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शव पहुंचते ही कृपा शंकर के घर मचा कोहराम
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रुधौली आगरा यमुना एक्सप्रेस वे पर हुए बस दुर्घटना चालक की मौत होने पर रोते विलखते परिवार के लोग।
- फोटो : BASTI
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शव पहुंचते ही कृपा शंकर के घर मचा कोहराम
यमुना एक्सप्रेस पर दुर्घटना वाली बस चला रहे थे
रुधौली नगर पंचायत के कामता प्रसाद नगर में है घर
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। यमुना एक्सप्रेस वे पर दुर्घटना की शिकार हुई बस के चालक कृपा शंकर का शव मंगलवार को उनके रुधौली नगर पंचायत के कामता प्रसाद नगर स्थित घर पर लाया गया। शव देखते ही चीख-पुकार मच गई। 45 वर्षीय पत्नी सुशीला को दोनों हाथों से छाती पीटते देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
इकलौता बेटा संतोष समझ नहीं पा रहा था कि मां को वह कैसे संभाले। हर कोई बस मां-बेटे को ढांढस बंधा रहा था। मूसलाधार बारिश के बीच सैकड़ों लोग शोकाकुल परिवार के साथ खड़े थे। सब समझाते रहे कि नियति के आगे किसी का जोर नहीं। ढांढस बंधाने वालों में नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद भी शोकाकुल परिवार के बीच पहुंचे थे। बेटे संतोष व पत्नी सुशीला देवी से मिलकर उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
इस बार एक दिन पहले आना
रोडवेज में बस चालक की नौकरी करने वाले कृपा शंकर रविवार शाम को जब ड्यूटी पर जाने के लिए निकल रहे थे तो बेटे संतोष ने कहा कि इस बार एक दिन की और छुट्टी लेकर आइएगा। कुछ आवश्यक कार्य के लिए एक दिन अतिरिक्त छुट्टी लेकर आने को कहा था। लेकिन उसे क्या पता था कि उसके पिता कभी नहीं लौटेंगे।
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यमुना एक्सप्रेस पर दुर्घटना वाली बस चला रहे थे
रुधौली नगर पंचायत के कामता प्रसाद नगर में है घर
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। यमुना एक्सप्रेस वे पर दुर्घटना की शिकार हुई बस के चालक कृपा शंकर का शव मंगलवार को उनके रुधौली नगर पंचायत के कामता प्रसाद नगर स्थित घर पर लाया गया। शव देखते ही चीख-पुकार मच गई। 45 वर्षीय पत्नी सुशीला को दोनों हाथों से छाती पीटते देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
इकलौता बेटा संतोष समझ नहीं पा रहा था कि मां को वह कैसे संभाले। हर कोई बस मां-बेटे को ढांढस बंधा रहा था। मूसलाधार बारिश के बीच सैकड़ों लोग शोकाकुल परिवार के साथ खड़े थे। सब समझाते रहे कि नियति के आगे किसी का जोर नहीं। ढांढस बंधाने वालों में नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद भी शोकाकुल परिवार के बीच पहुंचे थे। बेटे संतोष व पत्नी सुशीला देवी से मिलकर उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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इस बार एक दिन पहले आना
रोडवेज में बस चालक की नौकरी करने वाले कृपा शंकर रविवार शाम को जब ड्यूटी पर जाने के लिए निकल रहे थे तो बेटे संतोष ने कहा कि इस बार एक दिन की और छुट्टी लेकर आइएगा। कुछ आवश्यक कार्य के लिए एक दिन अतिरिक्त छुट्टी लेकर आने को कहा था। लेकिन उसे क्या पता था कि उसके पिता कभी नहीं लौटेंगे।
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