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Basti News: जेल में मुनाफाखोरी का खेल, 70 रूपये किलो वाल चने की कीमत 170

Thu, 29 Jan 2026 01:46 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:46 AM IST
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The game of profiteering in jail, the price of gram which was Rs 70 per kg is Rs 170.
बस्ती। जिला जेल में लंबा खेल चल रहा है। बड़ी चहारदीवारी के भीतर जिम्मेदारों के मनमानी के आगे किसी की नहीं चलती है। यहां खाद्य पदार्थों से लेकर सुविधाजनक बैरक तक की बोली लगती है। खबर है कि भीतर कैदी परेशान रहते हैं लेकिन, भय इतना है कि आवाज नहीं उठती है। यदि कोई अंदर बदइंतजामी के खिलाफ आपत्ति भी जाहिर किया तो उसे सख्त सजा मिलती है।
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जानकारों के अनुसार जेल के अंदर संचालित कैंटीन में खाद्य सामग्रियों का मनमाना रेट कैदियों से वसूल किया जाता है। आर्थिक रूप से सक्षम कैदी ही कैंटीन से सामग्रियों की खरीद कर पाते हैं। बाकी कैदी तो जेल मैनुअल के तहत मिलने वाले भोजन पर निर्भर रहते हैं। एक मामले में रिहाई के बाद जेल से बाहर आए कौशल किशोर शुक्ल कहते हैं कि शासन स्तर से कैदियों के आचरण सुधार, उनमें रचनात्मक सोच विकसित करने और स्वस्थ रहने के लिए गाइडलाइन जारी होती रहती है।
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न्यायालय स्तर से भी कैदियों में परिवर्तन और उनके सेहत को लेकर जेल प्रशासन को अक्सर सचेत किया जाता है। मगर जेल के भीतर नियम कानून बिल्कुल उल्टा है। कैदियों के सेहत के साथ पूरा खिलवाड़ किया जा रहा है। जेल मैनुअल के अनुसार मिलने वाले भोजन में तेल- मसाला का कोई स्वाद ही नहीं मिलता है। कैदियों को अपनी व्यवस्था से रहने- खाने को मजबूर किया जाता है। इसमें भारी लूट हैं। जिम्मेदारों की मिलीभगत से जेल के अंदर संचालित कैंटीन में खाद्य सामग्रियों का मूल्य बाजार से तीन गुना अधिक रखा गया है। पनीर की पानी जैसी सब्जी डेढ़ सौ रुपये क्वाटर मिल रही है।
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उसमें केवल बड़े होटलों में मिलने वाले चीनी के स्टिक साइज के केवल छह पनीर के टुकड़े रहते हैं। कैंटीन में बासी समोसा 15 रुपये पीस बिक रहा है। जबकि बाजार उसी साइज के समोसे की कीमत सात रुपये हैं। दूध की पानी जैसी पतली चाय छोटे कागज वाले गिलास में दस रुपये बिकती है। बाजार में उस साइज के कागज में मिलने वाली चाय की कीमत पांच रुपये हैं। कोई सेहत को दुरुस्त रखने के लिए यदि कच्चा चना खरीदना चाहता है तो उसे 170 रुपये किलो उपलब्ध कराया जाता है। जबकि बाजार में इसकी कीमत 70 से 80 रुपये कीमत है। इस मनमाने रेट के खिलाफ यदि कोई कैदी जिम्मेदारों से शिकायत करता है तो बाद में उसकी सामत आ जाती है। उसे प्रताड़ना भी मिलती है। इसी वजह से जेल में बंद रहने के दौरान उच्चाधिकारियों के निरीक्षण में कोई आवाज नहीं उठाता है।

मादक पदार्थों की करवाते हैं बिक्री : जेल के भीतर मादक पदार्थों के बिक्री किए जाने की खबर है। जानकार बताते हैं कि तमाम कैदी सुर्ती, बीड़ी, सिगरेट के अमल पूरी करने के लिए परेशान रहते हैं। जेल के अंदर यह मादक पदार्थ महंगे दर पर कैदियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पांच रुपये की सुर्ती 15 में, पांच रुपये की बीड़ी 15, आठ रुपये पीस मिलने वाला एक सिगरेट 20 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है।
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