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फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की तैयारियां पूरी, 28 लाख को दवा खिलाने का लक्ष्य

Tue, 10 May 2022 12:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 12:13 AM IST
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target to 28 lac to give medicine
28 लाख को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित
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बस्ती। वर्ष 2025 तक फाइलेरिया के खात्मे के लिए बृहस्पतिवार से चलने वाले अभियान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 12 से 27 मई तक अभियान चलेगा। इसमें आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा ‘डीईसी’ व पेट के कीड़े मारने की दवा ‘एल्बेंडाजोल’ अपनी मौजूदगी में खिलाएंगी। जिले में करीब 28 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह दवा दो साल से कम उम्र बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी वाले लोगों को नहीं खिलानी है।
यह बात यूआईपी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एसीएमओ वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (वीबीडीसी) डॉ. फकरेयार हुसैन ने कही। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता के लिए लोगों का इस बीमारी की गंभीरता व अभियान से होने वाले फायदे के संबंध में जागरूक होना जरूरी है। जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसका न तो स्थायी इलाज है और न ही इससे किसी की मौत होती है, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ शारीरिक अपंगता बढ़ती जाती है। लगातार पांच साल तक साल में एक बार दवा के सेवन से व्यक्ति इस बीमारी से सुरक्षित रह सकता है। दवा खा चुके व्यक्ति में अगर फाइलेरिया के माइक्रो फाइलेरी होते हैं तो वह निष्क्रिय हो जाते हैं तथा उससे किसी अन्य के संक्रमित होने की आशंका नहीं रह जाती है।
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अभियान में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- दो साल से कम उम्र के बच्चों को दवा न खिलाएं।
- किसी भी दशा में दवा खाली पेट न खाएं।
- गर्भवती महिला को दवा न खिलाएं।
- गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा न खिलाएं।
- दवा खाने के बाद किसी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें।
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क्या है फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया एक विशेष प्रकार के क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। सामान्य दिखने वाले संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वहीं मच्छर अगर स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है। सामान्यत: इसे हाथी पांव के नाम से जाता है। इसमें शरीर के किसी भी अंग में पैर, हाथ, अंडकोश में सूजन आ जाती है, बाद में इसमें जख्म हो जाते हैं। किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद बीमारी होने में पांच से 15 साल तक लग सकते हैं। इससे बचाव के लिए एमडीए के दौरान दवा का सेवन करें, व सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। घर के आस-पास गंदा पानी जमा न होने दें।
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