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Basti News: लापता दरोगा की कुआनो के अमहट घाट पर मिली अंतिम लोकेशन, बाइक बरामद
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फाइल फोटो...गायब दारोगा अजय गौड़।
बस्ती। जिले के परशुरामपुर थाने में ड्यूटी के दौरान रहस्यमय ढंग से लापता दरोगा अजय गौड़ का पता 48 घंटे बाद भी नहीं चल सका है। इस मामले में पुलिस महकमा भी हैरान है। शनिवार को लापता दरोगा की बाइक कोतवाली क्षेत्र के कुआनो नदी के अमहट घाट के पास से बरामद हुई है। उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन भी अमहट पर मिली है। संदेह के आधार पर कुआनो नदी में गोताखोर एवं एसडीआरएफ की टीम उतार कर छानबीन शुरू कर दी है।
हालांकि, पुलिस अभी किसी अनहोनी पर पूरा भरोसा नहीं कर रही है। मोबाइल के अंतिम लोकेशन अमहट पर मिलने और बाइक बरामद होने के चलते एहतियातन नदी में छानबीन भले ही कराई जा रही, मगर पुलिस इस मामले को कुछ अलग ही मानकर चल रही है। एसपी यशवीर भी इस मामले में पूरी सक्रियता बरत रहे हैं। दरोगा की छानबीन के लिए उन्होंने पुलिस की पांच टीमें गठित की हैं। दरोगा के परिजन, रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक सभी से संपर्क में है। दरोगा के बारे में करीबियों से सघन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि बहुत जल्द लापता दरोगा के मामले में असलियत सामने आ जाएगी।
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परशुरामपुर से अहमट तक खंगाले जा रहे सीसीटीवी फुटेज
परशुरामपुर थाने से रहस्यमय ढंग से लापता दरोगा की तलाश में जुटी पुलिस की टीमें थाने से लेकर जिला मुख्यालय तक नाके-नाके पर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पता लगाया जा रहा है कि दरोगा अजय अपनी बाइक से कहां किसके साथ मौजूद रहे। हालांकि, थाने से निकलते समय उनके बाइक पर पीछे बैठा हुआ फालोवर कैमरे में कैद बताया जा रहा है। पुलिस फालोवर से भी पूछताछ कर रही है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित दरोगा के एक बार और लापता होने की सूचना प्रसारित हुई थी। बाद में वह मिल गए थे।
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पत्नी बोली- 17 घंटे तक नहीं की गई खोजबीन
5 फरवरी को परशुरामपुर थाने के प्रभारी विश्वमोहन राय अवकाश पर थे। थानाध्यक्ष का प्रभार अजय गौड़ को मिला था। उनके पास अपने मोबाइल के अलावा थानाध्यक्ष का सीयूजी नंबर भी था। इसी दिन दोपहर करीब 3:30 बजे के बाद थाने से निकले तब से उनका पता नहीं है। शनिवार को उनकी पत्नी रंजीता उनके पैतृक गांव देवरिया जिले कोतवाली थाना क्षेत्र के मूड़ाडीहा गांव से पत्नी रंजीता थाने पर पहुंची। उनकी शिकायत पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई। पत्नी ने बताया कि उस दिन उनकी पति से दिन में तीन बजे के आसपास बात हुई थी। कुछ देर बात करने के बाद उन्होंने फोन काट दिया था। इसके रोजाना की तरह जब रात में फोन मिलाए तो स्वीच ऑफ मिला। अगले दिन छह फरवरी को सुबह उन्हें जगाने के लिए फोन मिलाया तब भी स्वीच ऑफ था। इसके बाद थाने के एक सिपाही को फोन मिलाकर उनके बारे में पूछे तो बताया गया कि वह कल से नहीं है। तब उनसे मोहर्रिर का नंबर लेकर कार्रवाई के लिए बात की। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और 17 घंटे बाद खोजबीन शुरू की गई। पत्नी का कहना है कि नदी के किनारे लावारिश हालत में मिली बाइक के पीछे पुलिस गुमराह करने की साजिश है। आशंका जताई कि उन्हें कहीं कैद करके रखा गया है।
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नए एसपी को पहले ही दिन मिली चुनौती
नए एसपी यशवीर सिंह को कार्यभार ग्रहण करते ही चुनौती मिली। जिले के सबसे चर्चित थाना परशुरापुर में तैनात दरोगा का रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होना पुलिस कप्तान के लिए नई उलझन है। वह कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही इस मामले के तह तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुट गए है। पांच पुलिस टीमों को उतारने के अलावा खुद भी मातहत अफसराें के साथ तमाम भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मंथन में जुटे हैं।
कोट
