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गड्ढामुक्त नहीं हो सकी कालीन नगरी की 150 सड़कें
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मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के फरमान का असर अफसरों पर नहीं दिख रहा है। कालीन नगरी की 150 सड़कें गड्ढामक्त नहीं हो सकी हैं। अब 30 दिसंबर तक समयसीमा बढ़ने से लोक निर्माण विभाग को थोड़ी मोहलत मिल गई है, लेकिन 18 दिनों में सड़कों की मरम्मत कराना चुनौती से कम नहीं है। बजट का अभाव विभाग की परेशानी बढ़ा रहा है और सड़कों पर छोटे-बड़े गड्ढे दिख रहे हैं।
साल 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसद मौर्य तक ने सड़कों की दशा सुधारने के लिए कई बार हिदायत दी है। विधानसभा चुनाव से पूर्व भी सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश जारी किया गया। शुरूआत में 15 अक्तूबर से 15 नवंबर और उसके बाद 30 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने की अंतिम तिथि तय की गई। इसके बाद भी सड़कें तमाम सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो सकीं। अब भी तमाम ग्रामीण एवं नगरीय सड़कों की हालत नहीं सुधर सकी है। इससे आम आदमी को आवागमन करना मुश्किल हो गया है। एक बार फिर सरकार ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए तिथि बढ़ा कर 30 दिसंबर तक कर दिया है। लोक निर्माण विभाग के दावों पर नजर डालें तो जिले में लगभग 365 किमी सड़क को गड्ढा मुक्ति अभियान में संतृप्त कर दिया गया है और बजट की कमी के कारण 150 सड़कें अभी अधूरी रह गई हैं। लेकिन गड्ढायुक्त सड़कों की संख्या कहीं अधिक है। उदाहरण के तौर पर देखें तो राजमार्ग के गोधना मोड़ से दरवांसी, वहिदानगर से रजमला, नवधन से कुरमैचा, सरोई से औराई, डगडगपुर-शिवनाथपट्टी, नेतानगर-मऊरामशाला, सुरियावां, सदलूबीर-सरायहोला, रजमला-बसहीं, गोपपुर-गोपीगंज, डुहिया-गोपीगंज समेत अन्य मार्ग पर अब भी कई जगह छोटे-बडे़ गड्ढे दिख जाएंगे। इन मार्गों पर पैदल व वाहनों से चल पाना लोगों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। भाजपा पिछड़ा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश प्रकाश पाल ने डिप्टी सीएम को पत्र लिखकर पिपरिस-मुख्यालय मार्ग के मरम्मत की मांग की, लेकिन छह महीने के बाद सड़क की हालत नहीं सुधर सकी है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसबी राव का कहना है कि गड्ढा मुक्ति अभियान के लिए तीन करोड़ बजट स्वीकृत हुआ था। 365 किमी सड़क की मरम्मत कराई गई है। एक करोड़ रुपये से कार्य कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर अधूरी सड़कों को सही कराया जाएगा। अब 30 दिसंबर तक का समय मिला है। इस समय सीमा के अंदर सड़कें गड्ढामुक्त कर ली जाएंगी।
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साल 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसद मौर्य तक ने सड़कों की दशा सुधारने के लिए कई बार हिदायत दी है। विधानसभा चुनाव से पूर्व भी सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश जारी किया गया। शुरूआत में 15 अक्तूबर से 15 नवंबर और उसके बाद 30 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने की अंतिम तिथि तय की गई। इसके बाद भी सड़कें तमाम सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो सकीं। अब भी तमाम ग्रामीण एवं नगरीय सड़कों की हालत नहीं सुधर सकी है। इससे आम आदमी को आवागमन करना मुश्किल हो गया है। एक बार फिर सरकार ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए तिथि बढ़ा कर 30 दिसंबर तक कर दिया है। लोक निर्माण विभाग के दावों पर नजर डालें तो जिले में लगभग 365 किमी सड़क को गड्ढा मुक्ति अभियान में संतृप्त कर दिया गया है और बजट की कमी के कारण 150 सड़कें अभी अधूरी रह गई हैं। लेकिन गड्ढायुक्त सड़कों की संख्या कहीं अधिक है। उदाहरण के तौर पर देखें तो राजमार्ग के गोधना मोड़ से दरवांसी, वहिदानगर से रजमला, नवधन से कुरमैचा, सरोई से औराई, डगडगपुर-शिवनाथपट्टी, नेतानगर-मऊरामशाला, सुरियावां, सदलूबीर-सरायहोला, रजमला-बसहीं, गोपपुर-गोपीगंज, डुहिया-गोपीगंज समेत अन्य मार्ग पर अब भी कई जगह छोटे-बडे़ गड्ढे दिख जाएंगे। इन मार्गों पर पैदल व वाहनों से चल पाना लोगों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। भाजपा पिछड़ा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश प्रकाश पाल ने डिप्टी सीएम को पत्र लिखकर पिपरिस-मुख्यालय मार्ग के मरम्मत की मांग की, लेकिन छह महीने के बाद सड़क की हालत नहीं सुधर सकी है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसबी राव का कहना है कि गड्ढा मुक्ति अभियान के लिए तीन करोड़ बजट स्वीकृत हुआ था। 365 किमी सड़क की मरम्मत कराई गई है। एक करोड़ रुपये से कार्य कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर अधूरी सड़कों को सही कराया जाएगा। अब 30 दिसंबर तक का समय मिला है। इस समय सीमा के अंदर सड़कें गड्ढामुक्त कर ली जाएंगी।
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