नहीं करा सकी। नगरीय इलाकों में स्थिति इससे भी खराब है। पांच साल में जिले के ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज, सुरियावां, नई बाजार, घोसिया और खमरिया में आवास के 31 लाभार्थी चयनित किए गए। अब तक मात्र 12 हजार आवास पूर्ण हो सके। करीब 19 हजार लाभार्थियों में से आठ हजार को पहली किस्त, छह हजार को दूसरी किस्त और पांच हजार को तीसरी किस्त भेज जानी है। ऐसे में छप्पर या कच्चे घरों को तोड़ कर प्रधानमंत्री आवास बनाने का सपना देख रहे लाभार्थी चिंतित हो उठे हैं। आने वाले समय में कड़ाके की ठंड में उन्हें रात गुजारना भी मुश्किल हो जाएगा। डूडा अधिकारी ऊषा त्रिपाठी ने कहा कि आवास पूर्ण कराने का पूरा जोर दिया जा रहा है। पहली, दूसरी और तीसरी किस्त की रकम एक गाइडलाइन के हिसाब से दी जाती है। मार्च-अप्रैल से कोरोना संक्रमण का दौर शुरू होने से भी आवास निर्माण में दिक्कत हुई।