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Basti News: यूजीसी से अनुदान न मिलने से रुका महाविद्यालयों का विकास
Sun, 12 Nov 2023 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 12 Nov 2023 12:57 AM IST
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नैक मूल्यांकन न होने के कारण यूजीसी से नहीं मिलता है अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) नैक की ग्रेडिंग को लेकर जिले के महाविद्यालयों की स्थिति खराब है। जनपद में संचालित सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालयों ने अब तक नैक मूल्यांकन नहीं कराया है। इससे विद्यार्थियों व अभिभावकों के लिए उनके शैक्षिक स्तर का पता कर पाना मुश्किल होता है। ग्रांट न मिलने से महाविद्यालयों का विकास रुका गण्उ है।
जिले में 68 महाविद्यालय हैं। इनमें चार एडेड व चार राजकीय, शेष निजी महाविद्यालय हैं। एडेड व राजकीय महाविद्यालयों का विकास ग्रांट न होने से बाधित है। इन महाविद्यालयों में आधुनिक जरूरत के अनुसार कोई कोर्स संचालित नहीं किया जा रहा है। प्राचार्यों से बात करने पर पता चला कि महाविद्यालय के विकास में धन की कमी आड़े आ रही है। यदि एक बार नैक हो जाता तो यूजीसी से ग्रांट मिलनी शुरू हो जाती है। इससे महाविद्यालयों के विकास में तेजी आती। उ
ल्लेखनीय है कि नैक ग्रेडिंग के बाद ही कॉलेजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहयोग मिलता है। ग्रेडिंग न होने से एडेड महाविद्यालयों में भवन, फर्नीचर व अन्य संसाधनों का अभाव दिखता है। राजकीय महाविद्यालयों को राज्य सरकार से ग्रांट मिलता है, लेकिन इनमें भी आधुनिक जरूरतों का अभाव दिखता है।
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कोट
नैक से मूल्यांकन के लिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है। तैयारी के लिए रुपये की आवश्यकता होती है। एडेड महाविद्यालय धनाभाव से जूझ रहे हैं। इस वजह से वह तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। राजकीय महाविद्यालयों को राज्य सरकार अनुदान देती है, उनके पास बजट है, लेकिन इच्छा शक्ति नहीं है।
-डॉ. आरएस त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) नैक की ग्रेडिंग को लेकर जिले के महाविद्यालयों की स्थिति खराब है। जनपद में संचालित सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालयों ने अब तक नैक मूल्यांकन नहीं कराया है। इससे विद्यार्थियों व अभिभावकों के लिए उनके शैक्षिक स्तर का पता कर पाना मुश्किल होता है। ग्रांट न मिलने से महाविद्यालयों का विकास रुका गण्उ है।
जिले में 68 महाविद्यालय हैं। इनमें चार एडेड व चार राजकीय, शेष निजी महाविद्यालय हैं। एडेड व राजकीय महाविद्यालयों का विकास ग्रांट न होने से बाधित है। इन महाविद्यालयों में आधुनिक जरूरत के अनुसार कोई कोर्स संचालित नहीं किया जा रहा है। प्राचार्यों से बात करने पर पता चला कि महाविद्यालय के विकास में धन की कमी आड़े आ रही है। यदि एक बार नैक हो जाता तो यूजीसी से ग्रांट मिलनी शुरू हो जाती है। इससे महाविद्यालयों के विकास में तेजी आती। उ
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ल्लेखनीय है कि नैक ग्रेडिंग के बाद ही कॉलेजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहयोग मिलता है। ग्रेडिंग न होने से एडेड महाविद्यालयों में भवन, फर्नीचर व अन्य संसाधनों का अभाव दिखता है। राजकीय महाविद्यालयों को राज्य सरकार से ग्रांट मिलता है, लेकिन इनमें भी आधुनिक जरूरतों का अभाव दिखता है।
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नैक से मूल्यांकन के लिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है। तैयारी के लिए रुपये की आवश्यकता होती है। एडेड महाविद्यालय धनाभाव से जूझ रहे हैं। इस वजह से वह तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। राजकीय महाविद्यालयों को राज्य सरकार अनुदान देती है, उनके पास बजट है, लेकिन इच्छा शक्ति नहीं है।
-डॉ. आरएस त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य