लापता दरोगा की बाइक नदी के अमहट तट से बरामद कर ली गई है। उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन भी अमहट पर ही मिली है। पुलिस कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र कर कर रही है। एहतियातन नदी में तलाश के लिए गोताखोर और एसडीआरएफ की टीम उतारी गई हैं लेकिन, अभी किसी अनहोनी पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। उनके सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
श्यामकांत, एएसपी
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हालांकि, पुलिस अभी किसी अनहोनी पर पूरा भरोसा नहीं कर रही है। मोबाइल के अंतिम लोकेशन अमहट पर मिलने और बाइक बरामद होने के चलते एहतियातन नदी में छानबीन भले ही कराई जा रही, मगर पुलिस इस मामले को कुछ अलग ही मानकर चल रही है। एसपी यशवीर भी इस मामले में पूरी सक्रियता बरत रहे हैं। दरोगा की छानबीन के लिए उन्होंने पुलिस की पांच टीमें गठित की हैं। दरोगा के परिजन, रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक सभी से संपर्क में है। दरोगा के बारे में करीबियों से सघन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि बहुत जल्द लापता दरोगा के मामले में असलियत सामने आ जाएगी।
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परशुरामपुर से अहमट तक खंगाले जा रहे सीसीटीवी फुटेज
परशुरामपुर थाने से रहस्यमय ढंग से लापता दरोगा की तलाश में जुटी पुलिस की टीमें थाने से लेकर जिला मुख्यालय तक नाके-नाके पर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पता लगाया जा रहा है कि दरोगा अजय अपनी बाइक से कहां किसके साथ मौजूद रहे। हालांकि, थाने से निकलते समय उनके बाइक पर पीछे बैठा हुआ फालोवर कैमरे में कैद बताया जा रहा है। पुलिस फालोवर से भी पूछताछ कर रही है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित दरोगा के एक बार और लापता होने की सूचना प्रसारित हुई थी। बाद में वह मिल गए थे।
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पत्नी बोली- 17 घंटे तक नहीं की गई खोजबीन
5 फरवरी को परशुरामपुर थाने के प्रभारी विश्वमोहन राय अवकाश पर थे। थानाध्यक्ष का प्रभार अजय गौड़ को मिला था। उनके पास अपने मोबाइल के अलावा थानाध्यक्ष का सीयूजी नंबर भी था। इसी दिन दोपहर करीब 3:30 बजे के बाद थाने से निकले तब से उनका पता नहीं है। शनिवार को उनकी पत्नी रंजीता उनके पैतृक गांव देवरिया जिले कोतवाली थाना क्षेत्र के मूड़ाडीहा गांव से पत्नी रंजीता थाने पर पहुंची। उनकी शिकायत पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई। पत्नी ने बताया कि उस दिन उनकी पति से दिन में तीन बजे के आसपास बात हुई थी। कुछ देर बात करने के बाद उन्होंने फोन काट दिया था। इसके रोजाना की तरह जब रात में फोन मिलाए तो स्वीच ऑफ मिला। अगले दिन छह फरवरी को सुबह उन्हें जगाने के लिए फोन मिलाया तब भी स्वीच ऑफ था। इसके बाद थाने के एक सिपाही को फोन मिलाकर उनके बारे में पूछे तो बताया गया कि वह कल से नहीं है। तब उनसे मोहर्रिर का नंबर लेकर कार्रवाई के लिए बात की। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और 17 घंटे बाद खोजबीन शुरू की गई। पत्नी का कहना है कि नदी के किनारे लावारिश हालत में मिली बाइक के पीछे पुलिस गुमराह करने की साजिश है। आशंका जताई कि उन्हें कहीं कैद करके रखा गया है।
नए एसपी को पहले ही दिन मिली चुनौती
नए एसपी यशवीर सिंह को कार्यभार ग्रहण करते ही चुनौती मिली। जिले के सबसे चर्चित थाना परशुरापुर में तैनात दरोगा का रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होना पुलिस कप्तान के लिए नई उलझन है। वह कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही इस मामले के तह तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुट गए है। पांच पुलिस टीमों को उतारने के अलावा खुद भी मातहत अफसराें के साथ तमाम भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मंथन में जुटे हैं।
कोट
लापता दरोगा की बाइक नदी के अमहट तट से बरामद कर ली गई है। उनके मोबाइल की अंतिम लोकेशन भी अमहट पर ही मिली है। पुलिस कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र कर कर रही है। एहतियातन नदी में तलाश के लिए गोताखोर और एसडीआरएफ की टीम उतारी गई हैं लेकिन, अभी किसी अनहोनी पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। उनके सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
श्यामकांत, एएसपी