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Basti News: 14 माह बाद भी जांच अधूरी, 1.56 करोड़ के गबन में कार्रवाई का इंतजार
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बस्ती। केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में वर्ष 2021-22 में हुए करीब 1.56 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच 14 माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। कोतवाली बस्ती में दर्ज मुकदमे की विवेचना अपराध शाखा कर रही है, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। इसके चलते मामले में नामजद आरोपियों पर कार्रवाई अटकी हुई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सर्वे इंस्पेक्टर इफ्तेखार आलम ने जून 2025 में कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तत्कालीन संस्थान नोडल अधिकारी (आईएनओ) और प्रधानाचार्यों समेत 75 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि 47 विद्यालयों में 1,769 छात्रों के नाम पर करीब 1.56 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का गबन किया गया।
जांच में कई छात्रों के नाम फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि विद्यालयों के नोडल और प्रधानाचार्यों की लॉगिन आईडी व पासवर्ड का इस्तेमाल कर छात्रवृत्ति के आवेदन तैयार किए गए और उन्हें आगे भेज दिया गया। ओटीपी के जरिए आवेदन फारवर्ड किए जाने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस पूरे खेल में किस स्तर पर और किन लोगों की भूमिका रही, इसका खुलासा विवेचना पूरी होने पर हो सकेगा।
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एक ही परिवार के पांच-छह सदस्यों के खातों में पहुंची रकम : जांच के दौरान पुलिस को रकम के कथित संगठित तरीके से स्थानांतरण का भी संकेत मिला है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक मामले में एक ही परिवार के पांच से छह सदस्यों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की रकम भेजी गई। पुलिस को कई खाताधारकों ने बताया कि उन्हें खाते में रकम आने की जानकारी ही नहीं थी। कुछ ने रकम लाैटाना शुरू कर दिया है।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सर्वे इंस्पेक्टर इफ्तेखार आलम ने जून 2025 में कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तत्कालीन संस्थान नोडल अधिकारी (आईएनओ) और प्रधानाचार्यों समेत 75 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि 47 विद्यालयों में 1,769 छात्रों के नाम पर करीब 1.56 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का गबन किया गया।
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जांच में कई छात्रों के नाम फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि विद्यालयों के नोडल और प्रधानाचार्यों की लॉगिन आईडी व पासवर्ड का इस्तेमाल कर छात्रवृत्ति के आवेदन तैयार किए गए और उन्हें आगे भेज दिया गया। ओटीपी के जरिए आवेदन फारवर्ड किए जाने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस पूरे खेल में किस स्तर पर और किन लोगों की भूमिका रही, इसका खुलासा विवेचना पूरी होने पर हो सकेगा।
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एक ही परिवार के पांच-छह सदस्यों के खातों में पहुंची रकम : जांच के दौरान पुलिस को रकम के कथित संगठित तरीके से स्थानांतरण का भी संकेत मिला है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक मामले में एक ही परिवार के पांच से छह सदस्यों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की रकम भेजी गई। पुलिस को कई खाताधारकों ने बताया कि उन्हें खाते में रकम आने की जानकारी ही नहीं थी। कुछ ने रकम लाैटाना शुरू कर दिया है।