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किसान बेहाल, बीमा कंपनी मालामाल
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:32 PM IST
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ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों के बजाए बीमा कंपनियों को हो रहा है। तीन सीजन के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीमा कपंनियो ने 20 हजार किसानों का बीमा फसल के लिए 16 करोड़ से अधिक का प्रीमियम वसूला, जबकि प्रभावित किसानों को सिर्फ 20 लाख रुपयों का ही भुगतान हुआ। 16 करोड़ के प्रीमियम में करीब चार करोड़ रुपये किसानों से वसूला गया था, जबकि शेष राशि केंद्र और प्रदेश सरकार ने जमा की थी।
केंद्र की भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए जहां अनुदानित योजनाएं चला रही है, वहीं क्षतिपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी लागू की है। इस योजना में किसानों को 20 प्रतिशत से लेकर शत प्रतिशत क्षतिपूर्ति का लाभ देने का प्रावधान है। खरीफ सीजन 2017 में करीब 22 हजार किसानों ने प्रीमियम के नाम पर दो करोड़ प्रीमियम जमा किया, जबकि केंद्र ने 2.89 और प्रदेश ने 2.89 करोड़ की प्रीमियम राशि दी। रबी सीजन 2017 में 25 हजार किसानों ने डेढ़ करोड़ और सरकारों ने ढाई-ढाई करोड़ का प्रीमियम भरा। खरीफ सीजन 2018 में 22 से 25 हजार किसानों से 67 लाख और सरकारों से 93-93 लाख प्रीमियम का अंश जमा किया। तीनों सीजन में तकरीब 16 करोड़ से अधिक प्रीमियम की रकम वसूल की गई, लेकिन किसानों को तीनों सीजन में 20 लाख ही क्षतिपूर्ति मिली। तीनों सीजन में करीब 15 हजार से अधिक किसानों की फसल जलजमाव, बीमारी और आग लगने से नष्ट हुई, लेकिन क्षतिपूर्ति के नाम पर गिने-चुने किसान ही लाभ पा सके। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीनों सीजन में 15 हजार किसानों की फसल के नुकसान की सूचना बीमा कंपनी को दी गई। जिनको 30 फीसदी क्षतिपूर्ति मिलनी थी, लेकिन बीमा कंपनी 15 फीसदी भी क्षतिपूर्ति नहीं दी।
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मुआवजा देने का प्रावधान
ज्ञानपुर। किसान को फसल पूरी तरह बरबाद होने पर 47 हजार 950 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कंपनी मुआवजा देती है जबकि इतनी खेती श्रम, खर्च और खेत का किराया जोड़ने के बाद लगभग 40 से 50 हजार रुपये की लागत आती है। फसल बरबाद होने पर बीमा कंपनी इससे कम ही मुआवजा दे रही है।
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जिन किसानों के फसलों की क्षति होती है। सूचना के बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि नुकसान का आकलन करते हैं। उसके आधार पर क्षतिपूर्ति की जाती है। 20 हजार 500 किसानों में से 15 हजार किसानों ने फसल बरबाद होने की सूचना दी थी। उनको बीमा कंपनी ने नुकसान का आकलन करके 20 लाख आठ हजार की क्षूतिपूर्ति दी। - अरविंद सिंह, उप कृषि निदेशक