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Basti News: कर्बला के शहीदों का मनाया गया दसवां
Mon, 29 Jul 2024 02:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:10 AM IST
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इमामबाड़ा शाबान मंजिल में मातमी जुलूस निकाला गया।
इमामबाड़ा परिसर में निकाला गया अलम व ताबूत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कर्बला के शहीदों का दसवां शनिवार की रात मनाया गया। शहर के कदीमी इमामबाड़ा शाबान मंजिल में सोगवारों ने नौहा व मातम किया। इमामबाड़ा परिसर में अलम व ताबूत निकाला गया, जिसकी जियारत के लिए लोग उमड़ पड़े।
साबिर रिजवी व उनके साथियों ने मर्सिया व सलाम पेश किया। इमाम हुसैन के अनुयायियों का मानना है कि कर्बला में इमाम की शहादत के बाद यजीदियों ने शहीदों का दसवां, बीसवां व चेहलुम मनाने की अनुमति इमाम के घर वालों को नहीं दी थी। आज पूरी दुनिया में इमाम के चाहने वाले उनका दसवां, बीसवां मनाते हैं।
मौलाना हैदर मेंहदी ने मजलिस को संबोधित करते हुए यजीद के जुल्म व इमाम की शहादत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आज से करीब 1400 साल पहले इराक के कर्बला नामक स्थान पर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कुर्बानी पेश की थी। तीन दिन तक इमाम के दल को भूखा व प्यासा रखकर समर्पण के लिए विवश किया गया, लेकिन इमाम ने सिर नहीं झुकाया। सत्य की रक्षा के लिए दिए गए उनके इस बलिदान को मोहम्मद साहब के अनुयायी याद करते हुए मजलिस व मातम करते हैं।
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कर्बला दुनिया के मजलूमों को एक संदेश है कि हमेशा हक बात कहना, भले ही इसके लिए कितनी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। मजलिस में सुहेल बस्तवी व उनके साथियों ने नौहा पढ़कर दर्दनाक मंजर पेश किया। इस मौके पर मौलाना अली हसन, हाजी अनवार काजमी, जैन, इंजीनियर राजू, शम्स आबिद, अन्नू, सफदर रजा, अरशद आबिद, मेराज, नकी हैदर आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कर्बला के शहीदों का दसवां शनिवार की रात मनाया गया। शहर के कदीमी इमामबाड़ा शाबान मंजिल में सोगवारों ने नौहा व मातम किया। इमामबाड़ा परिसर में अलम व ताबूत निकाला गया, जिसकी जियारत के लिए लोग उमड़ पड़े।
साबिर रिजवी व उनके साथियों ने मर्सिया व सलाम पेश किया। इमाम हुसैन के अनुयायियों का मानना है कि कर्बला में इमाम की शहादत के बाद यजीदियों ने शहीदों का दसवां, बीसवां व चेहलुम मनाने की अनुमति इमाम के घर वालों को नहीं दी थी। आज पूरी दुनिया में इमाम के चाहने वाले उनका दसवां, बीसवां मनाते हैं।
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मौलाना हैदर मेंहदी ने मजलिस को संबोधित करते हुए यजीद के जुल्म व इमाम की शहादत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आज से करीब 1400 साल पहले इराक के कर्बला नामक स्थान पर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कुर्बानी पेश की थी। तीन दिन तक इमाम के दल को भूखा व प्यासा रखकर समर्पण के लिए विवश किया गया, लेकिन इमाम ने सिर नहीं झुकाया। सत्य की रक्षा के लिए दिए गए उनके इस बलिदान को मोहम्मद साहब के अनुयायी याद करते हुए मजलिस व मातम करते हैं।
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कर्बला दुनिया के मजलूमों को एक संदेश है कि हमेशा हक बात कहना, भले ही इसके लिए कितनी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। मजलिस में सुहेल बस्तवी व उनके साथियों ने नौहा पढ़कर दर्दनाक मंजर पेश किया। इस मौके पर मौलाना अली हसन, हाजी अनवार काजमी, जैन, इंजीनियर राजू, शम्स आबिद, अन्नू, सफदर रजा, अरशद आबिद, मेराज, नकी हैदर आदि मौजूद रहे।