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Basti News: सरोवर में ‘अमृत’ की जगह जलकुंभी और खरपतवार, सिल्ट ने किया बदरंग

Wed, 02 Sep 2026 01:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:18 AM IST
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Water hyacinth, weeds, and silt have marred the lake, replacing its nectar-like waters.
कप्तानगंज ब्लॉक के सड़वालिया गांव के अमृत सरोवर में बारिश के बाद भी पानी का अभाव संवाद
बस्ती। जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में बनाए गए अमृत सरोवर अपनी बदहाली से जूझ रहे हैं। जिले में 313 अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। प्रत्येक पर औसतन 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च किए गए, लेकिन बारिश के बाद भी कई सरोवरों की स्थिति नहीं सुधरी है।
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कहीं जलकुंभी और जलीय खरपतवार ने पानी को ढक रखा है तो कहीं सिल्ट जमा होने से सरोवर बदरंग हो गए हैं। कई जगह पाथ-वे उजड़ चुके हैं और किनारों पर झाड़ियां उग आई हैं। जिले में 1187 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2022 से गांवों में जल संरक्षण के साथ तालाबों को शहर की तर्ज पर विकसित करने की मुहिम शुरू हुई थी।
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इसके तहत अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया गया। सरोवर परिसर में छायादार और फूलदार पौधे लगाने के साथ दूधिया रोशनी, बैठने के लिए बेंच और लोगों के टहलने के लिए इंटरलॉकिंग पाथ-वे बनाए गए।
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जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण कई सरोवरों में अब इन सुविधाओं के अवशेष ही नजर आ रहे हैं। कहीं पाथ-वे की इंटरलॉकिंग ईंटें गायब हैं और मिट्टी दिखाई दे रही है तो कहीं झाड़ियां उग आई हैं। कई जगह मिट्टी पटाई के बाद काम अधूरा छोड़ दिए जाने की स्थिति दिखती है। कप्तानगंज ब्लॉक के कई अमृत सरोवरों की पड़ताल में भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई।
खर्च के बाद भी कहीं पानी नहीं, कहीं जलकुंभी : कप्तानगंज ब्लॉक में अमृत सरोवरों पर लंबाई और गहराई के हिसाब से करीब आठ से 15 लाख रुपये तक खर्च किए गए हैं। गुवांव गांव के अमृत सरोवर में पानी तो है, लेकिन चारों ओर झाड़ियां और घास-फूस उग आए हैं। नहर का गंदा पानी भी सरोवर में आकर जमा हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी की निकासी और सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है।

ग्राम प्रशासक प्रमोद कुमार ने बताया कि बरसात के कारण फिलहाल तालाब की सफाई नहीं हो पा रही है। सड़वलिया गांव में बने अमृत सरोवर की स्थिति इससे अलग नहीं है। यहां सरोवर में पानी नहीं है और घास-फूस जमा है। तालाब के किनारे लगाया गया सीमेंट का बोर्ड भी गिरा पड़ा है। ग्राम प्रशासक मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि करीब 15 लाख रुपये का एस्टीमेट बना है। तालाब का काम अभी अधूरा है।
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