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अस्तित्व बचाने को तरस रहे सार्वजनिक तालाब
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लालानगर। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी राजस्व विभाग सार्वजनिक तालाबों से अतिक्रमण हटवाने में असफल साबित हो रहा है। विभागीय शिथिलता के कारण हौसलाबुलंद अतिक्रमणकारी कच्चे-पक्के निर्माण कर इनकी महत्ता और उपयोगिता मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसका उदाहरण डीघ ब्लॉक क्षेत्र के विट्ठलपुर-छतमी गांव स्थित 14 बीघे का तालाब है, जो अतिक्रमण के कारण सिमटकर तीन बीघे में आ गया है।
गांव निवासी त्रिपुरारी, सुमित्रानंदन, झल्लर, मार्कंडेय आदि के मुताबिक गांव के मध्य स्थित उक्त तालाब का पहले बड़ा महत्व था। गांव वासी तालाब में एकत्रित पानी का सदुपयोग करते थे, लेकिन अब वह अतिक्रमण की भेंट चढ़कर अपना अस्तित्व बचाने के लिए विभागीय कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। अहम बात तो यह अतिक्रमण के अलावा भीषण गंदगी और मलबे को भी डालकर बेलगाम लोग उसे पाटने में लगे हैं। खासकर गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने वाले पशु-पक्षि यों की प्यास नहीं बुझ पाती। क्योंकि तालाब पर रिहायशी आशियाना बना लेने वालों की मौजूदगी बन रही है। जबकि उच्च न्यायालय की ओर से सार्वजनिक जलाशयों, तालाबों, पोखरे आदि को बचाए रखने के लिए अतिक्रमण से मुक्त रखने का निर्देश भी है। बावजूद इसके राजस्व विभाग कदम उठाने से मुंह मोड़ता रहता है। यह तो एक बानगी भर है। ब्लाक क्षेत्र के दरवांसी, रामकिशुनपुर-बसहीं, गोधना, सुधवैं, नवधन, कुरमैचा, ऊंज-मुंगरहा, मैलौना, दौरियाहीं, कुलमनपुर, महुआरी, राजापुर-खरगापुर, रजमला समेत तटवर्ती क्षेत्र के दर्जनों प्राचीन और ऐतिहासिक तालाबों की भी स्थिति ऐसी ही बनी है। विट्ठलपुर-छतमी गांव में कई वर्ष पहले जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर मामूली कार्रवाई करने के बाद दोबारा सुधि नहीं ली। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल पर अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप मढ़ते हुए कार्यप्रणाली की जांच और तालाब को खाली कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।
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गांव निवासी त्रिपुरारी, सुमित्रानंदन, झल्लर, मार्कंडेय आदि के मुताबिक गांव के मध्य स्थित उक्त तालाब का पहले बड़ा महत्व था। गांव वासी तालाब में एकत्रित पानी का सदुपयोग करते थे, लेकिन अब वह अतिक्रमण की भेंट चढ़कर अपना अस्तित्व बचाने के लिए विभागीय कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। अहम बात तो यह अतिक्रमण के अलावा भीषण गंदगी और मलबे को भी डालकर बेलगाम लोग उसे पाटने में लगे हैं। खासकर गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने वाले पशु-पक्षि यों की प्यास नहीं बुझ पाती। क्योंकि तालाब पर रिहायशी आशियाना बना लेने वालों की मौजूदगी बन रही है। जबकि उच्च न्यायालय की ओर से सार्वजनिक जलाशयों, तालाबों, पोखरे आदि को बचाए रखने के लिए अतिक्रमण से मुक्त रखने का निर्देश भी है। बावजूद इसके राजस्व विभाग कदम उठाने से मुंह मोड़ता रहता है। यह तो एक बानगी भर है। ब्लाक क्षेत्र के दरवांसी, रामकिशुनपुर-बसहीं, गोधना, सुधवैं, नवधन, कुरमैचा, ऊंज-मुंगरहा, मैलौना, दौरियाहीं, कुलमनपुर, महुआरी, राजापुर-खरगापुर, रजमला समेत तटवर्ती क्षेत्र के दर्जनों प्राचीन और ऐतिहासिक तालाबों की भी स्थिति ऐसी ही बनी है। विट्ठलपुर-छतमी गांव में कई वर्ष पहले जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर मामूली कार्रवाई करने के बाद दोबारा सुधि नहीं ली। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल पर अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप मढ़ते हुए कार्यप्रणाली की जांच और तालाब को खाली कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।
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