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अस्पताल में डाक्टर नदारत, भगवान भरोसे मरीज
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:16 PM IST
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ज्ञानपुर। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के सरकार की कोशिशों को खुद स्वास्थ्य विभाग की ठेंगा दिखा रहा है। जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों का अपने कक्ष से गायब रहना सामान्य-सी बात हो गई है। दूरदराज से आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के बेपरवाह डॉक्टर मरीज को भगवान भरोसे छोड़ आए दिन अपनी केबिन से गायब रहते हैं। डॉक्टरों की यह लापरवाही एक या दो दिन से नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से बनी हुई है। सुबह के 11 बजे के बाद ज्यादातर डॉक्टरों की कुर्सियां खाली हो जाती हैं। इससे दूर दराज से आने वाले मरीज घंटों इंतजार के बाद प्राइवेट चिकित्सालय में अपनी जेब ढीली करवाने को मजबूर हो जाते हैं। बुधवार को 10 किमी. दूूर से आए कमलेश कुुुमार अपने बेटे आकाश (10) और पत्नी मेहता देवी को दिखाने जिला चिकित्सालय आए थे। उन्होंने बताया कि एक घंटे इंतजार के बाद पूछे जाने पर पता चला डॉक्टर साहब आज नहीं मिल पाएंगे। इससे मजबूरन उन्हें प्राइवेट अस्पताल में बच्चे और पत्नी को दिखाने जाना पड़ा। इसी प्रकार गोपीगंज से बेहतर उपचार की आस लेकर जिला चिकित्सालय आए अनुराग, राधा, फूलमती, देवबहादुर, रविराज, मन्नू देवी, सुखराजी, महिमा समेत दर्जनभर से ज्यादा मरीजों को वापस लौटना पड़ा। हालांकि इस समस्या को लेकर सीएमएस डॉ. धरमवीर ने बताया कि कुछ डाक्टर जिले के बाहर विभागीय मीटिंग में गए हुए हैं और कुछ को माघ मेले के स्वास्थ्य शिविर में अटैच किया गया है।
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के बेपरवाह डॉक्टर मरीज को भगवान भरोसे छोड़ आए दिन अपनी केबिन से गायब रहते हैं। डॉक्टरों की यह लापरवाही एक या दो दिन से नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से बनी हुई है। सुबह के 11 बजे के बाद ज्यादातर डॉक्टरों की कुर्सियां खाली हो जाती हैं। इससे दूर दराज से आने वाले मरीज घंटों इंतजार के बाद प्राइवेट चिकित्सालय में अपनी जेब ढीली करवाने को मजबूर हो जाते हैं। बुधवार को 10 किमी. दूूर से आए कमलेश कुुुमार अपने बेटे आकाश (10) और पत्नी मेहता देवी को दिखाने जिला चिकित्सालय आए थे। उन्होंने बताया कि एक घंटे इंतजार के बाद पूछे जाने पर पता चला डॉक्टर साहब आज नहीं मिल पाएंगे। इससे मजबूरन उन्हें प्राइवेट अस्पताल में बच्चे और पत्नी को दिखाने जाना पड़ा। इसी प्रकार गोपीगंज से बेहतर उपचार की आस लेकर जिला चिकित्सालय आए अनुराग, राधा, फूलमती, देवबहादुर, रविराज, मन्नू देवी, सुखराजी, महिमा समेत दर्जनभर से ज्यादा मरीजों को वापस लौटना पड़ा। हालांकि इस समस्या को लेकर सीएमएस डॉ. धरमवीर ने बताया कि कुछ डाक्टर जिले के बाहर विभागीय मीटिंग में गए हुए हैं और कुछ को माघ मेले के स्वास्थ्य शिविर में अटैच किया गया है।
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