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Basti News: एफआईआर की मूल प्रति न होने से नहीं हो सकी गवाही
Wed, 06 Mar 2024 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 06 Mar 2024 11:45 PM IST
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सच्चिदानंद केस: दो अन्य केस में भी पांच आरोपियों पर आरोप तय
चारों मुकदमों में सच्चिदानंद सहित पांचों आरोपी पर फिक्स हो चुका है चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सत्संग के बहाने आश्रम में बुलाकर साध्वियों के साथ यौन शोषण, बंधक बनाने आदि के केस में बुधवार को गवाही नहीं हो सकी। केस की फाइल में एफआईआर की मूल प्रति मौजूद न होने के कारण न्यायालय ने गवाही शुरू कराने से इन्कार करते हुए 11 मार्च की तारीख दे दी। दोनों केस में केस दर्ज कराने वाली छत्तीसगढ़ की दोनों पीड़िताएं गवाही के लिए न्यायालय में मौजूद रहीं।
27 फरवरी को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, भगोड़ा घोषित करने के दो केस में उसके खिलाफ आरोप तय किया गया था। वहीं, दो अन्य केस में भी न्यायालय ने सच्चिदानंद, प्रमिला बाई, कमला बाई, ध्यान बाई और उर्मिला बाई पर आरोप तय कर दिए हैं। इस केस में गवाही के लिए 14 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई है। 27 फरवरी की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के मौजूद न होने की वजह से आरोप नहीं हो पाया था।
वर्ष 2017 में कोतवाली थाने में पुलिस ने सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, परम चेतनानंद सहित पांच आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म, बंधक बनाने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। बाद में सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, परम चेतनानंद उर्फ पंकज भाई पटेल, प्रमिला बाई व कमला बाई पर भगोड़ा होने का केस दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किया था।
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...
यह है मामला
दिसंबर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाल देने का आरोप लगाया था। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर सच्चिदानंद के अलावा उसके तीन शिष्यों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराग्यानंद तथा दो मुख्य सेविकाओं पर 2008 से लगातार यौन शोषण व सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया। बाद में झारखंड की ही एक अन्य पीड़िता ने इन्हीं आरोपों में एक और केस कराया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता है। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता है। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन- सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता है।
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चारों मुकदमों में सच्चिदानंद सहित पांचों आरोपी पर फिक्स हो चुका है चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सत्संग के बहाने आश्रम में बुलाकर साध्वियों के साथ यौन शोषण, बंधक बनाने आदि के केस में बुधवार को गवाही नहीं हो सकी। केस की फाइल में एफआईआर की मूल प्रति मौजूद न होने के कारण न्यायालय ने गवाही शुरू कराने से इन्कार करते हुए 11 मार्च की तारीख दे दी। दोनों केस में केस दर्ज कराने वाली छत्तीसगढ़ की दोनों पीड़िताएं गवाही के लिए न्यायालय में मौजूद रहीं।
27 फरवरी को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, भगोड़ा घोषित करने के दो केस में उसके खिलाफ आरोप तय किया गया था। वहीं, दो अन्य केस में भी न्यायालय ने सच्चिदानंद, प्रमिला बाई, कमला बाई, ध्यान बाई और उर्मिला बाई पर आरोप तय कर दिए हैं। इस केस में गवाही के लिए 14 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई है। 27 फरवरी की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के मौजूद न होने की वजह से आरोप नहीं हो पाया था।
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वर्ष 2017 में कोतवाली थाने में पुलिस ने सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, परम चेतनानंद सहित पांच आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म, बंधक बनाने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। बाद में सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, परम चेतनानंद उर्फ पंकज भाई पटेल, प्रमिला बाई व कमला बाई पर भगोड़ा होने का केस दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किया था।
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यह है मामला
दिसंबर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाल देने का आरोप लगाया था। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर सच्चिदानंद के अलावा उसके तीन शिष्यों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराग्यानंद तथा दो मुख्य सेविकाओं पर 2008 से लगातार यौन शोषण व सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया। बाद में झारखंड की ही एक अन्य पीड़िता ने इन्हीं आरोपों में एक और केस कराया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता है। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता है। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन- सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता है।