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ठंड का कहर बरपा
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ऊंज। क्षेत्र के बरईपुर गांव में सोमवार रात ठंड से एक वृद्धा की मौत हो गई। रमेश स्वर्णकार की माता श्यामकली (70) को रात में एकाएक पेट में तेज दर्द होने लगा। घर वाले कुछ कर पाते कि भोर में उनकी मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि मौत का कारा ठंड लगना है। इस बाबत प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। परिजनों ने बताया कि मौत से पहले श्यामकली ने ठंड लगने की बात कही थी।
ठंड का प्रकोप बढ़ा, ठिठुरा जनजीवन
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। दिसंबर में एक पखवाड़ा गुजरने के बाद ठंड का प्रकोप एकदम से बढ़ गया है। सर्द हवाओं के चलते पारा तेजी से लुढ़क रहा है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहा। छिटपुट बादलों के बीच हल्की धूप सर्द हवाओं के सामने बेअसर साबित हुई। सुबह-शाम अलाव लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। मंगलवार सुबह आसमान में बादल काफी हद तक छंट चुके थे। लेकिन, सर्द हवा के झोंके लोगों की कंपकपी छुड़ा रहे थे। हल्की धुंध को साथ लेकर चल रहीं हवाओं के कारण लोग देर तक रजाई में दुबके रहे। दिन में भी सूर्यदेव को बादल जब-तब ढंकते रहे। इससे बीच-बीच में गुनगुनी धूप भी गायब होती रही।
ठंड के बढ़ते प्रकोप से लोग सहम गए हैं। इसका असर यातायात व्यवस्था पर भी दिख रहा है। तापमान गिरने के कारण सड़कों पर वाहनों की तादाद सुबह-शाम जहां घट जा रही है, वहीं लोगों को दिन में भी रजाई में दुबकने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से कंबल वितरण और अलाव की कारगर व्यवस्था धरातल पर नहीं दिख रही है। रही।
ठंड का प्रकोप बढ़ा, ठिठुरा जनजीवन
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। दिसंबर में एक पखवाड़ा गुजरने के बाद ठंड का प्रकोप एकदम से बढ़ गया है। सर्द हवाओं के चलते पारा तेजी से लुढ़क रहा है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहा। छिटपुट बादलों के बीच हल्की धूप सर्द हवाओं के सामने बेअसर साबित हुई। सुबह-शाम अलाव लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। मंगलवार सुबह आसमान में बादल काफी हद तक छंट चुके थे। लेकिन, सर्द हवा के झोंके लोगों की कंपकपी छुड़ा रहे थे। हल्की धुंध को साथ लेकर चल रहीं हवाओं के कारण लोग देर तक रजाई में दुबके रहे। दिन में भी सूर्यदेव को बादल जब-तब ढंकते रहे। इससे बीच-बीच में गुनगुनी धूप भी गायब होती रही।
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ठंड के बढ़ते प्रकोप से लोग सहम गए हैं। इसका असर यातायात व्यवस्था पर भी दिख रहा है। तापमान गिरने के कारण सड़कों पर वाहनों की तादाद सुबह-शाम जहां घट जा रही है, वहीं लोगों को दिन में भी रजाई में दुबकने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से कंबल वितरण और अलाव की कारगर व्यवस्था धरातल पर नहीं दिख रही है। रही।
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