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...तो समय पर नहीं चल पाएंगी नहरें
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सीतामढ़ी। रबी की मुख्य फसल गेहूं के पलेवा और सिंचाई के लिए नहर द्गह्यड्ड द्बद्मह्वद्ध चलाने की तय समय सीमा 26 दिसंबर को पंप गृह नहीं चल सका। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने दावा किया कि एक दो दिन में ही पंप गृह को पूरी क्षमता से चालू कर नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल नहर में मरम्मत का काम चल रहा है। ऐसे में 28 दिसंबर को भी नहर चलने के आसार नहीं लग रहे हैं। अधिशासी अभियंता सिविल केदार नाथ जायसवाल का कहना है कि पानी के डिलिवरी टैंक में लीकेज आने से उसे ठीक कराया जा रहा है। इस काम में एक- दो दिन का समय और लग सकता है।
ज्ञानपुर पंप नहर परियोजन की नहरों से भदोही, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर जनपदों के किसानों के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। रबी की मुख्य फसलों में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जबकि खरीफ के सीजन में धान की खेती होती है। वैसे तो सिंचाई की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को किसानों की लाइफ लाइन के रूप में देखा जाता है, लेकिन परियोजना बदहाली के दौरसे गुजर रही है। नहरों का बुरा हाल होने से यह परियोजना सिंचाई के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल साबित हो रही है। ज्ञात हो कि पिछले एक माह से नहरों की साफ सफाई का काम चल रहा है बावजूद इसके नहरें घास फूस से पटी पड़ी हैं।
बेतरतीब रोस्टर से पड़ सकता है पैदावार पर असर
सीतामढ़ी। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है, वहीं खेतों और फसलों को समय पर पानी भी मुहैया नहीं हो पाता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अधिकारी और विशेषज्ञ हमारे किसानों को उन्नतशील और आधुनिक खेती करने का सुझाव देते हैं, लेकिन यही अधिकारी गेहूं के बुवाई के लिए नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल दिसंबर के अंतिम दिनों को तय किए हुए हैं। जबकि गेहूं बुवाई का सही समय नवंबर होता है। किसानों का कहना है कि जब गेहूं की बुवाई के लिए पलेवा जनवरी के होगा तो गेहूं की बुवाई मध्य जनवरी में शुरू हो सकेगी। ऐसे में गेहूं की पैदावार पर असर पड़ना तय है। ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई के लिए पलेवा और सिंचाई के लिए पानी देने की समय सीमा 26 दिसंबर तय की गई है। यह तिथि पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। इस बार इस तिथि पर भी नहरें नहीं चल पाईं।
ज्ञानपुर पंप नहर परियोजन की नहरों से भदोही, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर जनपदों के किसानों के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। रबी की मुख्य फसलों में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जबकि खरीफ के सीजन में धान की खेती होती है। वैसे तो सिंचाई की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को किसानों की लाइफ लाइन के रूप में देखा जाता है, लेकिन परियोजना बदहाली के दौरसे गुजर रही है। नहरों का बुरा हाल होने से यह परियोजना सिंचाई के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल साबित हो रही है। ज्ञात हो कि पिछले एक माह से नहरों की साफ सफाई का काम चल रहा है बावजूद इसके नहरें घास फूस से पटी पड़ी हैं।
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बेतरतीब रोस्टर से पड़ सकता है पैदावार पर असर
सीतामढ़ी। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है, वहीं खेतों और फसलों को समय पर पानी भी मुहैया नहीं हो पाता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि अधिकारी और विशेषज्ञ हमारे किसानों को उन्नतशील और आधुनिक खेती करने का सुझाव देते हैं, लेकिन यही अधिकारी गेहूं के बुवाई के लिए नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल दिसंबर के अंतिम दिनों को तय किए हुए हैं। जबकि गेहूं बुवाई का सही समय नवंबर होता है। किसानों का कहना है कि जब गेहूं की बुवाई के लिए पलेवा जनवरी के होगा तो गेहूं की बुवाई मध्य जनवरी में शुरू हो सकेगी। ऐसे में गेहूं की पैदावार पर असर पड़ना तय है। ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई के लिए पलेवा और सिंचाई के लिए पानी देने की समय सीमा 26 दिसंबर तय की गई है। यह तिथि पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। इस बार इस तिथि पर भी नहरें नहीं चल पाईं।
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