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ब्रह्म को एक लय में लाना ही रास
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:15 AM IST
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सीतामढ़ी। डीघ ब्लॉक के कलातुलसी गांव में आयोजित भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक आचार्य हरिकृष्ण जी महराज ने प्रकृति और ब्रह्म की गुत्थी सुलझाई। कहा कि प्रकृति के सभी तत्वों और ब्रह्म को एक लय में ले आना ही रास है। भगवान की अनंत लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा पहुंच कर कालिया नाग का मर्दन कर यमुना के जल को शोधित किया। इसी तरह मुष्टिक, चारुण जैसे दैत्यों का वध किया। अंत में कंस का वध कर अहंकार का समापन किया। भगवान ने उद्धव जी को वृंदावन भेजा और ज्ञान मार्ग को प्रेम मार्ग में बदला। उन्होंने कहा कि वास्तव में जीवन का सार ही प्रेम है। संतों ने कहा है कि मन शिक्षा से नहीं बल्कि दीक्षा से नियंत्रित होता है। जब तक मनुष्य वास्तविक धर्म से नहीं जुड़ जाता, तब तक उसका मन परिवर्तित नहीं हो सकता है। कहा कि भगवान का भक्त गरीब हो सकता है, परंतु स्वार्थी नहीं होता है। वह अपने सुख की प्राप्ति के लिए ईश्वर को कभी कष्ट नहीं पहुंचाता है। सुदामा चरित्र की कथा प्रसंग को समझाते हुए बताया गया कि सुदामा ने द्वारिका जाकर भी द्वारिकाधीश के सामने अपनी गरीबी का दुखड़ा नहीं सुनाया परंतु द्वारिकाधीश ने सुदामा को बिना बताए ही उनके सारे कष्टों का निवारण कर दिया। इस मौके पर अवध नारायण पांडेय, आदर्श पांडेय, राजू शुक्ला, मानिक प्रसाद, राजा पांडेय, अजय नारायण, रविकांत आदि रहे।
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